UP News: बिना सूचना 47 लाख बिजली उपभोक्ताओं का बढ़ा दिया लोड, परिषद ने सरकार से की हस्तक्षेप की मांग

Amrit Vichar Network
Published By Deepak Mishra
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उत्तर प्रदेश में करीब 46.79 लाख (लगभग 47 लाख) बिजली उपभोक्ताओं का बिना पूर्व सूचना स्वीकृत विद्युत भार (लोड) बढ़ाए जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने यूपी पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) की इस कार्रवाई को उपभोक्ताओं के साथ अन्याय बताते हुए सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

लखनऊ, अमृत विचार: उत्तर प्रदेश में बिना पूर्व सूचना करीब 46.79 लाख (लगभग 47 लाख) बिजली उपभोक्ताओं का स्वीकृत विद्युत भार (लोड) बढ़ाए जाने को लेकर विवाद गहरा गया है। उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने यूपीपीसीएल की इस कार्रवाई को अन्यायपूर्ण बताते हुए सरकार से तुरंत हस्तक्षेप की मांग की है। परिषद ने आरोप लगाया कि वित्तीय वर्ष-25-26 में स्वीकृत लोड से अधिक बिजली उपयोग के आधार पर लाखों उपभोक्ताओं का लोड 1 किलोवाट से 2 किलोवाट या अन्य श्रेणी में बढ़ा दिया गया, जबकि उन्हें पहले कोई सूचना या अपना पक्ष रखने का अवसर ही नहीं दिया गया।

परिषद के अध्यक्ष और राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि विद्युत नियामक आयोग के टैरिफ आदेश के अनुसार लगातार अधिक भार उपयोग की स्थिति में उपभोक्ता को पूर्व सूचना देना अनिवार्य है। उन्होंने दावा किया कि प्रभावित उपभोक्ताओं में लगभग 50 प्रतिशत स्मार्ट मीटर धारक और करीब 25 प्रतिशत गरीब लाइफलाइन उपभोक्ता हैं। लोड बढ़ने से ये उपभोक्ता सरकारी सब्सिडी से बाहर हो रहे हैं, जिससे ग्रामीण उपभोक्ताओं पर औसतन 165 रुपये और शहरी गरीब उपभोक्ताओं पर लगभग 435 रुपये प्रतिमाह का अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा।

परिषद ने यह भी कहा कि भारत सरकार ने लोकसभा में साफ किया है कि स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं से अधिकतम डिमांड (एमडी) पेनल्टी नहीं वसूली जाएगी, लेकिन उत्तर प्रदेश में पहले एमडी पेनल्टी वसूली गई और अब उसी आधार पर लोड भी बढ़ाया जा रहा है, जो दोहरी कार्रवाई है। परिषद ने मांग की है कि बिना पूर्व सूचना बढ़ाए गए सभी लोड की समीक्षा कर गरीब उपभोक्ताओं की सब्सिडी बहाल की जाए और भविष्य में नियामकीय प्रावधानों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए।

परिषद की प्रमुख मांगें
  • बिना पूर्व सूचना बढ़ाए गए सभी बिजली लोड की समीक्षा कराई जाए।
  • गरीब एवं लाइफलाइन उपभोक्ताओं की सब्सिडी बहाल की जाए।
  • स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं पर एमडी पेनल्टी और लोड वृद्धि जैसी दोहरी कार्रवाई रोकी जाए।
  • भविष्य में लोड बढ़ाने से पहले नोटिस देकर उपभोक्ता का पक्ष सुना जाए।
  • विद्युत नियामक आयोग के नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए।

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