मलिहाबादी दशहरी का दुनियाभर में जलवा: GI टैग से मिली अलग पहचान, स्वाद और मिठास ने बढ़ाई वैश्विक मांग
रंग, सुगंध और गूदेदार स्वाद ने बनाया खास, बैगिंग तकनीक से बढ़ी गुणवत्ता और निर्यात को मिला नया आयाम
लखनऊ, अमृत विचार : लखनऊ का ''मलिहाबादी दशहरी'' देश-विदेश में मिठास घोले हुए है। यहां की दशहरी ने अपने रंग, स्वाद, सुगंध, मिठास और संरचना में विशेष पहचान बना रखी है। इस प्रजाति के आम को जीआई टैग भी मिला है। इससे दशहरी और स्थान की पहचान देश-विदेश से लोग करके मंगाते हैं। आम महोत्सव में भी मलिहाबादी दशहरी की खूब चर्चा रही।
मलिहाबादी दशहरी के सभी कायल है। ये आम गूदेदार और ज्यादा मीठा होता है, जो देश-विदेश में खूब पसंद है। जबकि अन्य जिलों व राज्यों का दशहरी रेशेदार होता है। खासकर उत्तर भारत में रेशेदार दशहरी की मांग नहीं है। यहां के लोगों की जुबां पर मलिहाबादी दशहरी ही मिठास घोले हुए है। मलिहाबाद का आम दिल्ली, पंजाब, मुंबई, राजस्थान, गुजरात, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, जम्मू, मध्य प्रदेश आदि राज्यों की मंडियों में मंडी परिषद इसे अवध नाम से बिक्री करता है।
मलिहाबादी दशहरी को अपनी विशिष्टता पर 1.25 जीआई टैग मिला है। इससे पहचान बहुत आसान है। 60 से अधिक व्यापारी व बागवान जीआई टैग के उपभोक्ता हैं, जो अपने दशहरी को जीआई टैग लगाकर देश-विदेश में बिक्री करते हैं। क्योंकि कई जिलों व राज्यों में होने वाला दशहरी व्यापारी मलिहाबादी बताकर बेचते हैं। इसलिए मलिहाबादी दशहरी की विशिष्ट पहचान के लिए जीआई टैग दिया गया है।
लखनऊ में आम बेल्ट व उत्पादकता
- मलिहाबाद, माल व काकोरी
- कुल 40 हजार हेक्टेयर में बाग
- आम उत्पादकता 18 टन प्रति हेक्टेयर
बैगिंग से आम के साथ चमका निर्यात
प्रदेश में गिरती आम की गुणवत्ता सुधार पर उद्यान विभाग ने पिछले वर्ष राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजना के तहत बैगिंग विधि शुरू की थी। विभाग की सलाह पर बागवानों ने आम के फलों को बैगिंग यानी लिफाफे से कवर करके तैयार किया है। इस विधि से फल में मौसम का विपरीत प्रभाव नहीं पड़ा। गुणवत्ता के साथ पैदावार में इजाफा हुआ है। बागवान आम कीट-रोग रहित तैयार करने लगे। चमक के साथ आकार भी बढ़ा है। मिठास भी पहले से अधिक है। बैगिंग पर अनुदान भी दिया है। इससे निर्यात में इजाफा हुआ है।
मोदी, योगी, राजनाथ समेत 300 से अधिक प्रजातियां
मलिहाबाद में प्रगतिशील बागवान 85 वर्षीय हाजी कलीम उल्लाह खान ने एक पेड़ में 300 से अधिक आम की नई प्रजाति विकसित करके नामकरण किया है। जिसे रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, मोदी, योगी, अमित शाह, मुलायम सिंह यादव, अखिलेश यादव, सचिन, डॉक्टर, ऐश्वर्या, पुलिस, अनारकली, नयनतारा, लता आदि नाम दे चुके हैं। इस उपलब्धि पर उन्हें पद्मश्री मिल चुका है।
लखनऊ पैक हाउस से आम का निर्यात
- 2016-17 - 70.56 टन
- 2017-18 - 65.237 टन
- 2018-19 - 95.24 टन
- 2019-20 - 113.488 टन
- 2020-21 - 120.507 टन
- 2021-22 - 33.3 टन
- 2022-23 - 21.07 टन
- 2023-24 - 20.659 टन
- 2024-25 - 3.975 टन
- 2025-26 - 31 टन
फल पट्टी के यह मुख्य 13 जिले
लखनऊ, बाराबंकी, अयोध्या, मेरठ, उन्नाव, बुलंदशहर, अमरोहा, सीतापुर, सहारनपुर, बागपत, प्रतापगढ़, वाराणसी व हरदोई
प्रदेश में दो वर्षों में आम एवं पल्प का ये बढ़ा निर्यात
वर्ष 2024-25 - 404 एमटी, 2.63 करोड़ रुपये
वर्ष 2025-26 - 3563 एमटी, 12.67 करोड़ रुपये
