Balrampur News : दोहरी नागरिकता पर सख्ती जरूरी, सीमा पर नागरिकता में सेंध शासन -प्रशासन की बड़ी चुनौती
बलरामपुर के जरवा थाना क्षेत्र में भारत और नेपाल दोनों देशों के दस्तावेज रखने के आरोप में 27 लोगों पर मुकदमा दर्ज हुआ है। सीमावर्ती क्षेत्रों में दोहरी पहचान और सरकारी अभिलेखों की निष्पक्ष जांच समय की मांग है।
लालजी सिंह/ बलरामपुर अमृत विचार। जनपद की करीब 82 किलोमीटर लंबी सीमा नेपाल से लगी हुई है। भारत और नेपाल के बीच सदियों पुराना 'रोटी और बेटी' का रिश्ता है। दोनों देशों के नागरिकों का सीमा के आर-पार आना-जाना अपेक्षाकृत आसान रहा है। सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से यह संबंध दोनों देशों की पहचान है, लेकिन इसी व्यवस्था का दुरुपयोग कर यदि कोई व्यक्ति दोनों देशों की नागरिकता और सरकारी सुविधाओं का लाभ उठाता है, तो यह केवल कानूनी नहीं बल्कि राष्ट्रीय हित का भी गंभीर विषय बन जाता है।
जरवा थाना क्षेत्र में भारत और नेपाल दोनों देशों के दस्तावेज रखने के आरोप में 27 लोगों के खिलाफ दर्ज मुकदमा इसी ओर इशारा करता है। यह मामला सिर्फ एक एफआईआर भर नहीं है, बल्कि इस बात का संकेत है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में दोहरी पहचान और सरकारी अभिलेखों की गहन जांच की आवश्यकता है। यदि जांच में आरोप सही साबित होते हैं तो यह केवल मतदाता सूची की त्रुटि नहीं, बल्कि सरकारी योजनाओं और लोकतांत्रिक व्यवस्था के दुरुपयोग का मामला भी होगा।
सीमावर्ती इलाकों में लंबे समय से यह चर्चा होती रही है कि कुछ लोग दोनों देशों के पहचान पत्र और मतदाता सूची में नाम दर्ज कराकर सुविधाओं का लाभ लेते हैं। लगभग हर लोकसभा और विधानसभा चुनाव में दोहरी नागरिकता का मुद्दा उठता है। राजनीतिक दल भी इसे प्रमुखता से उठाते हैं, लेकिन चुनाव समाप्त होते ही यह मुद्दा धीरे-धीरे ठंडे बस्ते में चला जाता है। इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि इस दोहरी नागरिकता और मतदाता पहचान पत्र का लाभ भी कोई ना कोई राजनीतिक दल उठाता है। जांच में ऐसे राजनीतिक दलों और नेताओं को भी बेनकाब करना चाहिए। नतीजा यह होता है कि समस्या जस की तस बनी रहती है।
ऐसे मामलों में केवल स्थानीय स्तर की जांच पर्याप्त नहीं मानी जा सकती। आवश्यकता है कि खुफिया एजेंसियां, केंद्रीय और राज्य स्तर की संबंधित संस्थाएं तथा निर्वाचन और पहचान पत्र जारी करने वाली एजेंसियां संयुक्त रूप से व्यापक सत्यापन अभियान चलाएं। जिन मामलों में कानून का उल्लंघन प्रमाणित हो, वहां नागरिकता, मतदाता पंजीकरण और अन्य सरकारी दस्तावेजों के संबंध में विधि के अनुसार कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि किसी निर्दोष व्यक्ति को केवल संदेह के आधार पर कार्रवाई का सामना न करना पड़े।
निष्पक्ष जांच से ही मजबूत होगी सीमा की सुरक्षा
सीमावर्ती जिलों की सुरक्षा केवल सीमा पर तैनात जवानों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि अभिलेखों की शुचिता, पारदर्शी जांच और समयबद्ध कार्रवाई भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। जरवा का मामला प्रशासन के लिए एक अवसर है कि वह पूरे जिले में ऐसे मामलों का निष्पक्ष सत्यापन कराए और यदि कहीं अनियमितताएं हैं तो कानून के दायरे में उनका स्थायी समाधान सुनिश्चित करे। इससे सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक पात्रों तक पहुंचेगा और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर जनता का विश्वास भी मजबूत होगा।
