Bahraich News : सिर्फ 40 सेकंड की सावधानी, नवजात के लिए सुरक्षा कवच, हाथों की स्वच्छता से आ सकती है 44 फीसदी नवजात मृत्यु में कमी

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Published By Deepak Mishra
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मानसून में नवजातों को संक्रमण से बचाएगा हैंडवॉश

मानसून की दस्तक के साथ जिले में विशेष संचारी रोग नियंत्रण अभियान पूरी रफ्तार पर है। साफ-सफाई और मच्छरों के खात्मे के साथ ही स्वास्थ्य विभाग यहां शून्य लागत वाले एक बेहद प्रभावी लाइफ-सेविंग फॉर्मूले को बढ़ावा दे रहा है।

बहराइच। मानसून की दस्तक के साथ जिले में विशेष संचारी रोग नियंत्रण अभियान पूरी रफ्तार पर है। साफ-सफाई और मच्छरों के खात्मे के साथ ही स्वास्थ्य विभाग यहां शून्य लागत वाले एक बेहद प्रभावी लाइफ-सेविंग फॉर्मूले को बढ़ावा दे रहा है। यह फॉर्मूला है हाथों की स्वच्छता। चिकित्सकों के अनुसार, सिर्फ 40 सेकंड तक साबुन-पानी से हाथ धोना नवजात को जानलेवा संक्रमणों से सबसे बड़ी सुरक्षा दे सकता है।

एसएनसीयू इंचार्ज व नवजात रोग विशेषज्ञ डॉ. असद अली के अनुसार, कोरोना काल की तरह ही नवजात शिशुओं की सुरक्षा के लिए भी बार-बार हाथ धोना सबसे बड़ा हथियार है। ऐसा इसलिए जरूरी है क्योंकि जन्म के शुरुआती 28 दिन सबसे नाजुक होते हैं और इस दौरान शिशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहद कमजोर होती है। मानसून की नमी में बैक्टीरिया तेजी से पनपते हैं, जिससे गंदे हाथों के संपर्क में आने से नवजात को सेप्सिस (खून का संक्रमण), निमोनिया और गंभीर दस्त जैसी जानलेवा बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

नोडल संचारी रोग डॉ. आर.एन. वर्मा के अनुसार, खेत, बाजार या बाहर से लौटे लोग जब बिना हाथ धोए बच्चे को छूते हैं, तो उनके हाथों के कीटाणु नवजात तक पहुंच जाते हैं। अनजाने में किया गया यही स्नेह संक्रमण का कारण बनता है। क्षेत्र की आशा कार्यकर्ता सरोजनी बताती हैं कि शुरुआत में लोग हाथ धोने का महत्व नहीं समझते थे। लेकिन जब गृह भ्रमण के दौरान हमने शिशु को छूने से पहले खुद अपने हाथ साबुन-पानी से धोया और माताओं को हाथ धुलने के सभी चरण सिखाए, तो उनके व्यवहार में बड़ा बदलाव आया। अब परिवार के सदस्य खुद आगे बढ़कर बच्चे को छूने से पहले अच्छी तरह हाथ धोना सुनिश्चित करने लगे हैं।

डब्ल्यूएचओ और विभिन्न अध्ययनों के अनुसार, नवजात को छूने से पहले साबुन-पानी से हाथ धोने की आदत शिशु मृत्यु दर में 40 से 44 प्रतिशत तक कमी ला सकती है। इससे बच्चों में डायरिया के मामले 30 से 40 प्रतिशत और निमोनिया व श्वसन संक्रमण 25 से 50 प्रतिशत तक कम हो जाते हैं। नोडल संचारी रोग डॉ. आर.एन. वर्मा के अनुसार, नवजातों के लिए जानलेवा साबित होने वाले सेप्सिस (खून के संक्रमण) के खिलाफ भी यह स्वच्छता सबसे मजबूत सुरक्षा कवच है।

जानिए क्या बोले सीएमओ डॉ. संजय कुमार

सीएमओ डॉ. संजय कुमार ने बताया कि 31 जुलाई तक चलने वाले संचारी रोग नियंत्रण अभियान का मुख्य उद्देश्य लोगों के व्यवहार में बदलाव लाना है। हमारी आशा और एएनएम कार्यकर्ता घर-घर जाकर परिवारों को जागरूक कर रही हैं कि बच्चे को छूने, स्तनपान कराने, नैपी बदलने या बाहर से आने पर हाथ अवश्य धोएं। यह छोटी सी आदत शिशु मृत्यु दर को कम करने में मील का पत्थर साबित हो सकती है। सीएमओ ने आमजन से अपील की है कि शिशु को गोद में लेने या छूने से पहले, माता द्वारा शिशु को स्तनपान कराने से पहले, बच्चे के कपड़े या नैपी/डायपर बदलने के बाद, शौचालय का उपयोग करने या बाहर से घर लौटने के बाद हाथ अवश्य धोयें।

कब-कब जरूर धोएं हाथ?
  • नवजात को गोद में लेने या छूने से पहले।
  • शिशु को स्तनपान कराने से पहले।
  • नैपी या डायपर बदलने के बाद।
  • शौचालय के इस्तेमाल के बाद।
  • बाहर से घर लौटने के बाद।
  • खाना बनाने या खिलाने से पहले।
बॉक्स: हाथ धोने से क्या होंगे फायदे?
  • नवजात मृत्यु दर में 40-44% तक कमी
  • डायरिया के मामलों में 30-40% तक कमी
  • निमोनिया और श्वसन संक्रमण में 25-50% तक कमी
  • सेप्सिस (खून का संक्रमण) का खतरा कम।
  • नवजात की रोग प्रतिरोधक क्षमता को संक्रमण से सुरक्षा।

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