लखीमपुर खीरी : नया सवेरा सीएलएफ का चुनाव स्थगित, सैकड़ों महिलाओं को लगा झटका

Amrit Vichar Network
Published By Deepak Mishra
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लखीमपुर खीरी, अमृत विचार : निघासन विकासखंड के विभिन्न संकुल स्तरीय संघों (सीएलएफ) में वर्षों से एक ही पदों पर नियम विरुद्ध तरीके से जमे पदाधिकारियों के बदलाव के लिए शुरू की गई चुनाव प्रक्रिया फिलहाल स्थगित कर दी गई है। इस फैसले से भ्रष्टाचार के खिलाफ मोर्चा खोले और नए चुनाव की मांग को लेकर तीन माह से आंदोलन कर रही सैकड़ों महिलाओं को बड़ा झटका लगा है। चुनाव टलने के बाद महिलाओं में मायूसी और प्रशासन के खिलाफ नाराजगी है। 

निघासन विकासखंड के आदर्श प्रेरणा संकुल स्तरीय संघ सहित अन्य सीएलएफ में कई पदाधिकारी वर्षों से अपने पदों पर बने हुए हैं, जबकि नियमानुसार उनका कार्यकाल केवल दो वर्ष का है। बेलरायां सीएलएफ में करोड़ों रुपये के कथित घोटाले की जांच और सभी संकुलों में नए चुनाव कराने की मांग को लेकर चारों क्लस्टरों की महिलाएं करीब तीन महीने से लगातार संघर्ष कर रही थीं। 

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उपायुक्त एनआरएलएम जितेंद्र कुमार मिश्र के निर्देश पर बीडीओ ने नया सवेरा संकुल, मूड़ाबुजुर्ग के चुनाव के लिए 6 जुलाई की तिथि घोषित की थी। चुनाव की घोषणा के बाद विरोधी गुट की महिलाओं ने चुनाव का विरोध शुरू कर दिया। शुक्रवार को निघासन में दोनों गुट आमने-सामने आ गए, जहां विवाद मारपीट तक पहुंच गया। इस दौरान विरोध कर रही महिलाओं ने बीएमएम आशीष दीक्षित को हटाने की मांग भी उठाई। 

घटनाक्रम में उस समय नया मोड़ आ गया, जब उपायुक्त ने उसी दिन बीएमएम आशीष दीक्षित का स्थानांतरण कुंभी ब्लॉक कर दिया। इसके बाद से ही चुनाव स्थगित होने की आशंका बढ़ गई थी। आखिरकार यह आशंका सही साबित हुई और बीडीओ ने निर्धारित चुनाव प्रक्रिया को फिलहाल स्थगित कर दिया। 

चुनाव टलने से भ्रष्टाचार की जांच और पदाधिकारियों के बदलाव की उम्मीद लगाए बैठी महिलाओं में निराशा है। उनका कहना है कि उपायुक्त एनआरएलएम के संरक्षण में ही करोड़ों रुपये की वित्तीय अनियमितताएं हुई। उपायुक्त खुद चाहते थे कि पदाधिकारियों का चुनाव न हो सके। उन्होंने कहा कि जब तक निष्पक्ष जांच और नियमानुसार चुनाव नहीं कराए जाते, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।

ब्लॉक स्तरीय जांच को भी दबा गए उपायुक्त

घोटाले की खबरें जब अमृत विचार में प्रमुखता से छपी तो हरकत में आए डीसी जितेंद्र कुमार मिश्रा ने तीन सदस्यीय जांच टीम गठित की थी। जांच टीम में शामिल एडीओ निघासन राकेश कुमार, फूलबेहड़ के अनुराग पांडेय और धौरहरा के अनुज अवस्थी ने जांच कर 3 जून 2026 को रिपोर्ट उपायुक्त को सौंप दी थी, जिसमें लाखों रुपये की वित्तीय अनियमितताएं मिली थी। साथ ही सीएलएफ के पदाधिकारियों को वर्ष 2016 से अपने पदों पर यथावत पाया था। टीम ने पदाधिकारियों के बदलाव पर जोर दिया था, लेकिन उपायुक्त जांच की बात कहकर रिपोर्ट दबाए रहे और कार्रवाई से बचते रहे।

उपायुक्त की लापरवाही बनी बड़ी वजह

निघासन में शुक्रवार को महिलाओं के साथ आरोपी पक्ष की महिलाओं की मारपीट की घटना ने सभी को हैरान कर दिया है। इस घटना के पीछे उपायुक्त स्वरोजगार जितेंद्र कुमार मिश्रा की बड़ी लापरवाही उजागर हुई है। माना जाता है कि यदि उपायुक्त  कार्रवाई और चुनाव को लेकर टालमटोल न करते और समय से कार्रवाई कर देते तो शायद यह घटना न होती। पीड़ित पक्ष की महिलाओं ने उपायुक्त को दोषी ठहराते हुए उनका स्थानांतरण कर निष्पक्ष जांच की मांग की है।

बीएमएम का स्थानांतरण होने के कारण फिलहाल चुनाव को स्थगित कर दिया गया है। जल्द ही चुनाव की अगली तिथि घोषित की जाएगी... जयेश कुमार सिंह बीडीओ निघासन।

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