राम मंदिर चढ़ावा कांड : बड़े नामों पर टिकी देश की नजर, साक्ष्य जुटाने में जुटी पुलिस, अविनाश शुक्ला का मकान सील

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Published By Deepak Mishra
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रिमांड पर लिए आठों आरोपियों के घरों पर छापेमारी, 79 लाख बरामदगी का क्राइम सीन रिक्रिएशन

अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा कांड में एसआईटी ने आठों आरोपियों के साथ क्राइम सीन रिक्रिएशन किया। चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं। योगी सरकार के निर्देश पर चल रही जांच में अब कोर्ट में चार्जशीट के लिए सबूत जुटाए जा रहे हैं।

लखनऊ/अयोध्या, अमृत विचार : राम मंदिर चढ़ावा कांड में देशभर की नजर बड़े नामों पर कार्रवाई को लेकर टिकी है। मुख्य आरोपी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू के बयान में आए महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी अनिल मिश्रा और निर्माण सहायक गोपाल राव जैसे बड़े नामों पर घेराबंदी शुरू हो गई है। रविवार को पुलिस ने टीमें बनाकर रिमांड पर लिए आठों आरोपियों के साथ भोर में ही क्राइम सीन रिक्रिएशन किया। सबसे अधिक नकदी बरामदी के आरोपी अविनाश शुक्ला के कौशलपुरी स्थित किराए के मकान को पुलिस ने सील कर दिया है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश में गठित एसआईटी की जांच में आए तथ्यों के आधार पर अब कोर्ट में चार्जशीट दाखिल करने लिए साक्ष्य एकत्रित करने की वैज्ञानिक और तकनीकी जांच शुरू हो गई है। मुकदमे के विवेचक सीओ अयोध्या के नेतृत्व में छह टीमों ने रविवार को टिन्नू यादव, अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, मनीष यादव समेत सभी आरोपियों के घरों पर एक साथ दबिश दी। परिजनों और पड़ोसियों से पूछताछ की गई। बैंक पासबुक, आधार कार्ड समेत जब्त दस्तावेज जब्त किए गए। गणना स्थल से लेकर 79 लाख नकदी बरामदगी के ठिकानों पर ऑन कैमरा दृश्य दोहराए गए।

इसका मुख्य उद्देश्य यह जांचना था कि आरोपियों द्वारा बताई गई घटना की कहानी असली सबूतों और परिस्थितियों से मेल खाए। साथ ही बयानों की पुष्टि आरोपी और गवाहों के बयानों की सत्यता परखी गई। इस पूरी प्रक्रिया की बारीकी से वीडियोग्राफी हुई, ताकि अदालत में इसे एक मजबूत वैज्ञानिक और परिस्थितिजन्य साक्ष्य के रूप में पेश किया जा सके। जांच के बीच सबसे बड़ा सवाल ट्रस्ट से इस्तीफा देने वाले महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा और निर्माण सहायक गोपाल राव की भूमिका को लेकर है।

क्या प्रशासनिक जवाबदेही केवल पद छोड़ने तक सीमित रहेगी या उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे कानूनी कार्रवाई भी होगी। चोरी की जानकारी मिलने, सीसीटीवी फुटेज देखने और पुलिस की मदद से नकदी बरामद होने के बावजूद तत्काल एफआईआर दर्ज नहीं कराने के पीछे क्या इन जिम्मेदार पदाधिकारियों के क्या उद्देश्य थे। माना जा रहा है कि आरोपियों से आमने-सामने पूछताछ, डिजिटल और वित्तीय साक्ष्यों के मिलान के बाद विवेचना का दायरा बढ़ सकता है। हालांकि किसी भी नए व्यक्ति को आरोपी बनाए जाने का निर्णय उपलब्ध साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।

सोशल मीडिया पर गूंज
इस मामले पर राजनीतिक और धार्मिक हलकों से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं आई हैं:..
 
  1. अखिलेश यादव (सपा): "जो नेशन फर्स्ट कहते थे, उनके लिए डोनेशन फर्स्ट है। जनता रामधन का हिसाब मांग रही है।"
  2. आलोक कुमार (विहिप): "सोना-चांदी और बहुमूल्य चढ़ावा पूरी तरह सुरक्षित है। बिना आधार के आरोप समाज में भ्रम फैलाते हैं।"
  3. स्वामी गोविंददेव गिरि (ट्रस्ट): "ट्रस्ट निष्पक्ष जांच और दोषियों के विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्रवाई के लिए प्रतिबद्ध है।"
  4. करपात्री महाराज: "इतने संवेदनशील मामले में की जांच सीबीआई जैसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जानी चाहिए।"

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