Gonda News: लोकगायक शिवपूजन शुक्ल को ‘वाग्धारा नवरत्न सम्मान-2026’, अवधी संस्कृति संरक्षण के लिए मिला सम्मान
अवधी लोकगीतों को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए शिवपूजन शुक्ल मॉरीशस, इंडोनेशिया, जकार्ता, बाली और नेपाल सहित कई देशों की सांस्कृतिक यात्राएं भी कर चुके हैं। उनकी चर्चित कृति ‘चरनवाँ कै धूर’ के लिए उन्हें उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान द्वारा मलिक मोहम्मद जायसी सम्मान से भी सम्मानित किया जा चुका है।
गोंडा, अमृत विचार: तरबगंज तहसील अंतर्गत जमथा गांव निवासी लोकगायक एवं साहित्यकार शिवपूजन शुक्ल को अवधी संस्कृति और लोककलाओं के संरक्षण एवं संवर्धन में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रतिष्ठित ‘वाग्धारा नवरत्न सम्मान-2026’ से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान शनिवार को मुंबई में आयोजित भव्य समारोह में तेलंगाना के राज्यपाल शिवप्रताप शुक्ल ने उन्हें प्रदान किया।
शिवपूजन शुक्ल लंबे समय से अवधी लोकसंस्कृति के संरक्षण और प्रचार-प्रसार में सक्रिय हैं। आकाशवाणी और दूरदर्शन के माध्यम से उन्होंने अवधी लोकगीत तथा भजन गायक के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। इसके साथ ही वे विलुप्त होती पारंपरिक लोक विधाओं, विशेषकर अवधी ग्राम्य गीत, संस्कार गीत और लोकनाट्य नौटंकी को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से निःशुल्क प्रशिक्षण कार्यशालाओं का संचालन कर रहे हैं।
उन्होंने प्रयागराज महाकुंभ, लखनऊ, सीतापुर सहित कई शहरों में लोककला प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए हैं, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाओं और युवाओं ने भाग लेकर पारंपरिक लोककलाओं का प्रशिक्षण प्राप्त किया। उनकी यह पहल लोक संस्कृति के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
अवधी लोकगीतों को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए शिवपूजन शुक्ल मॉरीशस कई देशों की सांस्कृतिक यात्राएं भी कर चुके हैं
अवधी लोकगीतों को दिलाई अंतरराष्ट्रीय पहचान
अवधी लोकगीतों को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए शिवपूजन शुक्ल मॉरीशस, इंडोनेशिया, जकार्ता, बाली और नेपाल सहित कई देशों की सांस्कृतिक यात्राएं भी कर चुके हैं। उनकी चर्चित कृति ‘चरनवाँ कै धूर’ के लिए उन्हें उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान द्वारा मलिक मोहम्मद जायसी सम्मान से भी सम्मानित किया जा चुका है। उनके सम्मानित होने पर जनपद के साहित्यकारों, कलाकारों और शुभचिंतकों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे जनपद के लिए गौरव का क्षण बताया है।
