राम मंदिर चढ़ावा गबन मामला : चोरी के आभूषण गलाकर पहचान मिटाने की साजिश? SIT इस एंगल पर भी कर रही जांच

Amrit Vichar Network
Published By Deepak Mishra
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लखनऊ के दो ज्वेलर्स से बरामद हुई सोने की ईंटे, इसे भी राम मंदिर चोरी से जुड़ा माना जा रहा

राम मंदिर चढ़ावा गबन मामले की जांच कर रही एसआईटी अब इस पहलू की भी जांच कर रही है कि कहीं चोरी किए गए सोने-चांदी के आभूषणों को गलाकर उनकी पहचान तो नहीं मिटाई गई। आभूषण बरामद न होने के बाद जांच एजेंसियों ने स्थानीय सर्राफा बाजार, बैंक रिकॉर्ड और प्रिंटिंग एंड मिंटिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (मिंट) से जुड़े दस्तावेज खंगालने शुरू कर दिए हैं। वहीं, ट्रस्ट के रिकॉर्ड और बहुमूल्य चढ़ावे के रखरखाव की प्रक्रिया भी जांच के दायरे में है।

विशाल तिवारी/अयोध्या, अमृत विचार : दूसरे चरण की जांच में एसआईटी ट्रस्ट द्वारा जमीन खरीदने में वित्तीय अनियमितता करने व आभूषण आदि का गबन करने के आरोपों की जांच कर रही है। जांच के विषय में यह भी शामिल है कि कहीं चोरी किए गए सोने-चांदी के आभूषणों को गलाकर उनकी पहचान मिटाने की कोशिश तो नहीं की गई।

वहीं, सूत्रों के अनुसार जांच टीम ने लखनऊ से दो ज्वेलर्स को उठाया है, जिनके पास से कई लाख की सोने की ईंटें बरामद होने की चर्चा है। जिसे राम मंदिर चोरी से जोड़कर देखा जा रहा है। सूत्रों के अनुसार अब तक हुई पुलिस की छापेमारी में चोरी से जुड़े आभूषण बरामद नहीं होने के बाद संदेह बढ़ गया है।

संभावना जताई जा रही है कि कहीं आरोपियों ने चोरी किए हुए जेवरातों को गलवा तो नहीं दिया है। इसको लेकर पुलिस ने स्थानीय सर्राफा बाजार में उन दुकानों पर भी जांच पड़ताल की है जहां जेवरातों को गलाने का काम किया जाता है। यहां से कुछ हासिल न होने से संभावना जताई जा रही है कि इसके लिए अन्य जिले या प्रदेशों का रुख किया गया होगा।

सूत्रों के अनुसार एसआईटी ने जेवरात दान काउंटर के प्रभारी केडी तिवारी से मंदिर में रखे आभूषणों, चढ़ावे की बहुमूल्य वस्तुओं और उनके रखरखाव की व्यवस्था की जानकारी ली है। टीम ने आभूषणों और अन्य बहुमूल्य वस्तुओं से जुड़े अभिलेख, रिकॉर्ड तथा भारत सरकार के उपक्रम प्रिंटिंग एंड मिंटिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (मिंट) के साथ हुए लेन-देन का पूरा विवरण भी मांगा है। इसके अलावा बैंकों और मिंट को भेजी गई धातुओं का पूरा हिसाब भी खंगाला जा रहा है, ताकि सच्चाई सामने आ सके।

जांच के एंगल में यह भी शामिल है कि कहीं चोरी किए गए सोने और चांदी के आभूषणों को गलवाकर उनकी पहचान खत्म करने की कोशिश तो नहीं की गई। जांच में यह भी सामने आया है कि ट्रस्ट की हर तीसरे महीने होने वाली बैठक में नकद दान और आय का विवरण रखा जाता था, लेकिन सोने-चांदी और अन्य बहुमूल्य दान सामग्री की मात्रा, मूल्यांकन तथा उपलब्ध स्टॉक का विस्तृत ब्यौरा नियमित एजेंडे का हिस्सा नहीं रहा। इसको लेकर भी चंपत राय से पूछताछ की गई है।

जांच के घेरे में ये अहम बिंदु
  • चोरी के सोने-चांदी के आभूषण गलाकर पहचान मिटाने की आशंका।
  • अब तक की छापेमारी में चोरी से जुड़े आभूषण बरामद नहीं हुए।
  • स्थानीय सर्राफा बाजार में जेवर गलाने वाली दुकानों पर जांच, लेकिन कोई ठोस सुराग नहीं।
  • दूसरे जिले या राज्य में आभूषण गलाने की संभावना पर भी एसआईटी की नजर।
  • मिंट और बैंक रिकॉर्ड से सोने-चांदी के लेनदेन का मिलान किया जा रहा है।
  • मंदिर के जेवरात दान काउंटर के रिकॉर्ड और रखरखाव व्यवस्था की भी जांच।
  • ट्रस्ट की बैठकों में बहुमूल्य चढ़ावे का विस्तृत स्टॉक रिकॉर्ड नहीं रखने के पहलू की भी पड़ताल।

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