Gonda News : घाघरा नदी में मगरमच्छ का कहर, हमले में भैंस चराने गए युवक की मौत, दहशत में नदी किनारे के गांव
ग्रामीणों ने वन विभाग से नदी किनारे निगरानी और सुरक्षा बढ़ाने की मांग की
गोंडा जिले के उमरी बेगमगंज थाना क्षेत्र के सोनौली मोहम्मदपुर गांव में रविवार को घाघरा (सरयू) नदी में मगरमच्छ के हमले से एक अधेड़ की दर्दनाक मौत हो गई। घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत फैल गई।
गोंडा। गोंडा जिले के उमरी बेगमगंज थाना क्षेत्र के सोनौली मोहम्मदपुर गांव में रविवार को घाघरा (सरयू) नदी में मगरमच्छ के हमले से एक अधेड़ की दर्दनाक मौत हो गई। घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत फैल गई। ग्रामीणों का कहना है कि घाघरा नदी में मगरमच्छों की संख्या लगातार बढ़ रही है और अब तक आधा दर्जन से अधिक लोगों पर हमले हो चुके हैं।
मृतक की पहचान केशव राम (55) पुत्रु बंगी, निवासी बच्ची माझा, सनौली मोहम्मदपुर के रूप में हुई है। परिजनों के अनुसार केशव राम भैंस चराने के लिए नदी किनारे गया था। इसी दौरान प्यास लगने पर वह नदी का पानी पीने के लिए झुका, तभी पानी में छिपे मगरमच्छ ने अचानक उस पर हमला कर दिया। देखते ही देखते मगरमच्छ उसे गहरे पानी की ओर खींच ले गया। शोर सुनकर आसपास मौजूद ग्रामीण मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। बाद में काफी तलाश के बाद उसका शव बरामद किया गया।

ग्रामीणों का कहना है कि घाघरा नदी अब मगरमच्छों का बसेरा बनती जा रही है। नदी में नहाने, मवेशी चराने और मछली पकड़ने जाने वाले लोगों में लगातार भय बना हुआ है। स्थानीय लोगों के मुताबिक इस वर्ष मगरमच्छ के हमले में यह दूसरी मौत है, जबकि कुछ समय पहले एक अन्य व्यक्ति को ग्रामीणों ने साहस दिखाकर मगरमच्छ के चंगुल से बचा लिया था। पिछले कुछ वर्षों में आधा दर्जन से अधिक लोग मगरमच्छ के हमले का शिकार हो चुके हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार हिमालय से निकलने वाली घाघरा, गेरुई और शारदा नदियां अलग-अलग क्षेत्रों से होकर बहती हैं। गेरुई नदी मगरमच्छों का प्राकृतिक आवास मानी जाती है, जहां उनकी संख्या पहले से अधिक है। लेकिन अब घाघरा नदी में भी मगरमच्छों की बढ़ती मौजूदगी चिंता का विषय बन गई है। वन्यजीव विशेषज्ञ इसे जलधारा में बदलाव, आवास विस्तार और भोजन की उपलब्धता से जोड़कर देखते हैं।
गौरतलब है कि यही घाघरा नदी आगे चलकर अयोध्या में सरयू के रूप में बहती है, जहां प्रतिदिन हजारों और विशेष अवसरों पर लाखों श्रद्धालु स्नान करते हैं। ऐसे में एल्गिन ब्रिज से अयोध्या तक नदी के विभिन्न हिस्सों में मगरमच्छों की बढ़ती गतिविधियां सुरक्षा के लिहाज से गंभीर चुनौती बनती जा रही हैं। कई बार मगरमच्छ नदी से बाहर आबादी वाले क्षेत्रों में भी निकल आए हैं, जिन्हें वन विभाग की टीम ने रेस्क्यू कर वापस नदी में छोड़ा है।
ग्रामीणों ने वन विभाग और जिला प्रशासन से मांग की यह मांग
ग्रामीणों ने वन विभाग और जिला प्रशासन से मांग की है कि प्रभावित क्षेत्रों में नियमित निगरानी कराई जाए, नदी किनारे चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं, संवेदनशील घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई जाए तथा मगरमच्छों की बढ़ती संख्या पर प्रभावी नियंत्रण के लिए ठोस कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी दर्दनाक घटनाओं को रोका जा सके।
