पेले और माराडोना की श्रेणी में आ गए हैं मेस्सी और एंबाप्पे

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Published By Deepak Mishra
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2026 फीफा विश्व कप में फिर तेज हुई GOAT की बहस। पेले, डिएगो माराडोना, लियोनेल मेस्सी और किलियन एंबाप्पे के रिकॉर्ड, उपलब्धियां और विश्व कप प्रदर्शन की तुलना पढ़ें।

VIVEK SHUKLA
विवेक शुक्ला
पूर्व प्रधान सूचना अधिकारी
यूएई एंबेसी, नई दिल्ली

फीफा विश्व कप के दौरान ये सवाल हमेशा उठता है कि फुटबॉल का असली बादशाह कौन है? इस बार 2026 विश्व कप में भी यही बहस जोरों पर है। फुटबॉल का पूरा इतिहास ही महान खिलाड़ियों की तुलना से भरा पड़ा है। ब्राजील के पेले और अर्जेंटीना के डिएगो माराडोना को अक्सर सर्वकालिक महानतम माना जाता है। दोनों बिग मैच के सच्चे योद्धा थे, जिन्होंने विश्व कप जैसे सबसे बड़े मंच पर अपनी टीम को अकेले दम पर खिताब जिताया।

अब लियोनेल मेस्सी और फ्रांस के किलियन एंबाप्पे लगातार कमाल कर रहे हैं। इस 2026 विश्व कप में इन दोनों का प्रदर्शन देखकर लगता है कि अब इन्हें भी पेले-माराडोना वाली श्रेणी में रखना चाहिए या नहीं? मेस्सी तो 2022 में विश्व कप जिताकर खुद को साबित कर चुके हैं। अगर एंबाप्पे 2026 जीत गए तो उनकी दावेदारी और मजबूत हो जाएगी।

पेले को फुटबॉल का राजा ही कहते हैं। उन्होंने ब्राजील को 1958, 1962 और 1970 में विश्व कप जिताया। ये उपलब्धि आज भी अनोखी है। कोई और खिलाड़ी तीन विश्व कप नहीं जीत सका। 1958 में सिर्फ 17 साल की उम्र में उन्होंने विश्व कप जीता और फाइनल में दो गोल ठोके। कुल मिलाकर चार विश्व कप में 14 मैच खेले और 12 गोल किए। फुटबॉल का मतलब सिर्फ लंबी शॉट मारना नहीं होता।

असली बड़ा खिलाड़ी वो है, जो ड्रिबलिंग में माहिर हो, जिसे देखने दर्शक स्टेडियम में आते हैं। पेले इसमें कमाल के थे। उनके दोनों पैर चलते थे, हेडिंग भी जबरदस्त। अंतर्राष्ट्रीय मैचों में 92 खेलों में 77 गोल किए। क्लब में सैंटोस के लिए ढेर सारे खिताब जीते। उन्होंने फुटबॉल को पूरी दुनिया में लोकप्रिय बनाया।

डिएगो माराडोना 1986 विश्व कप के असली नायक थे। उनका दायां पैर तो औसत था, हेडिंग भी औसत, लेकिन उनका बायां पैर? वो जादू था! गेंद उनके बाएं पैर पर आ गई तो फिर रोकना नामुमकिन। गेंद पर नियंत्रण, विरोधी को छकाने की कला, ऐसा दोबारा नहीं देखा जाएगा। वो मैदान में हर जगह नजर आते थे। पेले की ड्रिबलिंग भी लाजवाब थी, लेकिन माराडोना उनसे थोड़े ऊपर माने जाते हैं। फ्री किक में भी मास्टर। टीम पर उनका असर गजब का था।

उन्होंने अर्जेंटीना को खिताब दिलाया। क्वार्टर फाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ 'हैंड ऑफ गॉड' गोल और मिडफील्ड से अकेले दौड़कर किया 'सेंचुरी का गोल' आज भी याद किया जाता है। 1986 में 5 गोल और 5 असिस्ट- एक विश्व कप में ऐसा करने वाले इकलौते खिलाड़ी। 91 अंतरराष्ट्रीय मैचों में 34 गोल। चार विश्व कप में 21 मैच, 8 गोल। क्लब में नेपोलि को दो सीरी ए खिताब दिलाए, जो उस वक्त इटली की सबसे बड़ी उपलब्धि थी। उनका जादू ड्रिबलिंग और विजन में था। 

बहुत से लोग मेस्सी को पहले हीद ग्रेटेस्ट ऑफ ऑल टाइम मान चुके हैं। वे अभी  900 से ज्यादा गोल कर चुके हैं। 2022 में अर्जेंटीना को विश्व कप चैंपियन बनाया। अब 2026 विश्व कप में 38 साल की उम्र में भी कमाल कर रहे हैं। ग्रुप स्टेज में हैट्रिक समेत 6 गोल दाग चुके हैं। मेस्सी का खेल शांत लेकिन घातक है।  उनकी पासिंग, फ्री किक और फिनिशिंग बेमिसाल है। 

एंबाप्पे फुटबॉल के सबसे तेज और घातक हमलावर हैं। उनकी गति अद्भुत है। डिफेंस को चकमा देकर तेजी से आगे बढ़ना, उनका सबसे बड़ा हथियार। बाएं पैर से सटीक शॉट, हेडिंग और फिनिशिंग में माहिर। गोल करते हैं और पूरी टीम को गति देते हैं। आत्मविश्वास और ठंडा दिमाग उन्हें बड़े मैचों का खिलाड़ी बनाता है। 2018 में 19 साल की उम्र में फ्रांस को खिताब दिलाया और यंग प्लेयर अवॉर्ड जीता। 2022 में 8 गोल किए। 2026 विश्व कप में अब तक 6 गोल रप चुके हैं। टूर्नामेंट के टॉप स्कोररों में शामिल हैं।

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