हल्द्वानी में बना देश का पहला पॉलीनेटर पार्क
अमृत विचार, हल्द्वानी। देश का पहला परागणकर्ता पार्क (पॉलीनेटर पार्क) नैनीताल जनपद के हल्द्वानी में रामपुर रोड स्थित वन अनुसंधान केंद्र में बनाया गया। मंगलवार को इस पार्क का शुभारंभ तितली विशेषज्ञ पीटर स्मैटिच और वन अनसुंधान के मुख्य वन संरक्षक संजीव चतुर्वेदी ने फीता काटकर किया। वन अनुसंधान अधिकारियों के अनुसार परागणकर्ता जैसे चिड़िया, …
अमृत विचार, हल्द्वानी। देश का पहला परागणकर्ता पार्क (पॉलीनेटर पार्क) नैनीताल जनपद के हल्द्वानी में रामपुर रोड स्थित वन अनुसंधान केंद्र में बनाया गया। मंगलवार को इस पार्क का शुभारंभ तितली विशेषज्ञ पीटर स्मैटिच और वन अनसुंधान के मुख्य वन संरक्षक संजीव चतुर्वेदी ने फीता काटकर किया।
वन अनुसंधान अधिकारियों के अनुसार परागणकर्ता जैसे चिड़िया, तितली, कीटपतंगों, ततैया, चमगादड़, मधु मक्खियां, छोटे स्तनपायी का कृषि में विशेष महत्व होता है। ये परागणकर्ता वैश्विक कृषि भूमि में 35 फीसदी भाग और 87 फसलों के उत्पादन का प्रभावित करते हैं। वहीं पृथ्वी पर 75 से 95 प्रतिशत पौधों को पुष्यीय परागण के लिए परागकों की जरूरत होती है।
मिट्टी, हवा, पानी, पोषक तत्व होने पर भी अगर ये परागणकर्ता नहीं हो तो पौधों की संख्या कम हो जाएगी। उन्होंने कहा कि एक डाटा के अनुसार परागणकर्ता 1 लाख 80 हजार पौधों की प्रजातियों से परागण करते हैं। बदलती जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग और प्राकृतिक जंगलों के अंधाधुंध कटान से इन परागणकर्ताओं का अस्तित्व पर संकट मंडराने लगा।
इधर वन अनुसंधान ने परागणकर्ताओं के संरक्षण और संवर्द्धन के लिए रामपुर रोड स्थित वन अनुसंधान केंद्र में तकरीबन चार एकड़ वन भूमि में परागणकर्ता पार्क बनाया है। इस पार्क में परागण करने वाले जीव जंतु चिड़िया, तितली, कीट पतंगों के लिए प्राकृतिक वास स्थल विकसित किया गया है। पार्क में मधु मक्खियों के रहने के लिए बी बॉक्स, तितलियों के परागण के लिए हर मौसम के फूल, कीट पतंगों के लिए व्हाइट एंड लाइट हाउस बनाए गए हैं। पार्क में छोटे-छोटे तालाब बनाए गए हैं, ताकि ये प्राणी अपनी प्यास बुझा सकें।
पार्क में तितलियों, चिड़ियों वगैरह के परागण के लिए गुड़हल, गुलाब, सेल्विया एस्टर, सूरजमुखी, मीठी नीम, नींबू, पत्थरचट्टा आदि फूलों के पौधे और लैनटाना घास लगाई गई है ताकि तितलियां अपने अंडे और लार्वा को सुरक्षित रख सकें। इस पार्क का मकसद स्कूली बच्चों, कॉलेज के विद्यार्थियों को इन पॉलीनेटर्स का महत्व बताना और संरक्षण को बढ़ावा देना है । फिलहाल ये पार्क आमजन के लिए खोल दिया गया है। इस दौरान हल्द्वानी रेंजर मदन सिंह बिष्ट आदि मौजूद थे।
तितलियों की मड पडलिंग के बनाया मड पॉन्ड
तितलियों को कीचड़ में खेलना अच्छा लगता है इसको मड पडलिंग कहते हैं। इसलिए परागण पार्क में कीचड़ का एक छोटा तालाब बनाया है। विशेषज्ञों के अनुसार तितलियां कीचड़ से इम्यूनो एसिड लेती है। इसलिए तालाब में कीचड़, इसमें पानी, और पत्थर है ताकि तितलियों को प्राकृतिक वास स्थल का अनुभव हो।
चिड़ियों को रोज मिलेंगे कटे फल
चिड़ियों को हल्के सड़े फल खाने पसंद होते हैं इसलिए पार्क में जगह-जगह फीडर बनाए गए हैं। जहां रोजाना काट कर फल रखे जाएंगे। इसके साथ ही जामुन, मीठी नीम, सेमल के भी पौधे लगाए गए हैं ताकि चिड़ियों की ज्यादा से ज्यादा प्रजातियां पार्क की तरफ रुख करें।
जीरो केमिकल 100 प्रतिशत नैचुरल
वन अनुसंधान के अनुसार यह पार्क पूरी तरह केमिकल रहित है। इसमें 100 प्रतिशत प्राकृतिक वस्तुओं का ही इस्तेमाल किया गया है। पार्क में सूखे और मृत पेड़ों को नहीं हटाया गया है ताकि वे कठफोड़वा, गिलहरी जैसे जंतुओं का वास स्थल बनें।
पार्क में अभी हैं ये परागणकर्तां
मधुमक्खियां :- एपिस मेलिफेरा व एपिड सेरेना इंडिका
तितलियां :– वाटर स्नो फ्लैट, हेड्ज ब्लू, व्हाइट ऑरेंज टिप आदि
कीट :- रेड बीटल, ऑर्ब वीबर, वैस्प
चिड़िया :- स्पॉटेड डव, कठफोड़वा, कोयल, रेड व्हिस्कर्ड बुलबुल, मैना आदि
स्तनपायी जीव :- गिलहरी
देश का पहला परागणकर्तां पार्क हल्द्वानी में बनाया गया है। अभी तक सिर्फ अमेरिका, यूरोपियन देशों में ये पार्क बनाए गए हैं। दरअसल, फसल उत्पादन में परागणकर्तां का विशेष महत्व हैं लेकिन छोटे और आमजन की पहुंच से दूर होने के कारण इनका महत्व नहीं समझ पाते हैं इसलिए ये पार्क बनाया गया है जहां लोग इनका महत्व समझेंगे और इनके संरक्षण के लिए काम करेंगे। स्कूली बच्चे, विद्यार्थी, शोधार्थी, वैज्ञानिकों को भी इससे जानकारी मिलेगी।– संजीव चतुर्वेदी, मुख्य वन संरक्षक, वन अनुसंधान संस्थान हल्द्वानी
