त्योहारों में क्यों आसमान छू रहे हैं फ्लाइट टिकट के दाम? सुप्रीम कोर्ट ने एयरलाइंस को दी कड़ी चेतावनी
त्योहारों और छुट्टियों के दौरान अचानक बढ़ने वाले हवाई किराए को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने कहा कि यदि एयरलाइंस यात्रियों के हित में बनाए गए नियमों का पालन नहीं करती हैं, तो उनकी उड़ानों पर रोक लगाने जैसे कदम उठाए जा सकते हैं। मामले की अगली सुनवाई 7 सितंबर को होगी।
नई दिल्लीः त्योहारों का मौसम आम लोगों के लिए अपनों के साथ समय बिताने और घर लौटने की उम्मीद लेकर आता है। लेकिन कई यात्रियों के लिए यही सफर हवाई टिकटों की बढ़ती कीमतों के कारण चिंता का सबब बन जाता है। छुट्टियों और त्योहारों के दौरान अचानक बढ़ने वाले हवाई किराए को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कड़ा रुख अपनाया।
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए यात्रियों के हित में बनाई गई व्यवस्थाओं के पालन और उनके नियमन की स्थिति पर सवाल उठाए।
कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि एयरलाइंस नियमों का पालन नहीं करती हैं तो उनकी उड़ानें रोकने जैसे कदम उठाए जा सकते हैं।
सरकार बोली- नियम तैयार करने की प्रक्रिया अंतिम दौर में
सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल कौशिक ने अदालत को बताया कि हवाई किराए और शुल्क से जुड़े नियम तैयार करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है।
उन्होंने इसके लिए करीब तीन सप्ताह का समय मांगा। सरकार की ओर से कहा गया कि प्रक्रिया पूरी होने के बाद अंतिम रूप दिए गए नियम सुप्रीम कोर्ट के सामने रखे जाएंगे।
अदालत ने तीन सप्ताह का समय देने की मांग स्वीकार कर ली। अब मामले की अगली सुनवाई 7 सितंबर को होगी।
यात्रियों की परेशानी पर उठी किराया कैपिंग की बात
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से केंद्रीय नागर विमानन मंत्री के संसद में दिए गए उस बयान का भी जिक्र किया गया, जिसमें कहा गया था कि सरकार किराए पर कैपिंग नहीं लगा सकती।
याचिकाकर्ता ने एयरलाइंस की किराया तय करने की व्यवस्था में नियामकीय हस्तक्षेप की जरूरत बताई और यात्रियों को मनमाने किराए से राहत देने की मांग की।
पहले भी एयरलाइंस के किराए पर नाराजगी जता चुका है कोर्ट
यह पहली बार नहीं है जब सुप्रीम कोर्ट ने हवाई किराए को लेकर चिंता जताई है। पिछली सुनवाई में अदालत ने एयरलाइंस कंपनियों की ओर से किराया तय करने में मनमानी को यात्रियों के शोषण जैसा बताया था।
मामला सामाजिक कार्यकर्ता एस. लक्ष्मीनारायणन की याचिका से जुड़ा है। याचिका में निजी एयरलाइंस पर मनमाने तरीके से हवाई किराया निर्धारित करने और यात्रियों से कई तरह के अतिरिक्त शुल्क वसूलने का आरोप लगाया गया है।
सिर्फ टिकट का किराया नहीं, अतिरिक्त शुल्क भी चिंता का विषय
याचिका में कहा गया है कि यात्रियों को बेस किराए के अलावा कई तरह के अतिरिक्त शुल्क भी देने पड़ते हैं। याचिकाकर्ता ने इन शुल्कों को लेकर स्पष्ट नियम बनाने और उनके पालन की निगरानी के लिए एक नियामक संस्था गठित करने की मांग की है।
अब सबकी नजर 7 सितंबर को होने वाली अगली सुनवाई पर है। सरकार की ओर से तैयार किए जा रहे नए नियमों के सामने आने के बाद यह स्पष्ट हो सकता है कि त्योहारों और छुट्टियों में हवाई सफर करने वाले यात्रियों को बढ़ते किराए से कितनी राहत मिल पाएगी।
