Lakhimpur kheri : लखीमपुर खीरी में सामूहिक संकल्प से शराब मुक्त हुआ सैदीपुर गांव
सीमा कश्यप की मुहिम बनी मिसाल, महिलाओं की एकजुटता से शुरू हुआ अभियान
सीमा कश्यप ने सबसे पहले गांव की महिलाओं से संवाद शुरू किया। उन्होंने घर-घर जाकर शराब के कारण परिवारों पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों, घरेलू कलह और बच्चों पर पड़ने वाले नकारात्मक असर को लेकर चर्चा की। धीरे-धीरे महिलाओं की संख्या बढ़ती गई और उन्होंने शराब की दुकान के खिलाफ सामूहिक रूप से आवाज उठाने का फैसला किया। इसके बाद महिलाओं ने शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन शुरू किया।
अमृत विचार : लखीमपुर खीरी की श्रीनगर विधानसभा क्षेत्र का सैदीपुर गांव कभी शराब की दुकान को लेकर महिलाओं के आक्रोश का गवाह बना था, लेकिन आज यही गांव सामूहिक संकल्प और महिला नेतृत्व से आए बदलाव की मिसाल बन रहा है। गांव को शराबमुक्त बनाने की मुहिम में सीमा कश्यप ने महिलाओं को एकजुट कर अहम भूमिका निभाई। उनके प्रयासों से शुरू हुआ अभियान धीरे-धीरे पूरे गांव की आवाज बन गया और आखिरकार प्रशासन तक पहुंचा।
सीमा कश्यप ने सबसे पहले गांव की महिलाओं से संवाद शुरू किया। उन्होंने घर-घर जाकर शराब के कारण परिवारों पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों, घरेलू कलह और बच्चों पर पड़ने वाले नकारात्मक असर को लेकर चर्चा की। धीरे-धीरे महिलाओं की संख्या बढ़ती गई और उन्होंने शराब की दुकान के खिलाफ सामूहिक रूप से आवाज उठाने का फैसला किया। इसके बाद महिलाओं ने शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन शुरू किया।
बच्चों पर पड़ता दुष्प्रभाव
उनका कहना था कि गांव में शराब की दुकान होने से सामाजिक माहौल प्रभावित हो रहा है और इसका सबसे अधिक असर परिवारों तथा बच्चों पर पड़ता है। महिलाओं का आंदोलन शांतिपूर्ण रहा, लेकिन उनकी मांग को लेकर संकल्प मजबूत था। महिलाओं ने अपनी मांग पंचायत और प्रशासन के समक्ष रखी। लगातार प्रयास और सामूहिक जनदबाव के बाद सैदीपुर से शराब का ठेका हटाने की कार्रवाई हुई।
इस अभियान में महिलाओं की एकजुटता सबसे बड़ी ताकत बनी। युवाओं और अन्य ग्रामीणों ने भी महिलाओं के प्रयास का समर्थन किया। शराब की दुकान हटने के बाद ग्रामीणों में इसे लेकर संतोष है। ग्रामीणों का मानना है कि इससे गांव के सामाजिक माहौल में सकारात्मक बदलाव आएगा और परिवारों तथा बच्चों के लिए बेहतर वातावरण तैयार होगा।
किसी एक व्यक्ति की जीत नहीं
सीमा कश्यप का कहना है कि सैदीपुर को शराबमुक्त कराने का श्रेय किसी एक व्यक्ति को नहीं दिया जा सकता। यह पूरे गांव के सामूहिक संकल्प और महिलाओं की एकजुटता का परिणाम है। उनका कहना है कि यदि ग्रामीण अपने बच्चों और परिवारों को नशे से दूर रखने का संकल्प लें तो सामाजिक बदलाव जरूर संभव है।
अब महिलाओं का प्रयास शराब की दुकान हटने तक सीमित नहीं है। वे गांव में नशे के खिलाफ जागरूकता बनाए रखने, युवाओं और बच्चों को नशे से दूर रखने तथा भविष्य में किसी भी तरह के नशे के प्रसार के खिलाफ सामूहिक रूप से आवाज उठाने पर जोर दे रही हैं।
