मुरादाबाद: लाकडाउन में भी बहती रही साहित्य की गंगा, रचनाकार किए गए सम्मानित

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मुरादाबाद, अमृत विचार। हिंदी साहित्य में वर्ष 2020 प्रकाशन की दृष्टि से उपलब्धियों से भरा रहा वहीं विभिन्न साहित्यिक संस्थाओं द्वारा महानगर के अनेक साहित्यकारों को सम्मानित भी किया गया। लाकडाउन में भी साहित्यिक गतिविधियां थमी नहीं, संस्थाओं द्वारा ऑनलाइन कार्यक्रमों का सिलसिला निरंतर जारी रहा। वर्ष 2020 की शुरुआत 4 जनवरी को काव्य सौरभ …

मुरादाबाद, अमृत विचार। हिंदी साहित्य में वर्ष 2020 प्रकाशन की दृष्टि से उपलब्धियों से भरा रहा वहीं विभिन्न साहित्यिक संस्थाओं द्वारा महानगर के अनेक साहित्यकारों को सम्मानित भी किया गया। लाकडाउन में भी साहित्यिक गतिविधियां थमी नहीं, संस्थाओं द्वारा ऑनलाइन कार्यक्रमों का सिलसिला निरंतर जारी रहा।

वर्ष 2020 की शुरुआत 4 जनवरी को काव्य सौरभ रस्तोगी के संपादन और अम्बरीष गर्ग व डा. मनोज रस्तोगी के सह संपादन में प्रकाशित महाराजा हरिश्चंद्र महाविद्यालय के सेवानिवृत्त प्राचार्य व साहित्यकार डा. विश्व अवतार जैमिनी की कृति ‘बिंदु बिंदु सिंधु’ (आत्मकथा व संस्मरण) के लोकार्पण से हुई। 11 जनवरी को साहित्यिक संस्थाओं अक्षरा, सवेरा, अंतरा और हिंदी साहित्य सदन के संयुक्त तत्वावधान में हास्य व्यंग्य कवि डा. मक्खन मुरादाबादी की काव्य कृति ‘कड़वाहट मीठी सी’ का लोकार्पण हुआ।

कवयित्री डा. रीता सिंह की काव्य कृति ‘वीरों का वंदन’ का लोकार्पण चंदौसी में हुई। 23 फरवरी को साहित्यपीडिया की ओर से आयोजित भव्य कार्यक्रम में डा.अर्चना गुप्ता की दो काव्य कृतियां ‘अर्चना की कुंडलियां’ भाग एक और दो लोकार्पित हुईं। मोहम्मद आसिफ हुसैन की किताब ‘मुरादाबाद में गजल का सफर का आनलाइन लोकार्पण मुरादाबाद लिटरेरी क्लब द्वारा किया गया।

यह कृतियां भी हुईं प्रकाशित 
हिंदू महाविद्यालय के सेवानिवृत्त प्राचार्य डा.रामानंद शर्मा की कृति ‘रहीम ग्रंथावली’, साहित्यकार डा.महेश दिवाकर की नई कविताओं का संग्रह ‘लोकधारा – तीन’, छह खंड काव्यों का संग्रह लोकधारा- चार’, भूटान का यात्रावृत ‘सुमनों के देश में’ तथा आत्मकथात्मक शैली में लिखी कृति ‘भारत की जीवनदायिनी सरिताएं’ भी इसी वर्ष प्रकाशित हुईं। डा.राकेश चक्र की नौ कृतियों- ‘चतुराई का पुरस्कार’, ‘गाते अक्षर खुशियों के स्वर’, ‘क्योंकि तुम ईश्वर हो’, ‘लजीज पुलाव’, ‘मेरी प्रिय गजलें’, ‘मुक्त निर्झर’, ‘पोस्टकार्ड लिफाफा और दादाजी’, ‘बुद्ध की तरह’, और ‘श्रीमदभगवत गीता दोहाभिव्यक्ति’ का प्रकाशन साल की महत्वपूर्ण उपलब्धि है ।

इन साहित्यकारों का हुआ सम्मान
मानसरोवर कन्या इंटर का.लेज परिवार की ओर से 19 जनवरी को आयोजित भव्य समारोह में साहित्यकार डा. मनोज रस्तोगी, मोनिका शर्मा मासूम और प्रदीप शर्मा को ‘श्रीमती शकुंतला प्रकाश गुप्ता साहित्य एवं कला विभूति सम्मान’ प्रदान किया गया। संस्कार भारती की ओर से आयोजित कार्यक्रम में कवि डा. मक्खन मुरादाबादी और ईशांत शर्मा ईशु सम्मानित हुए। पहली मार्च को अखिल भारतीय साहित्य परिषद की ओर से हुए कार्यक्रम में चार साहित्यकारों फक्कड़ मुरादाबादी, विवेक निर्मल, श्री कृष्ण शुक्ल तथा मोनिका शर्मा मासूम को सम्मानित किया गया। गजल एकेडमी की ओर से 8 मार्च को ‘जश्ने मक्खन मुरादाबादी’ का आयोजन हुआ।

इसमें डा. मक्खन मुरादाबादी,कंचन खन्ना और निकखत मुरादाबादी को सम्मानित किया गया। हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर 13 सितंबर को हिंदी साहित्य संगम ने डा.मक्खन मुरादाबादी को ‘हिंदी साहित्य गौरव’ से सम्मानित किया तो राष्ट्रभाषा हिंदी प्रचार समिति ने 14 सितंबर को कवि अशोक विद्रोही को। पुष्पेंद्र वर्णवाल स्मृति न्यास की ओर से 11 नवंबर को आयोजित कार्यक्रम में मुरादाबाद के साहित्य संरक्षण में उल्लेखनीय योगदान हेतु डा. मनोज रस्तोगी के साथ योगेंद्र पाल सिंह विश्नोई, विवेक निर्मल और अनिल कांत बंसल को सम्मानित किया गया।

13 दिसंबर को हिंदी साहित्य संगम की ओर से यश भारती माहेश्वर तिवारी को उनके आवास पर पहुंचकर ‘श्री राजेंद्र मोहन शर्मा श्रृंग स्मृति साहित्य साधक सम्मान’ प्रदान किया गया। रामपुर की साहित्यिक संस्था काव्यधारा की ओर से 26 जनवरी को उधम सिंह नगर में आयोजित समारोह में मुरादाबाद के साहित्यकार योगेंद्र वर्मा व्योम को ‘किशन सरोज स्मृति साहित्य सम्मान’ से सम्मानित किया गया।

ये आयोजन भी रहे उल्लेखनीय
हरिश्चंद्र वंशीय सभा की ओर से वसंत पंचमी पर काव्य गोष्ठी, उत्तर प्रदेश खादी ग्रामोद्योग बोर्ड की ओर से खादी प्रदर्शनी में कवि सम्मेलनों, विजयश्री वेलफेयर सोसायटी की ओर से होली पर काव्य रस फुहार, हस्ताक्षर की ओर से दोहा गोष्ठी का आयोजन भी उल्लेखनीय रहा।

लॉकडाउन में जारी रहे ऑनलाइन आयोजन
वाट्सएप पर संचालित समूह ‘साहित्यिक मुरादाबाद’ द्वारा आयोजित ‘कवि सम्मेलन’, ‘पुस्तक समीक्षा’, ‘बाल साहित्य गोष्ठी’, ‘लघुकथा-कहानी गोष्ठी’, ‘संगीत गोष्ठी’ एवं ‘यादों के झरोखों से’ कार्यक्रम पूरे वर्ष निरंतर जारी रहे। वहीं ‘मुरादाबाद लिटरेरी क्लब’ की ओर से महानगर के अनेक साहित्यकारों की रचनाओं पर ऑनलाइन चर्चा दिवंगत साहित्यकारों के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर परिचर्चा इस साल की महत्वपूर्ण उपलब्धि रही।

हिंदी भवन का लोकार्पण अंतरराष्ट्रीय साहित्य कला मंच के संस्थापक अध्यक्ष डा. महेश दिवाकर द्वारा मिलन विहार दिल्ली मार्ग पर हिंदी भवन का लोकार्पण भी वर्ष की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि रही।

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