नेपाल त्रासदी में 300 भारतीय लापता, कर्नाटक ने जारी किया Google Form, केरल सरकार नागरिकों से कर रही संपर्क
नेपाल में आई त्रासदी के बाद 300 भारतीयों के लापता होने की खबर है। कर्नाटक सरकार ने जानकारी जुटाने के लिए Google Form जारी किया है, जबकि केरल सरकार अपने नागरिकों से संपर्क कर रही है।
काठमांडू। नेपाल में बुधवार को अचानक आई भीषण बाढ़ में मरने वालों की संख्या बढ़कर 177 हो गई है और इस त्रासदी में 300 भारतीय पर्यटकों समेत सैंकड़ों लोग लापता हैं जिनकी तलाश युद्धस्तर पर जारी है। बुधवार को अचानक आई बाढ़ ने नेपाल के तीन जिलों में भारी तबाही मचाई है।
नेपाल पुलिस ने बृहस्पतिवार को बताया कि भोटेकोशी नदी में आई बाढ़ के बाद 12 और शव बरामद किए गए, जिससे मृतक संख्या बढ़कर 177 हो गई। करीब 580 पर्यटकों समेत 800 से अधिक लोग लापता हैं। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीआरआरएमए) ने एक बयान में कहा कि बुधवार को नेपाल-तिब्बत सीमा के कुछ हिस्सों में बाढ़ आने के बाद से 826 लोग लापता हैं।
एनडीआरआरएमए के आंकड़ों के अनुसार, लापता लोगों में सुरक्षा बलों के 85 जवान, विभिन्न जलविद्युत परियोजनाओं और सीमा शुल्क कार्यालयों में काम करने वाले 162 कर्मचारी तथा 579 पर्यटक शामिल हैं। हिमालयी देश नेपाल में बुधवार को अचानक आई बाढ़ ने तीन जिलों में भारी तबाही मचाई। इस बीच, चीन की सरकारी समाचार एजेंसी 'शिन्हुआ' ने बृहस्पतिवार को बताया कि चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में भी तीन लोगों की मौत हुई है और 588 लोग लापता हैं।
पुलिस के अनुसार, रसुवा में दो, नुवाकोट में 12, धादिंग में 27, चितवन में 69, गोरखा में 20, तनहूं में नौ, नवलपरासी पूर्व में 32 और नवलपरासी पश्चिम में छह लोगों की मौत हुई है। जंगल सफारी के लिए प्रसिद्ध प्रमुख पर्यटन स्थल चितवन उन कई इलाकों में शामिल है, जहां बाढ़ का पानी बढ़ने के बीच हाई अलर्ट जारी किया गया है। हिमस्खलन के कारण भोटेकोशी की सहायक नदी ल्हेंदे के बहाव में रुकावट पैदा होने के बाद यह बाढ़ आई और सबसे पहले चीन की सीमा के पास रसुवागढ़ी स्थित तिमुरे इलाके में बाढ़ का कहर टूटा।
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने बृहस्पतिवार को कहा कि अचानक आई बाढ़ में लापता बताए जा रहे हजारों लोगों में करीब 300 भारतीय पर्यटक शामिल हैं। खनाल ने यह भी पुष्टि की कि रसुवा क्षेत्र में हुई इस त्रासदी में 160 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों लोगों का अभी पता नहीं चल पाया है। खनाल ने कहा, ''हजारों परिवारों ने अपने घर खो दिए हैं...हम अब भी आपदा के पूरे स्वरूप का आकलन करने की कोशिश कर रहे हैं।''
इस बीच, प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लेने के लिए बृहस्पतिवार को नुवाकोट जिले की बिदुर नगरपालिका का दौरा किया। प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, बुनियादी ढांचा विकास मंत्री सुनील लम्साल भी उनके साथ थे। टीम सड़क मार्ग से काठमांडू से बिदुर के लिए रवाना हुई, जो बाढ़ से सबसे बुरी तरह प्रभावित इलाकों में से एक है। बुधवार को रसुवा में भोटेकोशी नदी का पानी बढ़ने से नदी किनारे बसे इलाकों में भारी नुकसान हुआ था और उसके बाद से शाह बचाव एवं राहत कार्यों की लगातार निगरानी कर रहे हैं।
महाराष्ट्र के 4 पर्यटक
महाराष्ट्र प्रशासन नेपाल के रासुवा जिले की भोटेकोशी नदी में अचानक आयी बाढ़ के बाद पड़ोसी देश में फंसे राज्य के लोगों की स्थिति पर लगातार नजर रख रही है। संबंधित अधिकारियों ने गुरुवार को बताया कि राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने महाराष्ट्र के निवासियों का ठौर-ठिकाना और सुरक्षा सुनिश्चित करने के प्रयास तेज कर दिये हैं। विभाग जिला प्रशासन एवं अन्य संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर काम कर रहा है। प्रशासन ने कहा कि अब तक महाराष्ट्र के चार पर्यटकों के साथ संपर्क स्थापित किया जा चुका है। इनमें से दो मुंबई एवं दो पुणे के रहने वाले हैं। सभी की स्थिति पर नज़र रखी जा रही है।
असम CM हिमंत शर्मा ने जताई चिंता
असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने नेपाल में अचानक आई विनाशकारी बाढ़ को लेकर चिंता जताई । उन्होंने कहा कि असम इस मुश्किल घड़ी में पड़ोसी देश के लोगों के साथ एकजुटता से खड़ा है। बुधवार को नेपाल में आई भीषण बाढ़ में कई लोग, सुरक्षाकर्मी और विदेशी पर्यटक लापता हो गए हैं। इसे हाल के वर्षों में देश की सबसे बड़ी प्राकृतिक आपदाओं में से एक माना जा रहा है।
शर्मा ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ और इससे हुई जनहानि व लोगों की परेशानियों को लेकर मैं बेहद चिंतित हूं।'' मुख्यमंत्री ने सभी लोगों की सुरक्षा और स्थिति के जल्द सामान्य होने की प्रार्थना की। उन्होंने कहा, ''इस कठिन समय में असम की जनता नेपाल में अपने भाई-बहनों के साथ पूरी एकजुटता के साथ खड़ी है। हमारी संवेदनाएं उन परिवारों के साथ हैं, जिन्होंने अपने प्रियजनों को खोया है और जो इस आपदा से प्रभावित हुए हैं।''
कर्नाटक सरकार ने गूगल फॉर्म भरकर जानकारी देने को कहा
कर्नाटक सरकार ने नेपाल और तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र (टीएआर) में अचानक आई बाढ़ तथा सीमा क्षेत्र और आसपास के इलाकों में उत्पन्न अन्य व्यवधानों के कारण फंसे राज्य के लोगों की जानकारी मांगी है। राजस्व विभाग के आपदा प्रबंधन सचिवालय ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि वह फंसे लोगों का ब्योरा जुटा रहा है ताकि बचाव, सुरक्षित निकासी और अन्य जरूरी सहायता के लिए समन्वय किया जा सके।
विभाग ने कहा, ''फंसे हुए लोगों, उनके परिजनों और यात्रा संचालकों से अनुरोध है कि वे गूगल फॉर्म के जरिए जानकारी उपलब्ध कराएं।'' विभाग ने कहा कि इस जानकारी के आधार पर राज्य सरकार विदेश मंत्रालय, नेपाल में भारतीय दूतावास और बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास के साथ समन्वय कर सकेगी। मदद चाहने वाले लोगों से राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र (एसईओसी) के 1070 या 080-22253707 नंबर पर संपर्क करने को कहा गया है। गूगल फॉर्म पर कर्नाटक सरकार के राजस्व विभाग के राहत आयुक्त, सचिव मनोज कुमार मीणा (आईएएस) के हस्ताक्षर हैं।
केरलम के 37 पर्यटक फंसे
पय्यन्नूर विधायक वी. कुन्हीकृष्णन ने कहा है कि उनके निर्वाचन क्षेत्र के 37 लोग बाढ़ के कारण नेपाल में फंसे हुए हैं। कुन्हीकृष्णन ने बुधवार रात फेसबुक पर एक पोस्ट में कहा कि उन्होंने इस मामले को मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन के संज्ञान में लाया है और पर्यटकों के वर्तमान स्थान का ब्योरा तथा फोन नंबर मुख्यमंत्री कार्यालय को सौंप दिए हैं।
विधायक ने कहा कि यह जानकारी पर्यटकों के परिवार के सदस्यों को दे दी गई है और घबराने की कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि सभी 37 लोग सुरक्षित हैं।उन्होंने कहा, "हमारी यात्रा पर गए सभी लोगों से बात हुई है।''
बाढ़ के बाद केरलम सरकार ने बुधवार रात नेपाल में फंसे पर्यटकों को वापस लाने के लिए तत्काल हस्तक्षेप शुरू किया। मुख्यमंत्री सतीशन ने केरलम के मुख्य सचिव को विदेश मंत्रालय और नेपाल स्थित भारतीय दूतावास के साथ करीबी समन्वय स्थापित करने का निर्देश दिया, ताकि पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और उन्हें जल्द से जल्द वहां से निकाला जा सके। केरलम सरकार ने नेपाल में फंसे पर्यटकों और राज्य में उनके परिजनों के लिए संबंधित अधिकारियों से संपर्क करने हेतु हेल्पलाइन नंबर 9447111844 और 9747132147 भी जारी किए हैं।
बाढ़ प्रभावित सीमावर्ती इलाकों का CM सम्राट चौधरी ने किया हवाई सर्वेक्षण
नेपाल में बुधवार को अचानक आई बाढ़ के बाद बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बृहस्पतिवार को बगहा, वाल्मीकि नगर, बेतिया और मोतिहारी के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण किया। अधिकारियों ने बताया कि पड़ोसी नेपाल से गंडक नदी के रास्ते बाढ़ का पानी बुधवार को बिहार में प्रवेश कर वाल्मीकि नगर बैराज तक पहुंच गया था, जिसके बाद जलप्रवाह को नियंत्रित करने के लिए बैराज के सभी 36 फाटक खोल दिए गए और पूरे राज्य में सतर्कता बरती गई।
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर लिखा, "नेपाल में आई बाढ़ की स्थिति को देखते हुए मैंने बिहार के सीमावर्ती क्षेत्रों बगहा, वाल्मीकि नगर, बेतिया और मोतिहारी में बाढ़ की स्थिति का हवाई सर्वेक्षण किया। साथ ही संभावित प्रभाव, आवश्यक एहतियाती उपायों, सुरक्षा तथा राहत एवं बचाव कार्यों को लेकर प्रशासनिक तैयारियों की समीक्षा की।"
उन्होंने कहा, "संबंधित अधिकारियों को पूरी तत्परता और मुस्तैदी के साथ सभी आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया गया है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और उन्हें हरसंभव सहायता उपलब्ध कराना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।"
गंडक में जलस्तर हुआ कम
इस बीच, गंडक नदी के जलस्तर में गिरावट आने और वाल्मीकि नगर स्थित गंडक बैराज से पानी छोड़े जाने की मात्रा कम होने के कारण बृहस्पतिवार को बाढ़ की आशंका थोड़ी कम हुई। पश्चिम चंपारण जिले के वाल्मीकि नगर बैराज से जलप्रवाह बुधवार रात 11 बजे के 1.50 लाख क्यूसेक से घटकर बृहस्पतिवार सुबह 1.04 लाख क्यूसेक रह गया। जल संसाधन विभाग ने बृहस्पतिवार को जारी एक बयान में कहा, "वाल्मीकि नगर स्थित गंडक बैराज से जलप्रवाह बुधवार रात 11 बजे 1.50 लाख क्यूसेक के उच्चतम स्तर पर पहुंचा था, जिसके बाद जलस्तर में कमी आनी शुरू हो गई।
44 जवान, 28 नेपाल पुलिस, सशस्त्र पुलिस बल के 13 कर्मियों से संपर्क नहीं
राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीआरआरएमए) के आंकड़ों के अनुसार, अचानक आई बाढ़ में करीब 826 लोग लापता हैं। अधिकारियों ने बताया कि नेपाल सेना के कम से कम 44 जवान, नेपाल पुलिस के 28 कर्मी और सशस्त्र पुलिस बल के 13 कर्मियों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। इसी तरह विभिन्न जलविद्युत परियोजनाओं और सीमा शुल्क कार्यालयों में काम करने वाले करीब 162 लोग भी लापता हैं।
अधिकारियों के अनुसार, बाढ़ के बाद 579 पर्यटकों, जिनमें विदेशी नागरिक भी शामिल हैं, का पता नहीं चल पाया है। इनमें से ज्यादातर तिब्बत में कैलाश मानसरोवर और नेपाल के बागमती प्रांत में गोसाईंकुंड जाने के रास्ते में थे। बाढ़ से जुड़ी घटनाओं में अब तक 73 लोग घायल हुए हैं।
इनमें रसुवा के 43, नुवाकोट के 27 और धादिंग के तीन लोग शामिल हैं। उनका काठमांडू स्थित त्रिभुवन विश्वविद्यालय शिक्षण अस्पताल समेत विभिन्न अस्पतालों में इलाज किया जा रहा है। बाढ़ में मुख्य रूप से मध्य नेपाल में मोटर वाहन गुजरने योग्य 35 पुल, 45 झूला पुल और 40 किलोमीटर पक्की सड़क क्षतिग्रस्त हुई है।
नेपाल-चीन सीमा के पास नदी का बहाव रुका
एनडीआरआरएमए के अनुसार, रसुवा के तिमुरे इलाके में फंसे 123 लोगों को बचाया गया, जिनमें 94 नेपाली और 29 विदेशी नागरिक हैं।
समाचार पोर्टल 'माई रिपब्लिका' के अनुसार, आपदा प्रबंधन अधिकारियों ने कहा कि प्रारंभिक आकलन है कि हिमस्खलन से नेपाल-चीन सीमा के पास नदी का बहाव रुक गया, जिसके कारण यह बाढ़ आई। आकलन के अनुसार त्रिशुली नदी में आई बाढ़ का कारण ऊपरी धारा में हिमस्खलन का सैलाब आने से ल्हेंदे नदी का मार्ग अवरुद्ध होना था।
'माई रिपब्लिका' की बृहस्पतिवार की खबर के अनुसार, आपदा विशेषज्ञ बसंत राज अधिकारी का भी कहना है कि हिमस्खलन की वजह से ल्हेंदे नदी का बहाव रुक गया और बाढ़ आ गई। कुछ स्थानों पर कीचड़ और चट्टानों के जमा होने से सड़कें बंद हो गई हैं, जबकि अन्य जगहों पर बाढ़ के संभावित खतरे को देखते हुए यातायात रोक दिया गया है।
काठमांडू के नागढुंगा से मुगलिंग तक जाने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग का एक हिस्सा अनिश्चितकाल के लिए पूरी तरह बंद कर दिया गया है। यह काठमांडू को देश के अन्य जिलों से जोड़ने वाला प्रमुख राजमार्ग है। इसी तरह इलाम जिले के मेची राजमार्ग, कावरे के बीपी राजमार्ग, मकवानपुर के कांती लोकपथ, रसुवा और नुवाकोट के राष्ट्रीय राजमार्ग, धादिंग के पृथ्वी राजमार्ग तथा चितवन और रुकुम वेस्ट में जाजरकोट-डोल्पा सड़क खंड को जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग पर भी यातायात रोक दिया गया है।
