यूपी के लाखों ट्रेडर्स फंसे घाटे के जाल में : प्रदेश के ट्रेडर्स के 8,130 करोड़ डूबे, 88.8 फीसदी ट्रेडर्स को नुकसान

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Edited By Virendra Pandey
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कानपुर, अमृत विचार : शेयर बाजार में फ्यूचर-ऑप्शन यानी इक्विटी डेरिवेटिव्स कारोबार को लेकर सेबी की ताजा रिपोर्ट ने उत्तर प्रदेश के निवेशकों के लिए भी खतरे की घंटी बजाई है। वित्त वर्ष 2025-26 में उत्तर प्रदेश के करीब 9.05 लाख व्यक्तिगत ट्रेडर्स ने इक्विटी डेरिवेटिव्स सेगमेंट में कारोबार किया। इनमें 88.8 प्रतिशत ट्रेडर्स को नुकसान उठाना पड़ा और प्रदेश के ट्रेडर्स का कुल शुद्ध नुकसान करीब 8,130 करोड़ रहा। प्रति नुकसान उठाने वाले ट्रेडर का औसत नुकसान करीब 89,834 रहा।

शेयर बाजार विशेषज्ञ राजीव सिंह ने बताया कि सेबी की अगस्त 2026 में जारी रिपोर्ट के अनुसार, महाराष्ट्र और गुजरात के बाद उत्तर प्रदेश देश के उन बड़े राज्यों में है जहां डेरिवेटिव्स कारोबार में ट्रेडर्स की संख्या और नुकसान दोनों काफी अधिक हैं। महाराष्ट्र, गुजरात और उत्तर प्रदेश को मिलाकर देश के करीब 44 प्रतिशत व्यक्तिगत डेरिवेटिव्स ट्रेडर्स आते हैं और इन तीन राज्यों का हिस्सा कुल शुद्ध नुकसान में करीब 41 प्रतिशत है। सेबी के राज्यवार आंकड़ों के मुताबिक उत्तर प्रदेश में वित्तीय वर्ष 26 में 9.05 लाख ट्रेडर्स ने इक्विटी डेरिवेटिव्स में कारोबार किया। इन ट्रेडर्स का कुल टर्नओवर करीब 17 लाख करोड़ रहा, जबकि इनके इक्विटी पोर्टफोलियो का कुल मूल्य करीब 28,487 करोड़ था। डेरिवेटिव्स कारोबार और इक्विटी पोर्टफोलियो के बीच अनुपात करीब 59.7 गुना रहा। यानी कारोबार का आकार निवेशकों के वास्तविक इक्विटी पोर्टफोलियो की तुलना में कई गुना बड़ा था। 

सेबी के आंकड़ों में उत्तर प्रदेश का ट्रेडर बेस वित्तीय वर्ष 26 में करीब 24 प्रतिशत घटा, जबकि राज्य के व्यक्तिगत ट्रेडर्स के नुकसान में करीब 1.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इससे संकेत मिलता है कि ट्रेडर्स की संख्या घटने के बावजूद डेरिवेटिव्स कारोबार से होने वाला नुकसान चिंता का विषय बना हुआ है। सेबी की रिपोर्ट का एक महत्वपूर्ण पहलू महिला निवेशकों की बढ़ती भागीदारी है। देश में इक्विटी डेरिवेटिव्स कारोबार करने वाले व्यक्तिगत ट्रेडर्स में महिलाओं की हिस्सेदारी वित्तीय वर्ष 24 में 13.7 प्रतिशत थी, जो बढ़कर वित्तीय वर्ष 26 में 17.1 प्रतिशत हो गई। यानी तीन वर्षों में महिला भागीदारी में करीब 3.4 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी हुई है।

वित्तीय वर्ष 26 में देश में करीब 13.10 लाख महिला ट्रेडर्स ने इक्विटी डेरिवेटिव्स में कारोबार किया। इनमें लगभग 11.10 लाख महिलाएं नुकसान में रहीं और उनका कुल शुद्ध नुकसान करीब 15,211 करोड़ रहा। महिला ट्रेडर्स का औसत नुकसान करीब 1.16 लाख रहा। हालांकि महिला निवेशकों की स्थिति पुरुषों की तुलना में कुछ बेहतर रही।वित्तीय वर्ष 26 में 84.73 प्रतिशत महिला ट्रेडर्स को नुकसान हुआ, जबकि पुरुष ट्रेडर्स में यह अनुपात 88.56 प्रतिशत था। यानी महिलाओं में नुकसान उठाने वालों का अनुपात पुरुषों की तुलना में करीब 3.8 प्रतिशत अंक कम रहा।

96,637 करोड़ इक्विटी पोर्टफोलियो

महिला निवेशकों से जुड़ा एक दिलचस्प आंकड़ा यह है कि वित्तीय वर्ष 26 में महिला ट्रेडर्स के पास कुल इक्विटी पोर्टफोलियो करीब 96,637 करोड़ था, जबकि पुरुष ट्रेडर्स का पोर्टफोलियो करीब 3.53 लाख करोड़ था। महिलाओं की कुल डेरिवेटिव्स टर्नओवर में हिस्सेदारी 21 प्रतिशत रही और कुल इक्विटी पोर्टफोलियो में भी उनकी हिस्सेदारी 21 प्रतिशत थी। कुल नुकसान में उनका हिस्सा करीब 17 प्रतिशत रहा। सेबी के मुताबिक महिलाओं और पुरुषों दोनों का टर्नओवर-टू-पोर्टफोलियो अनुपात करीब 42.5 गुना रहा। इसका अर्थ यह है कि महिला निवेशकों की संख्या भले ही पुरुषों से काफी कम है, लेकिन डेरिवेटिव्स बाजार में उनकी भागीदारी अब महज प्रतीकात्मक नहीं रह गई है।

1 लाख से कम पूंजी

रिपोर्ट का एक और महत्वपूर्ण निष्कर्ष छोटे निवेशकों से जुड़ा है। वित्तीय वर्षँ 26 में करीब 77 प्रतिशत ट्रेडर्स ने 1 लाख से कम पूंजी का इस्तेमाल किया। इनका टर्नओवर कुल बाजार गतिविधि का केवल 8 प्रतिशत था, लेकिन नुकसान में इनकी हिस्सेदारी 14 प्रतिशत रही। 1 लाख से ज्यादा पूंजी लगाने वाले केवल 23 प्रतिशत ट्रेडर्स ने 92 प्रतिशत टर्नओवर और 86 प्रतिशत नुकसान में योगदान दिया।

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