जन्माष्टमी पर कृष्णमय होगा लखनऊ, डिजिटल झांकियों से लेकर 56 भोग तक दिखेगा ब्रज का रंग

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Edited By Muskan Dixit
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4 सितंबर को राजधानी में कान्हा के जन्मोत्सव की धूम, गणेशगंज में दिखेंगी कृष्ण की डिजिटल लीलाएं तो डालीगंज में होगा 65वां जन्माष्टमी उत्सव

लखनऊ। चार सितंबर को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर राजधानी लखनऊ भक्ति और उत्सव के रंग में रंगने जा रही है। पुराने लखनऊ की हवेलियों और ठाकुरद्वारों से लेकर चौक, गणेशगंज, डालीगंज और सुशांत गोल्फ सिटी स्थित इस्कॉन मंदिर तक भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की तैयारियां तेज हो गई हैं।

कहीं फूलों से कान्हा का भव्य शृंगार होगा तो कहीं आधुनिक डिजिटल तकनीक के जरिए कृष्ण की लीलाओं को जीवंत किया जाएगा। कई मंदिरों में 56 भोग की झांकी सजेगी, जबकि कहीं महारास और बाल लीलाओं का मंचन श्रद्धालुओं को ब्रज की याद दिलाएगा। आधी रात भगवान कृष्ण के जन्म के साथ घंटे-घड़ियाल और भजन-कीर्तन से राजधानी का माहौल भक्तिमय हो उठेगा।

गणेशगंज में डिजिटल झांकियों में दिखेंगी कृष्ण की लीलाएं

गणेशगंज में इस बार भी डिजिटल झांकी जन्माष्टमी के प्रमुख आकर्षणों में शामिल होगी। आधुनिक तकनीक के जरिए भगवान कृष्ण की विभिन्न लीलाओं को प्रस्तुत किया जाएगा।

परंपरागत राधा-कृष्ण झांकी के साथ 20 फीट ऊंचा शिवलिंग और अमरनाथ गुफा की झांकी भी तैयार की जा रही है। बर्फीली गुफा का दृश्य श्रद्धालुओं को अमरनाथ धाम जैसा अनुभव कराने वाला होगा।

डिजिटल झांकी प्रतिदिन शाम छह बजे से रात 12 बजे तक चलेगी। हर दिन इसका स्वरूप बदलेगा। पहले दिन गोकुल गमन, दूसरे दिन माखन चोरी, तीसरे दिन गोचारण लीला, चौथे दिन अघासुर वध, पांचवें दिन कालिया मर्दन और छठे दिन बरसाना की होली के दृश्य दिखाए जाएंगे।

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चौक में 56 भोग और ब्रज की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां

चौक स्थित द्वारिकाधीश मंदिर में जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण को 56 थालों में 56 प्रकार के भोग अर्पित किए जाएंगे। इसके साथ ही मथुरा से आए कलाकार कृष्ण की विभिन्न लीलाओं पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करेंगे।

मंदिर में फूलों की विशेष सजावट और भगवान के भव्य शृंगार की तैयारी चल रही है। पुराने लखनऊ के ठाकुरद्वारों और ऐतिहासिक हवेलियों में भी जन्माष्टमी की अलग छटा देखने को मिलेगी।

चूड़ी वाली गली और चौक स्थित प्राचीन मदनमोहन हवेली समेत कई ठाकुरद्वारों में भगवान की विशेष सेवा, शृंगार और भोग की तैयारियां की जा रही हैं।

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इस्कॉन मंदिर में दिनभर भजन-कीर्तन

सुशांत गोल्फ सिटी स्थित इस्कॉन मंदिर में जन्माष्टमी पर महामहोत्सव का आयोजन होगा। दिनभर भजन-कीर्तन और विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम चलते रहेंगे।

मंदिर के मीडिया प्रभारी प्रदीप शुक्ला के अनुसार, इस्कॉन मंदिर की स्थापना के बाद से यहां भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव की परंपरा लगातार जारी है। जन्माष्टमी पर भगवान का दूध, दही, घी, शहद और तीर्थ जल से अभिषेक किया जाएगा।

इस बार सांस्कृतिक कार्यक्रमों में कलाकार कृष्ण की लीलाओं और विभिन्न झांकियों की प्रस्तुति देंगे। भगवान के जन्म से लेकर छठे दिन तक उत्सव का क्रम जारी रहेगा।

डालीगंज में 65वां जन्माष्टमी उत्सव, मंच पर उतरेंगी कृष्ण लीलाएं

डालीगंज में इस बार 65वां जन्माष्टमी उत्सव मनाया जाएगा। यहां श्रीकृष्ण के अवतार से लेकर धर्म की स्थापना तक की विभिन्न लीलाओं को मंचन के माध्यम से प्रस्तुत किया जाएगा।

भव्य झांकियों के साथ भजन-कीर्तन भी होगा। मंदिर में श्रीकृष्ण और राधा-माधव का विशेष शृंगार किया जाएगा। कलाकार महारास और कान्हा की बाल लीलाओं का मंचन करेंगे।

फूलों से सजे मंदिर में दक्षिणावर्त शंख से पंचाभिषेक और 56 भोग का आयोजन होगा। इसके साथ ही दही-हांडी फोड़ने की परंपरा भी निभाई जाएगी।

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माधव मंदिर में ब्रज की झलक, दही हांडी से कृष्ण सेल्फी पॉइंट तक

डालीगंज स्थित श्री माधव मंदिर में जन्माष्टमी पर ब्रज की तर्ज पर भव्य आयोजन की तैयारी है। श्रीराधामाधव का फूलों से विशेष शृंगार किया जाएगा।

ब्रज से आए कलाकार महारास और भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं का मंचन करेंगे। दक्षिणावर्त लक्ष्मी शंख से श्रीकृष्ण का पंचाभिषेक होगा और 56 प्रकार के भोग की झांकी सजाई जाएगी।

श्रद्धालुओं के लिए दही हांडी, भजन संध्या और कृष्ण सेल्फी पॉइंट भी आकर्षण का केंद्र होंगे।

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खाटू श्याम मंदिर में फूल बंगले में विराजेंगे लड्डू गोपाल

बीरबल साहनी मार्ग स्थित खाटू श्याम मंदिर में श्री श्याम परिवार की ओर से श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर भव्य जन्मोत्सव मनाया जाएगा। मंदिर को देशी-विदेशी फूलों से फूल बंगला का स्वरूप दिया जाएगा। इसके साथ रंग-बिरंगी झालरों और गुब्बारों से भी विशेष सजावट की जाएगी।

अनुराग साहू के अनुसार, मध्यरात्रि में लड्डू गोपाल के जन्म के अवसर पर 101 किलो मेवा मिल्क केक काटा जाएगा। इसके साथ मेघों की गर्जना और वर्षा जैसा विशेष दृश्य भी प्रस्तुत किया जाएगा।

आधी रात जन्मेंगे कान्हा, कृष्ण भक्ति में डूबेगा शहर

लखनऊ में जन्माष्टमी का उत्सव इस बार परंपरा और आधुनिकता के अनूठे संगम के रूप में नजर आएगा। एक ओर मंदिरों में वैदिक विधि, पंचाभिषेक, 56 भोग और पारंपरिक झांकियां होंगी, वहीं दूसरी ओर डिजिटल तकनीक और आधुनिक मंचीय प्रस्तुतियों के जरिए भगवान कृष्ण की लीलाएं श्रद्धालुओं के सामने जीवंत की जाएंगी।

आधी रात भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के साथ मंदिरों में घंटे-घड़ियाल और जयकारे गूंजेंगे। शहर के अलग-अलग हिस्सों में सजे मंदिर और झांकियां राजधानी को कृष्णमय बना देंगी।

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