मुरादाबाद: बर्ड फ्लू को लेकर बढ़ी सतर्कता, भेजे स्वैब के 20 नमूने

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मुरादाबाद,अमृत विचार। केरल, हिमांचल प्रदेश सहित चार राज्यों में बर्ड फ्लू फैलने व कई अन्य राज्यों में पक्षियों के मरने की घटना से जिले में भी सतर्कता बढ़ा दी गई है। प्रदेश शासन के हाईअलर्ट किए जाने के बाद आनन-फानन में पशु चिकित्सा विभाग ने मुर्गियों के 20 नमूने भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) …

मुरादाबाद,अमृत विचार। केरल, हिमांचल प्रदेश सहित चार राज्यों में बर्ड फ्लू फैलने व कई अन्य राज्यों में पक्षियों के मरने की घटना से जिले में भी सतर्कता बढ़ा दी गई है। प्रदेश शासन के हाईअलर्ट किए जाने के बाद आनन-फानन में पशु चिकित्सा विभाग ने मुर्गियों के 20 नमूने भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) व नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हाई सिक्युरिटी एनिमल लैब भौपाल (आईसीएआर) भेज दिए हैं।

नमूने जिले के तीन बड़े पोल्ट्री फार्म के हैं। अभी छोटे पोल्ट्री फार्म को लेकर भी सर्वे शुरू कर दिया गया है। इसके लिए आठ टीमें बनाई गईं हैं, जिसमें पशु चिकित्सक व पशुधन चिकित्सक सहित चार कर्मचारी एक टीम में शामिल किए गए हैं। गुरुवार तक इन टीमों को छोटे पोल्ट्री फार्म की सूची मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी को सौंपनी होगी। उसके बाद इन पोल्ट्री फार्म में मौजूद पक्षियों के नमूने (क्लोरिकल व मुंह स्वाब) 12 जनवरी तक लिए जाएंगे।

हर ब्लाक में बनी टीमें, इन नमूनों को मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी कार्यालय पर भेजेंगे। यहां से इस विभाग को इन नमूनों को भोपाल और बरेली की दोनों लैब में 15 जनवरी तक भेजने होंगे।

शासन ने मांगी पोल्ट्री फार्म की सूची
बर्ड फ्लू के खतरे से शासन स्तर पर सख्ती दिखाई जा रही है। जल्द से जल्द जिले के सभी पोल्ट्री फार्म की सूची तलब की गई है। जिले में ताजपुर, ठाकुरद्वारा और भोजपुर में तीन बड़े पोल्ट्री फार्म हैं। यहां 20 से 30 हजार तक मुर्गी पालन होता है। तीनों में ये पक्षी करीब 75 से 80 हजार हैं। जिले में छोटे पोल्ट्री फार्म की संख्या इस विभाग को पता नहीं है। इसकी सूची के लिए सर्वे कराया जा रहा है। सूची आने के बाद उसे शासन को भी भेजनी होगी। इसके साथ ही पक्षितयों के टीके भी लगाए जाएंगे।

कबूतरबाजों को किया सावधान
-मुरादाबाद में झांझनपुर, कांठ रोड और पुराने शहर के कई मोहल्लों में कबूतरबाज हैं। काफी संख्या में वे कबूतर पालते हैं। इसके साथ ही अन्य पक्षी के पालक को भी अलर्ट जारी किया गया है। यदि कोई पक्षी अचानक मरता है तो इसकी जानकारी पशुचिकित्सा विभाग को देनी होगी।

जानें वायरस
-बर्ड फ्लू कई तरह के होते हैं लेकिन एच-5एन-1 पहला ऐसा एवियन इन्फ्लूएंजा वायरस है, जो इंसानों को संक्रमित करता है। इसका पहला मामला 1997 में हॉन्गकॉन्ग में आया था। उस समय बर्ड फ्लू के प्रकोप को पोल्ट्री फार्म में संक्रमित मुर्गियों से जोड़ा गया था। बर्ड फ्लू से संक्रमित पक्षियों के संपर्क में आने वाले जानवर और इंसान इससे आसानी से संक्रमित हो जाते हैं। यह वायरस इतना खतरनाक होता है कि इससे मौत भी हो सकती है।

जरूर जानें लक्षण
कफ आना, डायरिया, बुखार, सांस से जुड़ी दिक्कत, सिर दर्द, मांसपेशियों में दर्द, गले में खराश, नाक बहना और बेचैनी होना।

ऐसे रहें अलर्ट
– सीएमओ डा.एमसी गर्ग ने बताया कि अलग-अलग तरह के बर्ड फ्लू का अलग-अलग तरीकों का इलाज है। ज्यादतर मामलों में एंटीवायरल दवाओं से इसका इलाज किया जाता है। लक्षण दिखने के 48 घंटों के भीतर इसकी दवाएं लेनी जरूरी होती हैं। संक्रमित व्यक्ति के अलावा उसके संपर्क में आए घर के अन्य सदस्यों को भी ये दवाएं ली जाने की सलाह दी जाती है। भले ही उन लोगों में बीमारी के लक्षण ना हों। फ्लू की वैक्सीन लगवाने की सलाह भी दी जाती है। खुले बाजार में जाने, संक्रमित पक्षियों के संपर्क में आने और अधपका चिकन खाने से बचना चाहिए। हाइजीन बनाए रखें और समय-समय पर अपने हाथ धोते रहें।

-20 नमूने जांच के लिए लैब भेजे गए हैं। छोटे पोल्ट्री फार्म का सर्वे शुरू कर दिया गया है। हर महीने जो नमूने भेजे जाते हैं, उसमें बर्ड फ्लू का कोई वायरस नहीं मिला है। अलर्ट जारी कर दिया गया है और पोल्ट्री फार्म के अलावा अन्य पक्षी पालकों को पक्षी मरने की घटना की जानकारी फौरन देने को कहा गया है।
-डा. एचएस वर्मा, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी

 

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