बरेली: 22 के खिलाफ कार्रवाई, धर्मदत्त सिटी हॉस्पिटल नहीं फिर नहीं हो सका सील
अमृत विचार, बरेली। नगर निगम का लाखों रुपये किराया दबाकर बैठे बकायेदारों के खिलाफ शुक्रवार को टीम ने अभियान चलाया। इस दौरान 22 जगहों पर सीलिंग की कार्रवाई की गई जबकि धर्मदत्त सिटी हॉस्पिटल में मरीज भर्ती होने के कारण उसे सील नहीं किया जा सका। इस अस्पताल का काफी समय तक सुप्रीम कोर्ट में …
अमृत विचार, बरेली। नगर निगम का लाखों रुपये किराया दबाकर बैठे बकायेदारों के खिलाफ शुक्रवार को टीम ने अभियान चलाया। इस दौरान 22 जगहों पर सीलिंग की कार्रवाई की गई जबकि धर्मदत्त सिटी हॉस्पिटल में मरीज भर्ती होने के कारण उसे सील नहीं किया जा सका। इस अस्पताल का काफी समय तक सुप्रीम कोर्ट में मुकदमा चला था जबकि होटल ओबराय आनंद को सील करने की कार्रवाई शुरू करते ही होटल मालिक ने पांच लाख रुपये का चेक किराए के बदले टीम को दे दिया। इसके कारण सीलिंग की कार्रवाई नहीं की गई।
नगर निगम के प्रवर्तन दल के प्रभारी सुधीर भोला, दस्ता प्रभारी जयपाल सिंह पटेल की टीम सबसे पहले शहर के प्रेमनगर स्थित धर्मदत्त सिटी हॉस्पिटल पहुंची जहां मरीजों की संख्या देखकर टीम को कार्रवाई रोकना पड़ा। वहीं, पास की दुकानों और कार्यालय को सील कर दिया गया। इस हास्पिटल को करीब 25 माह पहले भी सील करने के लिए टीम पहुंची थी। उस समय भी अस्पताल में मरीज होने के कारण कदम पीछे खींचना पड़ा था लेकिन एक माह में खाली करने की मोहलत दी गई थी।
इसके बाद अपर नगर आयुक्त ने सीएमओ को पत्र भेजकर बताया था कि निगम की भूमि पर अस्पताल चल रहा है। इसके कारण सीएमओ ने अस्पताल का लाइसेंस निरस्त करते हुए अस्पताल बंद करने का निर्देश दिया था। बाद में फिर से अस्पताल चलाने के लिए लाइसेंस दे दिया गया। दो बार सीलिंग करने में नाकाम निगम के अधिकारी एक बार फिर से अस्पताल का लाइसेंस निरस्त कराने की तैयारी कर रहे हैं।
अस्पताल के बाहर बनी दुकानों के ऊपर जिला पूर्ति विभाग का क्षेत्रीय कार्यालय काफी दिनों से चल रहा है। नगर निगम की टीम ने किराया बकाया होने के कारण उन्हें सील करने की बात कही तो कर्मचारियों ने आला अफसरों से बात कराई। इस पर टीम ने सोमवार तक किराया जमा करने का समय दे दिया। वहीं, अस्पताल के बाहर 22 दुकानों को सील कर दिया गया क्योंकि इनका अनुबंध होना है। इसी के पास स्थित 42 सौ वर्ग गज भूमि पर टीम ने कुछ समय पहले अपने कब्जे में ले लिया था। इसी जगह पर आयुर्वेदिक अस्पताल को भी निगम ने सील कर दिया।
इस अस्पताल के कर्मचारियों ने कुछ सत्ताधारी और अधिकारियों को फोन कर सीलिंग की कार्रवाई रुकवाने की कोशिश की लेकिन टीम ने अनदेखी कर दी। सैदपुर हॉकिंग में गत्ता बनाने वाली फैक्ट्री पर 1.74 लाख रुपये बकाया होने पर सील कर दिया गया। रोडवेज के पास स्थित शराब की दुकान पर किराये के आठ लाख रुपये बकाया थे जिसे बकायेदार ने जमा कर दिया। एक टीम ने परसाखेड़ा में टंडन कंटेनर फैक्ट्री पर 5.74 लाख रुपये का टैक्स बकाया था, सीलिंग से बचने के लिए डेढ़ लाख रुपये जमा कर दिया।
नगर निगम और धर्मदत्त सिटी अस्पताल के बीच काफी समय तक मुकदमा चला था। सुप्रीम कोर्ट निगम के पक्ष में अंतिम फैसला दे चुका है। सीएम को पत्र भेजकर अस्पताल का लाइसेंस निरस्त करने को कहा जाएगा क्योंकि निगम के भवन में अस्पताल चलाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। जो भी दुकानें सील की गई हैं उनका अनुबंध होना है। -अजीत कुमार सिंह, अपर नगर आयुक्त
