हल्द्वानी: मुझे सामूहिक नेतृत्व से हटा देने की कृपा करें – रावत

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Edited By Amrit Vichar
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हल्द्वानी,अमृत विचार। प्रदेश कांग्रेस की राजनीति में मंगलवार को पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के ट्विट से फिर घमासान मचना तय है। हरीश रावत ने पार्टी के प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव को विधानसभा चुनाव के उस फॉर्मूले को नकार दिया जिसमें प्रभारी ने कहा था कि विधानसभा चुनाव प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह, नेता प्रतिपक्ष डॉ. इंदिरा …

हल्द्वानी,अमृत विचार। प्रदेश कांग्रेस की राजनीति में मंगलवार को पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के ट्विट से फिर घमासान मचना तय है। हरीश रावत ने पार्टी के प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव को विधानसभा चुनाव के उस फॉर्मूले को नकार दिया जिसमें प्रभारी ने कहा था कि विधानसभा चुनाव प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह, नेता प्रतिपक्ष डॉ. इंदिरा हृदयेश और हरीश रावत के संयुक्त नेतृत्व में लड़ा जाएगा। हरीश रावत ने साफ तौर पर कह दिया है कि उन्हें सामूहिक नेतृत्व से हटा देने की कृपा करें ताकि वह उन्मुक्त होकर काम कर पाएं।

रविवार को हरीश रावत ने ट्विट कर कहा था कि प्रदेश कांग्रेस में हाईकमान को सेनापति घोषित कर देना चाहिए और सरकार बनने की स्थिति में सेनापति को ही मुख्यमंत्री बनाना चाहिए। उनके बयान के बाद नेता प्रतिपक्ष डॉ. इंदिरा हृदयेश ने कहा कि प्रदेश का सेनापति प्रदेश अध्यक्ष होता और राष्ट का राष्ट्रीय अध्यक्ष, लिहाजा सेनापति घोषित करने का कोई अर्थ नहीं है। उन्होंने हरीश रावत को यह भी नसीहत दी थी कि कांग्रेस में चुनाव पूर्व चेहरा घोषित करने की परंपरा नहीं है और उत्तराखंड में कांग्रेस सरकार जब आई तो पहले कभी भी चेहरा घोषित नहीं किया गया था।

दोनों नेताओं के इस वार-पलटवार के बीच मंगलवार को हरीश रावत ने एक तरह से प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष के साथ से उन्हें सीधे तौर पर अलग कर देने की बात कहकर इस घमासान को चरम पर ला दिया है। अपने ट्विट में हरीश रावत ने लिखा, ‘श्री प्रीतम सिंह सेनापति हैं, यह बहुत स्तुत्य कथन है, उन्हें पार्टी की ओर से मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित किए जाने का अनुरोध है, मुख्यमंत्री के चेहरे के रूप में इंदिरा हृदयेश जी का भी स्वागत करूंगा, मैंने अपने नाम को लेकर जो असमंजस है उसको समाप्त किया है। देवेंद्र जी ने जो आदर दिया है, मैं उसके लिए उनको बहुत धन्यवाद देना चाहता हूं, लेकिन मुझे सामूहिक नेतृत्व की पंक्ति से हटा देने की कृपा करें, कुछ समय व्यक्ति को उन्मुक्त भी रहना चाहिये। मैं उसी दिशा में बढ़ते हुए राजनीति के बल पर धन कमाकर अब प्रदेश की राजनीति पर कब्जा जमाने की प्रवृत्ति के विरुद्ध जनजागृति जगाने का काम करना चाहता हूं।

मेरे लिए निरंतर यह देखना भी कष्टकारक है कि कांग्रेस संगठन एक होटल की चारदीवारी में कैद होकर न रह जाय। मुझे कार्यकर्ताओं और स्वराज आश्रम की गरिमा को भी पुनः स्थापित करना है, फिर कभी-कभी कुछ नाम बोझ हो जाते हैं, 2017 में कुछ ऐसी स्याही से मेरा नाम लिखा गया जो कांग्रेस के ऊपर बोझ बन गया। मैं, कांग्रेस को पापार्जित धन की स्याही से लिखे गए नाम के बोझ से भी मुक्त कर देना चाहता हूं, संयुक्त नेतृत्व में भी ऐसे नाम का बोझ पार्टी पर बना रहेगा’।

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