बरेली: चंदपुर गांव में कब्जा हटाने पहुंची बीडीए की टीम से भिड़े ग्रामीण

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Edited By Amrit Vichar
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अमृत विचार, बरेली। बरेली विकास प्राधिकरण की टीम रामगंगा नगर आवासीय परियोजना के लिए अधिग्रहित भूमि को खाली कराने गुरुवार को चंदपुर गांव पहुंची। टीम को देखकर ग्रामीण आक्रोशित हो गए और टीम को गांव में घुसने से रोक लिया। कुछ देर बाद अधीक्षण अभियंता राजीव दीक्षित सहित टीम के अन्य सदस्यों ने गांव में …

अमृत विचार, बरेली। बरेली विकास प्राधिकरण की टीम रामगंगा नगर आवासीय परियोजना के लिए अधिग्रहित भूमि को खाली कराने गुरुवार को चंदपुर गांव पहुंची। टीम को देखकर ग्रामीण आक्रोशित हो गए और टीम को गांव में घुसने से रोक लिया। कुछ देर बाद अधीक्षण अभियंता राजीव दीक्षित सहित टीम के अन्य सदस्यों ने गांव में क्रास निशान लगाए। करीब 350 मकानों की ओर बढ़े तो महिलाओं ने हंगामा खड़ा करते हुए धक्का-मुक्की शुरू कर दी। ग्रामीणों के आक्रोश को देखते हुए बीडीए की टीम पीछे हट गई। कुछ देर तक आला अफसरों से बातचीत करने के बाद अधिकारी वापस लौट गए।

बीडीए की टीम रामगंगा नगर आवासीय योजना की निर्माणाधीन 45 मीटर की सड़क के पास चंदपुर गांव में स्थित मकानों को ध्वस्त करने के लिए पहुंचे थे। इसकी जानकारी होते ही काफी संख्या में ग्रामीण भी मौके पर पहुंच गए। जेसीबी लेकर पहुंची टीम कुछ जगहों पर कब्जा हटाने की तैयारी कर रही थी कि ग्रामीण हंगामा करने लगे। इस पर टीम ने उनसे बात कर मामला शांत कराने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि मकान अवैध है जिन्हें हर हाल में गिराना होगा।

वहीं, ग्रामीणों को कहना था कि रामगंगा नगर आवासीय योजना वर्ष 2004 में बनी थी। गांव में बने भवन वर्ष 2000 के पहले के हैं और भूमि का बैनामा कराया गया है। इस पर बीडीए का कोई हक नहीं है। बीडीए के अधीक्षण अभियंता और अधिशासी अभियंता ग्रामीणों से भूमि के खारिज दाखिल के कागजात मांगने लगे। बताया कि जो भूमि ली गई है उसके बदले 80 करोड़ रुपये का मुआवजा दे दिया गया है। जिस किसान ने भूमि का बैनामा किया है उसे मुआवजा राशि दी जा चुकी है।

इस बात को गांव वालों ने झूठा करार देते हुए विरोध शुरू कर दिया। कुछ समय बाद अधीक्षण अभियंता भूमि का मानचित्र के हिसाब से सीमांकन करने के लिए गांव की ओर बढ़ने लगे। इसी बीच काफी में संख्या महिलाओं ने टीम को चारों तरफ से घेर लिया और अधीक्षण अभियंता से धक्का-मुक्की करने लगीं। खुद आप को ग्रामीणों से घिरा देख टीम गांव के बाहर रुक गई। बीडीए के कामांडो दस्ते ने ग्रामीणों से घिरे अभियंताओं को बचाकर बाहर निकाल लिया। इसकी जानकारी बीडीए वीसी को दी गई। कुछ समय तक विचार-विमर्श करने के बाद पूरी टीम बिना कब्जा हटाए लौट गई।

खाली भूमि को लेकर ग्रामीणों ने उठाया सवाल
चंदपुर के ग्रामीणों का आरोप है कि मकान बने होने के बाद भी उनकी भूमि अधिग्रहित कर ली गई लेकिन जो गांव के बगल में खाली भूमि है उसे क्यों नहीं अधिग्रहित किया गया। इससे स्पष्ट है कि ऐसा बीडीए के अफसरों की मिलीभगत से एक व्यक्ति को फायदा पहुंचाने के लिए किया गया है। गांव में जितनी भूमि पर मकान बना है उससे अधिक जमीन रामगंगा नगर आवासीय योजना के क्षेत्र में खाली है। इस पर खेती की जा रही है, किसी का भवन भी नहीं है। गांव वालों ने बताया कि सभी की भूमि पर मकान बन गए हैं। इसके बदले में खाली भूमि को बीडीए क्यों नहीं ले रहा है? इसके पीछे गहरी साजिश है।

गांव वालों का गुस्सा देख बैकफुट पर आई टीम
चंद निजी कंपनी के सुरक्षा कर्मियों के भरोसे करीब 350 मकानों पर कार्रवाई करने के लिए पहुंचना बीडीए के जिम्मेदारों की बड़ी भूल साबित हो सकती थी। अपने आशियाने के लिए लोग जान देने पर उतारू थे। कुछ महिलाओं ने टीम के लिए अपशब्द भी कहे। काफी सोच-विचार के बाद अभियंताओं की टीम वहां से लौटकर सेक्टर-9 में पहुंची और चंदपुर गांव से कब्जा हटाने की रणनीति पर विचार किया। इस पर टीम को एहसास हो गया कि पुलिस के बिना गांव में जाना ठीक नहीं होगा और वह लौट गई।

चंदपुर गांव के मकानों पर निशान लगा दिया गया है। यह भूमि बीडीए की है। जिन लोगों के मकान इस क्षेत्र में हैं वे नये मकान बनवाए गए हैं। अगर वे खुद ही कब्जा हटा लेते हैं तो बीडीए सहूलियत देगी। इसी क्षेत्र में प्राथमिकता के आधार पर इन्हें भूखंड उपलब्ध करा दिया जाएगा। -राजीव दीक्षित, अधीक्षण अभियंता

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