इस बसंत पंचमी पर बनेंगे रवि और अमृत सिद्धि योग, साधकों के लिए रहेगा विशेष दिन
राहुल जोशी, हल्द्वानी। माघ मास में शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाए जाने वाले बसंत पंचमी पर्व में इस बार दो विशेष संयोग रवि और अमृत सिद्धि योग बन रहे हैं। इसके चलते साधक शुभ मुहूर्त में पूजा-अर्चना करेंगे तो उनकी मनोकामना पूरी होगी। बंसत पंचमी मंगलवार को मनाई जाएगी और इसी दिन से …
राहुल जोशी, हल्द्वानी। माघ मास में शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाए जाने वाले बसंत पंचमी पर्व में इस बार दो विशेष संयोग रवि और अमृत सिद्धि योग बन रहे हैं। इसके चलते साधक शुभ मुहूर्त में पूजा-अर्चना करेंगे तो उनकी मनोकामना पूरी होगी। बंसत पंचमी मंगलवार को मनाई जाएगी और इसी दिन से बसंत ऋतु का आगमन भी होता है।
महादेव गिरि संस्कृत महाविद्यालय के प्राचार्य और ज्योतिषाचार्य डॉ. नवीन चंद्र जोशी ने बताया कि 16 फरवरी यानी आज बसंत पंचमी पर्व मनाया जाएगा। इस दिन रवि और अमृत सिद्धि योग होने से बसंत पंचमी का महत्व और बढ़ गया है। बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती व्यास गुफा में नदी रूप में तथा दूसरा रूप शब्द यानि विद्या रूप में अवतरित हुई। उन्होंने बताया कि बसंत पंचमी को मांगलिक कार्यों के लिए अबूझ मूहूर्त माना जाता है। इस दिन कर्णवेद चूड़ाकर्म, यज्ञोपवीत संस्कार और वेदारंभ का सबसे उत्तम मूहूर्त माना जाता है।
बसंत पंचमी का शुभ मुहूर्त
ज्योतिषाचार्य के मुताबिक, इस साल बसंत पंचमी के दिन दो खास संयोग बन रहे हैं, इस दिन रवि योग और अमृत सिद्धि योग बन रहा है। बसंत पंचमी के पूरे दिन रवि योग रहेगा। इसलिए इस दिन का महत्व और भी अधिक बढ़ गया है। उन्होंने बताया कि सुबह सात बजकर 20 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 45 मिनट तक पूजा-अर्चना का शुभ मुहूर्त हैं। इस समय पर साधक मां सरस्वती की पूजा-अर्चना कर मनोवांछित फल पा सकते हैं।
बसंत पंचमी की पूजा विधि
मां सरस्वती की मूर्ति को पीले वस्त्र अर्पित कर उनकी पूजा उपासना करनी चाहिए। इसके बाद पीली मिठाई का भोग लगाकर मां सरस्वती की वंदना करें। छात्र इस दिन मां सरस्वती का व्रत भी रख सकते हैं। माना जाता है कि इसी दिन मां सरस्वती प्रकट हुई थी। जिनके एक हाथ में वीणा और दूसरे हाथ में पुस्तक है।
