काशीपुर: राधेहरि पीजी कॉलेज के नाम से बनाई 22 छात्र-छात्राओं की फर्जी अंकतालिका

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अरुण कुमार, काशीपुर। छात्रवृत्ति घोटाले की जांच कर रही एसआईटी ने राधेहरि पीजी कॉलेज में संदिग्ध 22 छात्र-छात्राओं के दस्तावेज खंगाले। इस दौरान सभी की अंकतालिका फर्जी पायी गई। एसआईटी अब अन्य दस्तावेजों के आधार पर समाज कल्याण विभाग से छात्रवृत्ति लेने वाले संदिग्धों का पता लगाने में जुटी है। एक सप्ताह पूर्व एसआईटी छात्रवृत्ति …

अरुण कुमार, काशीपुर। छात्रवृत्ति घोटाले की जांच कर रही एसआईटी ने राधेहरि पीजी कॉलेज में संदिग्ध 22 छात्र-छात्राओं के दस्तावेज खंगाले। इस दौरान सभी की अंकतालिका फर्जी पायी गई। एसआईटी अब अन्य दस्तावेजों के आधार पर समाज कल्याण विभाग से छात्रवृत्ति लेने वाले संदिग्धों का पता लगाने में जुटी है।

एक सप्ताह पूर्व एसआईटी छात्रवृत्ति घोटाले की जांच के लिए राधेहरि राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय काशीपुर पहुंची थी। टीम ने प्राचार्य को समाज कल्याण विभाग से छात्रवृत्ति लेने वाले 22 संदिग्ध छात्र-छात्राओं की सूची सौंपी थी। जिनके आधार पर सभी की अंकतालिकाओं का महाविद्यालय के दस्तावेजों से मिलान किया गया। 13 फरवरी को महाविद्यालय ने एसआईटी को रिपोर्ट भेज दी। जिसमें कहा गया कि छात्रवृत्ति घोटाले में शामिल उक्त सभी संदिग्ध छात्र-छात्राओं ने महाविद्यालय में न तो प्रवेश लिया है और न ही उनके नाम, पता उपलब्ध है। सूचीं में अंकित छात्र-छात्राओं की अंकतालिका वर्ष 2006 से 2009 के बीच बनाई गई है। इनमें 21 छात्र बीए और 1 छात्र बीकॉम का है। सभी छात्र-छात्राएं ओबीसी जाति के दर्शाए गए हैं। अंकतालिका का जो अनुक्रमांक छात्रवृत्ति लेने के लिए दर्शाए गए हैं, वह भी फर्जी पाए गए हैं।

 

10 फरवरी को एसआईटी ने छात्रवृत्ति घोटाले से संबंधित 22 संदिग्ध छात्र-छात्राओं की सूची सौंपी थी। महाविद्यालय के दस्तावेजों से मिलान किया गया है, लेकिन उक्त छात्र-छात्राओं ने कॉलेज में कभी प्रवेश नहीं लिया है। रिपोर्ट तैयार कर एसआईटी को भेज दी गई है।

डॉ. चंद्रराम, प्राचार्य, राधेहरि राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय काशीपुर

 

छात्रवृत्ति घोटाले की जांच के लिए राधेहरि पीजी कॉलेज में 22 छात्र-छात्राओं की अंकतालिकाओं की जांच कराई गई है। कॉलेज से प्राप्त रिपोर्ट में छात्रवृत्ति में दर्शाए गए नाम, पते, अनुक्रमांक का एक भी छात्र नहीं मिला है। लगता है कि छात्रवृत्ति हड़पने में फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए हैं। अन्य दस्तावेजों के आधार पर उक्त छात्र-छात्राओं का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।

श्यामलाल विश्वकर्मा, जांच अधिकारी, एसआईटी, ऊधमसिंह नगर

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