नैनीताल: बदरीनाथ मार्ग पर अतिक्रमण करने वालों पर हाईकोर्ट सख्त, दो माह के अंदर होगी कार्रवाई

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नैनीताल, अमृत विचार। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने कोटद्वार के बदरीनाथ मार्ग पर अतिक्रमणकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिये नगर निगम को दो महीने का समय दिया है। अदालत ने निगम की कार्यशैली पर भी गंभीर प्रश्नचिन्ह लगाये हैं। मुख्य न्यायाधीश राघवेन्द्र सिंह चौहान और न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की युगलपीठ में कोटद्वार निवासी मुजीब …

नैनीताल, अमृत विचार। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने कोटद्वार के बदरीनाथ मार्ग पर अतिक्रमणकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिये नगर निगम को दो महीने का समय दिया है। अदालत ने निगम की कार्यशैली पर भी गंभीर प्रश्नचिन्ह लगाये हैं। मुख्य न्यायाधीश राघवेन्द्र सिंह चौहान और न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की युगलपीठ में कोटद्वार निवासी मुजीब नैथानी की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई हुई।

अदालत में आज कुछ लोगों की ओर से प्रार्थना पत्र देकर कहा गया कि उन्होंने अतिक्रमण नहीं किया है और उनके पास उचित दस्तावेज मौजूद हैं। आवेदनकर्ताओं की ओर से अदालत से पुराने आदेश को वापस लेने की मांग भी की गयी लेकिन याचिकाकर्ता की ओर से इसका विरोध किया गया। दूसरी ओर अदालत ने अतिक्रमणकारियों के खिलाफ कार्यवाही नहीं करने के मामले को बेहद गंभीरता से लेते हुए निगम की कार्यशैली पर प्रश्नचिन्ह लगाया है। अदालत की ओर से निगम की ओर से अतिक्रमणकारियों को जारी सार्वजनिक नोटिस पर भी सवाल खड़े किये गये और कहा गया कि यह प्रक्रिया के खिलाफ है।

अदालत ने सभी पक्षों को सुनने के बाद अपने पुराने आदेश को संशोधित करते हुए निगम को अतिक्रमण के खिलाफ कार्यवाही करने के लिये दो महीने का समय दिया है। अदालत ने यह भी कहा है कि निगम अतिक्रमणकारियों की पहचान कर उन्हें 15 दिन के अंदर व्यक्तिगत नोटिस जारी करे। इससे पहले भी अदालत ने पिछले साल 18 नवम्बर को निगम को अतिक्रमणकारियों के खिलाफ कार्यवाही करने के निर्देश दिये थे और इसके लिये निगम को आठ सप्ताह का समय दिया था।

इसी दौरान अतिक्रमणकारियों की ओर से अदालत को बताया गया कि उन्होंने इस मामले में उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है और इसके बाद अदालत ने 8 जववरी तक यथास्थिति बनाये रखने के आदेश जारी कर दिये थे। यहां बता दें कि अतिक्रमणकारियों को शीर्ष अदालत से राहत नहीं मिली और उन्होंने दोबारा से उच्च न्यायालय में ही अपनी बात रखने के निर्देश दिये थे।

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