हल्द्वानी: रिटायरमेंट के साढ़े चार साल पहले परमानेंट हुए ‘त्याड़ज्यू’
हल्द्वानी, अमृत विचार। वन विभाग में 34 साल की सेवा के बाद दैनिक वेतन भोगी कर्मी को परमानेंट कर दिया गया है हालांकि वह महज साढ़े चार साल ही परमानेंट होने की सुविधाओं का लाभ ले सकेंगे। इसके बाद उनका रिटायरमेंट है। कर्मी को परमानेंट होने को लेकर खुशी है तो एक टीस है कि …
हल्द्वानी, अमृत विचार। वन विभाग में 34 साल की सेवा के बाद दैनिक वेतन भोगी कर्मी को परमानेंट कर दिया गया है हालांकि वह महज साढ़े चार साल ही परमानेंट होने की सुविधाओं का लाभ ले सकेंगे। इसके बाद उनका रिटायरमेंट है। कर्मी को परमानेंट होने को लेकर खुशी है तो एक टीस है कि यदि पहले होते तो ग्रेड पे में अंतर हो सकता था।
हरीश चंद्र तिवारी हल्द्वानी वन डिविजन में वर्ष 1987 में दैनिक वेतन भोगी के तौर पर नियुक्त हुए थे। तब उनका वेतन महज 300 रुपये प्रतिमाह था। साल दर साल बीतते गए और उन्हें परमानेंट की आस जगती गई। लेकिन हर बार नया डीएफओ और नया आश्वासन होता था। साल 2000 में जब राज्य गठन हुआ तो उनकी उम्मीदें बढ़ गई और उन्हें पूरी उम्मीद थी कि वन विभाग में 13 साल की सेवा का फल मिलेगा। लेकिन इस बार भी निराशा ही हाथ लगी।
2004-05 में उनके साथ के कई कर्मी स्थायी हो गए लेकिन इस बार भी किस्मत ने उनका साथ नहीं दिया। इस बदलते दौर में सब कुछ बदलता रहा लेकिन तिवारी जी का आईएफएस अधिकारियों और डीएफओ कार्यालय में आने जाने वाले आगंतुकों से मुस्कुरा कर अभिवादन करने का स्टाइल नहीं बदला। इधर आईएफएस कुंदन कुमार अल्मोड़ा से तबादला होकर हल्द्वानी वन डिविजन पहुंचे।
तिवारी का मामला उन तक पहुंचा। इस पर उन्होंने तिवारी की सेवा को देखते हुए नियुक्ति की फाइल वन मुख्यालय में चलाई और परमानेंट करने के लिए विशेष पैरवी भी की। इसका नतीजा यह निकला कि वन विभाग ने 34 साल से सेवा कर रहे हरीश तिवारी को अर्दली के तौर पर परमानोंट कर दिया। अभी तक डेली वेज पर उन्हें महज 8 हजार रुपये वेतन मिलता था। लेकिन परमानेंट होने के बाद उन्हें 22 हजार रुपये वेतन, मेडिकल आदि सुविधाएं मिलेंगी। साथ ही रिटायरमेंट पर फंड आदि की सुविधाएं मिलेगी। इन सबके ऊपर तिवारी को 34 साल की सेवा का फल मिला है इसको लेकर खास उत्साहित हैं।
