हल्द्वानी: दीवारें बोल उठीं, ‘वन बचाओ, वन्यजीव बचाओ’

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

हल्द्वानी, अमृत विचार। दीवारें बोल उठेंगी … और दीवारें बोल उठीं ‘वन बचाओ वन्यजीव बचाओ’। उत्तराखंड वानिकी अनुसंधान संस्थान ने वन एवं वन्यजीव के संरक्षण एवं संवर्द्धन के लिए अनूठा प्रयोग किया है। संस्थान ने रामपुर रोड स्थित दफ्तर को जंगल के रंग में रंग दिया है। संस्थान कार्यालय की दीवारों पर उत्तराखंड में पाई …

हल्द्वानी, अमृत विचार। दीवारें बोल उठेंगी … और दीवारें बोल उठीं ‘वन बचाओ वन्यजीव बचाओ’। उत्तराखंड वानिकी अनुसंधान संस्थान ने वन एवं वन्यजीव के संरक्षण एवं संवर्द्धन के लिए अनूठा प्रयोग किया है। संस्थान ने रामपुर रोड स्थित दफ्तर को जंगल के रंग में रंग दिया है। संस्थान कार्यालय की दीवारों पर उत्तराखंड में पाई जाने वाली वनस्पतियों, वन्य जीवों, पक्षियों, प्रकृति के रंगों को उकेरा गया है। इन रंगों के जरिए वन कर्मचारियों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों और आमजन को वन पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण व संवर्द्धन का संदेश दे रहे हैं। इसके बाद वानिकी अनुसंधान संस्थान की अन्य इमारतों को भी रंगा जा सकता है।

वन बचाने के प्रचार का नया ढंग
वन विभाग पैंफलेट, नुक्कड़ नाटक, गोष्ठी, कार्यशाला, डिस्पले बोर्ड के जरिए वन संरक्षण का संदेश देता है। ये संदेश परंपरागत होने से ज्यादा प्रभावी नहीं हो पा रहे हैं। इधर वन अधिकारियों का मानना है कि मौखिक के बजाय दृश्यता का असर ज्यादा प्रभावी और ज्यादा देर तक होता है। खासकर कुछ अलग ढंग से देखी गई घटना/इमारत/वस्तु लंबे समय तक याद रहती है। इस वजह से वानिकी अनुसंधान संस्थान ने कार्यालय की दीवारों को जंगल के रंग में रंगकर जंगलों की जैव विविधता दिखाई है ताकि लंबे समय तक लोगों पर्यावरण संरक्षण का संदेश याद रखे और इस मुहिम को मुकाम तक लाया जा सके।

रूद्रप्रयाग वन डिविजन में हुई है इस तरह की पेंटिंग
उत्तराखंड में सबसे पहले गढ़वाल की रुद्रप्रयाग वन डिविजन में जंगल की जैव विविधता के रंगों में रंगा गया है। जहां इसकी प्रशंसा हुई इसके बाद वानिकी अनुसंधान संस्थान ने नए कांसेप्ट के जरिए पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने का फैसला किया।

15 युवाओं का कलाकार स्टूडियो कर रहा है पेंटिंग
‘कलाकार स्टूडियो’ के 15 पेशेवर कलाकारों का ग्रुप थीम पेंटिंग के जरिए पेंटिंग के नए आयाम दे रहा है। ग्रुप के लीडर संदीप पंवार ने बताया कि वह मूल रुप से गढ़वाल मंडल के रुद्रप्रयाग के रहने वाले हैं। उन्होंने बताया कि कहीं सुना था कि 24 घंटे यदि कोई तस्वीर आंखों की सामने रहती है तो उसका असर ज्यादा होता है और लगाव हो जाता है। बस इसी को ध्यान में रखकर उन्होंने पर्यावरण संरक्षण थीम की पेंटिंग पर काम करना शुरू किया।

इस पेंट की है खूबी 
कलाकार स्टूडियो ग्रुप के लीडर संदीप पंवार ने बताया कि दीवारों पर किए जाने वाला यह पेंट तकरीबन 12-15 साल तक टिकाऊ रहता है। इस पेंटर में सुपर प्लास्टिक एक्सटीरियर होता है इसलिए बारिश, धूल, धूप का भी असर नहीं होता है और रंग ज्यादा निखरते हैं।

 – वानिकी अनुसंधान संस्थान कार्यालय की इमारतों को जंगल की जैव विविधता के रंग उकेरे गए हैं। हमारा मकसद है कि संस्थान को जंगल के रंग में रंग दें ताकि दूर से ही वन कर्मी ही नहीं शोधार्थी, विद्यार्थी, आमजन को वन एवं वन्यजीव संरक्षण का संदेश मिल सके।
= संजीव चतुर्वेदी, मुख्य वन संरक्षक, वानिकी अनुसंधान संस्थान, उत्तराखंड

संबंधित समाचार