बाराबंकी: फर्जी प्रमाण पत्र लगाकर नौकरी करने वाला शिक्षक गिरफ्तार

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बाराबंकी, अमृत विचार। विभाग को गुमराह करके स्कूल में फर्जी प्रमाण पत्र लगाकर नौकरी हथियाने वाले शिक्षक मो. ताजिर की न्यायालय ने जमानत अर्जी खारिज करते हुए जेल भेज दिया । मिलीभगत करके नियुक्ति देने के वाले प्रबंध समेत कमेटी के चार पदाधिकारियों के खिलाफ गैर जमानती वारंट भी जारी कर दिया है। इस मामले …

बाराबंकी, अमृत विचार। विभाग को गुमराह करके स्कूल में फर्जी प्रमाण पत्र लगाकर नौकरी हथियाने वाले शिक्षक मो. ताजिर की न्यायालय ने जमानत अर्जी खारिज करते हुए जेल भेज दिया । मिलीभगत करके नियुक्ति देने के वाले प्रबंध समेत कमेटी के चार पदाधिकारियों के खिलाफ गैर जमानती वारंट भी जारी कर दिया है।

इस मामले कि शिकायत एसपी से की गई थी। जिस आधार पर मुकदमा पंजीकृत करके पुलिस ने विवेचना शुरू की तो एक के बाद एक पक्के सबूत मिल गए। मामला मसौली थाना के त्रिलोकपुर स्कूल का है। मानव संसाधन मंत्रालय की आधुनिकीकरण योजना के तहत मॉर्डन तालीम देने के लिए शिक्षकों की नियुक्त का अधिकार प्रबंध कमेटी के मैनेजर को होता है।

तहरीर के मुताबिक कस्बा त्रिलोकपुर में हाफिजुल उलूम स्कूल में सन 2007 में मो. ताजिर ने प्रबंधक हसन अहमद इसके मामा के बेटे उपाध्यक्ष मो. अल्ताफ सचिव मो. सलीम से सांठगांठ करके 31 मार्च 2007 को नियुक्ति करा ली। जबकि, मानक के अनुसार महबूब अली राईन का बेटा शिक्षक मो. ताजिर न्यूनतम शैक्षिक योग्यता नहीं रखता था।

विभाग को चकमा देकर हेराफेरी करने वाले अभिलेखों इंटर प्रमाणपत्र आदि के साथ टीचर व मैनेजर ने झूठे शपथ पत्र के साथ फाइल जमा करके शिक्षक पद ज्वाइनिंग ले ली। आरोप है कि कूटरचित कागजातों से बना शिक्षक मो. ताजिर शातिर किस्म का है। जो 2007 में ही इंटर पास हुआ।

बीपी शुक्ला इंटर कॉलेज के प्रिंसिपल द्वारा दिए गए साक्ष्यों के मुताबिक इस साल इंटर परीक्षा छह मार्च से शुरू हुई और 12 अप्रैल 2007 को समाप्त हुई थी। परीक्षा के अंक सह प्रमाण पत्र बोर्ड से कॉलेज को रिजल्ट घोषणा तिथि 31 मई 2007 के बाद प्राप्त हुए थे। मो. ताजिर नामक छात्र स्कूल से अपना रिजल्ट 27 जून 2007 को ले गया था। जबकि 31 मार्च 2007 को शिक्षक की नियुक्त हुई ।

इस मामले में मसौली पुलिस ने शिक्षक समेत पांच लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी और कूटरचित तरीको से सरकारी पैसा अर्जित करने की गम्भीर धाराओं में न्यायालय के समक्ष चार्जशीट दाखिल की गयी। धोखाधड़ी से 10 साल तक नौकरी करके सरकारी पैसा हड़पने वाला कुख्यात टीचर हाईकोर्ट से स्टे कभी कोरोना तो कभी अग्रिम जमानत के कानूनी दांव पेंच से बचने के खूब उपाय किये।

कोर्ट में बहस के दौरान वकीलों की फौज खड़ा करके केश को गलत साबित करने की कोसिसे हुई लेकिन अदालत ने मजबूत सबूत के आगे कोई राहत नही दी। कोर्ट नम्बर 1 अपर सत्र न्यायाधीस अनुपमा गोपाल निगम ने जमानत खारिज करके आरोपी को जेल भेज दिया। अन्य चार अभियुक्त के खिलाफ गैरजमानती वारंट भी जारी कर दिया ।

 

आरोपी मो. ताजिर

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