देहरादून: सीएम आवास के वास्तुदोष मिथक के चलते गंवानी पड़ गई त्रिवेंद्र को अपनी कुर्सी

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देहरादून, अमृत विचार। प्रदेश की सियासत में उथल-पुथल हो गई तो सबने अपने-अपने कयास लगाने शुरू कर दिए। सियासतदानों से लेकर सरकारी दफ्तर में अधिकारी व कर्मचारी और बाजार में दुकानदारों से लेकर ग्राहक तक सीएम बदले जाने के कारण गिना रहे हैं। इन सबके बीच मुख्यमंत्री आवास का वास्तुदोष भी एक बार फिर से …

देहरादून, अमृत विचार। प्रदेश की सियासत में उथल-पुथल हो गई तो सबने अपने-अपने कयास लगाने शुरू कर दिए। सियासतदानों से लेकर सरकारी दफ्तर में अधिकारी व कर्मचारी और बाजार में दुकानदारों से लेकर ग्राहक तक सीएम बदले जाने के कारण गिना रहे हैं। इन सबके बीच मुख्यमंत्री आवास का वास्तुदोष भी एक बार फिर से चर्चाओं में है।

वीओ- ऐसा माना जाता है कि 30 करोड़ की लागत से बने इस सरकारी आवास में अब तक जितने भी सीएम आकर रहे, उन्हें अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा किए बिना ही कुर्सी गंवानी पड़ी। त्रिवेंद्र सिंह रावत का नाम भी इस लिस्ट में चौथे नंबर पर है। इस सीएम आवास का निर्माण नारायणदत्त तिवारी के कार्यकाल में शुरू हुआ था, जो भाजपा के तत्कालीन मुख्यमंत्री बीसी खंडूड़ी के पहले कार्यकाल में पूरा हुआ।

मुख्यमंत्री आवास में वास्तुदोष की अफवाहों के कारण करीब-करीब सभी पूर्व सीएम इसमें रहने से बचते रहे हैं। हालांकि सीएम त्रिवेंद्र ने सीएम आवास में रहने का निर्णय लेने के दौरान यह कहा था कि वह इस मिथक को तोड़ देंगे। त्रिवेंद्र के यहां आने पर पूर्व राज्य संपत्ति विभाग ने बंगले को संवारने का काम भी किया था। खडूड़ी पहले सीएम थे जिन्हें सबसे पहले इस आवास में रहने का मौका मिला, लेकिन कुछ ही समय बाद उन्हें पद से हटना पड़ा था। डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक भी मुख्यमंत्री के रूप में इस आवास में ज्यादा दिनों तक पद पर नहीं रह पाए। भुवन चंद्र खंडूड़ी जब सितंबर 2011 में दोबारा मुख्यमंत्री बने, तो करीब छह माह आवास में रहने के बाद भाजपा पार्टी चुनाव हार गई। इसके बाद प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी तो सीएम बने विजय बहुगुणा को भी यही मुख्यमंत्री आवास मिला , लेकिन केदारनाथ आपदा के बाद उन्हें हटा दिया गया। हालांकि, वह इस आवास में सबसे ज्यादा समय तक रहने वाले मुख्यमंत्री बने।

उधर, अपने हरदा यानि की हरीश रावत की बात करें तो इस वास्तु मिथक के चलते अपनी कुर्सी बचाने के लिए वह कभी मुख्यमंत्री आवास में शिफ्ट नहीं हुए, मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए हरदा ने अपना पूरा कार्यकाल बीजापुर गेस्ट हाउस में ही बिताया। बहरहाल, वजह चाहे जो भी हो, लेकिन वास्तु विशेषज्ञों का कहना है कि सीएम आवास में जो भी रहेगा, उसे किसी न किसी तरह से पद से हाथ गंवाना ही पड़ेगा।

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