हल्द्वानी: नंधौर वन्यजीव अभ्यारण में शिकार होने वाले जानवरों का शुरू हुआ प्रे सर्वे

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अंकुर शर्मा, हल्द्वानी। जंगलों में बिगड़ती आहार श्रृंखला (फूड चेन) में संतुलन बनाने के मकसद से नंधौर वन्यजीव अभ्यारण्य में प्रे (शिकार) सर्वे शुरू हुआ है। इस सर्वे में बाघ और तेंदुओं के भोजन हिरन, चीतल, सुअर, घुरड़ वगैरह वन्यजीवों की गणना हो रही है। वन विभाग, जूलॉजिकल सोसायटी ऑफ लंदन (जेडएसएल) और भारतीय वन्यजीव …

अंकुर शर्मा, हल्द्वानी। जंगलों में बिगड़ती आहार श्रृंखला (फूड चेन) में संतुलन बनाने के मकसद से नंधौर वन्यजीव अभ्यारण्य में प्रे (शिकार) सर्वे शुरू हुआ है। इस सर्वे में बाघ और तेंदुओं के भोजन हिरन, चीतल, सुअर, घुरड़ वगैरह वन्यजीवों की गणना हो रही है।
वन विभाग, जूलॉजिकल सोसायटी ऑफ लंदन (जेडएसएल) और भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) संयुक्त रूप से हल्द्वानी वन डिविजन के अंतर्गत नंधौर वन्यजीव अभ्यारण्य में प्रे सर्वे शुरू किया है।

इस सर्वे में वन्यजीव अभ्यारण्य के 269.95 वर्ग किमी जंगलों के साथ ही अभ्यारण्य के चारों ओर सटे हुए जंगलों में घास खाने वाले वन्यजीवों चीतल, हिरन, घुरड़, सुअर, सांभर, कांकड़, सीरो की गणना कर रहा है । इसके अंतर्गत जेएसएल, डब्ल्यूआईआई और वन विभाग की संयुक्त टीम ट्रांजिट सर्वे से गणना कर रही है। इस सर्वे का मकसद जंगलों में बिगड़ती आहार श्रृंखला को सुधारना और मानव वन्यजीव संघर्ष को रोकना है। यह सर्वे पूरा होने से स्पष्ट होगा कि नंधौर अभ्यारण्य में बाघ-तेंदुए के लिए पर्याप्त भोजन हिरन, चीतल वगैरह उपलब्ध है या नहीं। सर्वे रिपोर्ट के हिसाब से घास खाने वाले वन्यजीवों की संख्या बढ़ाने पर काम किया जाएगा। फिलहाल सर्वे किया जा रहा है।

= ये होता है ट्रांजिट सर्वे =
विशेषज्ञों के अनुसार जंगलों में प्रत्येक बन बीट में एक ट्रांजिट लाइन होती है। इस लाइन के पार से हिरन, चीतल, घुरड़, सुअर वगैरह का झुंड निकलता है। फिर इस झुंड को घनत्व फार्मूले के आधार पर वन्यजीवों की संख्या निकाली जाती है। इससे पता चलता कि प्रति वर्ग किमी कितने वन्यजीव है। 2019 में नंधौर में 11 वन्यजीव प्रति वर्ग किमी का घनत्व था।

= ये होंगे फायदे =
= बाघ-तेंदुए को जंगलों में भोजन मिलेगा तो आबादी की ओर रुख नहीं करेगा और मानव वन्यजीव संघर्ष की रोकथाम होगी
= ऐसे शाकाहारी वन्यजीव जिनकी संख्या जंगलों में कम हो गई है, उनकी आबादी बढ़ाने में मदद होगी
= जंगलों में वन्यजीवों की संख्या का सटीक आंकड़ा पता चलेगा और डेटा बेस तैयार होगा
= जंगल के चप्पे-चप्पे पर गश्त होने से अवैध कटान व शिकार होने पर भी नकेल कसेगी

= बाघ 20 बार प्रयास करता है तब होता है एक हिरन का शिकार =
आमधारणा है कि एक शक्तिशाली बाघ पलक झपकते ही कमजोर हिरन, चीतल का शिकार कर देता होगा लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। एक बाघ को हिरन का शिकार करने के लिए खूब पसीना बहाना पड़ता है। वन्यजीव एक्सपर्ट की माने तो बाघ 20 बार प्रयास करता है तब जाकर एक हिरन का शिकार होता है। इस वजह से बाघ भूख शांत करने के लिए बड़ा शिकार ढूंढता है ताकि शिकार के लिए ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़े।

कोट
जेडएसएल व डब्ल्यूआईआई ने नंधौर वन्यजीव अभ्यारण्य में प्रे सर्वे शुरू किया है। इस सर्वे में बाघ-तेंदुए के आहार हिरन, चीतल, सांभर वगैरह की गणना हो रही है। यह सर्वे दो-तीन माह में पूरा हो जाएगा।
= कुंदन कुमार, डीएफओ हल्द्वानी वन डिविजन

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