मार्च में होती हैं सबसे अधिक आत्महत्याएं

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बरेली, अमृत विचार। साल के 12 महीनों में सुहानी रहने वाली बसंत में सबसे अधिक लोग आत्मघाती कदम उठाते हैं। मार्च का यह मौसम आत्महत्याओं के लिए बदनाम हो रहा है। बीते सालों के आंकड़े बता रहे हैं कि मार्च में आत्महत्याओं का सिलसिला अचानक बढ़ जाता है। दिसबंर में सबसे कम सुसाइड होते हैं। …

बरेली, अमृत विचार। साल के 12 महीनों में सुहानी रहने वाली बसंत में सबसे अधिक लोग आत्मघाती कदम उठाते हैं। मार्च का यह मौसम आत्महत्याओं के लिए बदनाम हो रहा है। बीते सालों के आंकड़े बता रहे हैं कि मार्च में आत्महत्याओं का सिलसिला अचानक बढ़ जाता है। दिसबंर में सबसे कम सुसाइड होते हैं। मार्च के बाद सबसे ज्यादा लोग फरवरी में सुसाइड कर रहे हैं।

दुनिया में सुसाइड करके हर साल एक लाख से अधिक लोग अपनी जान गंवा देते हैं। दुनिया में होने वाली मौतों में आत्महत्या से जान गंवाने वालों में देश दसवें नंबर पर है। हर साल दस लाख लोग सुसाइड का प्रयास करते हैं लेकिन समय पर उपचार मिलने और लोगों के देखने के कारण वह बच जाते हैं।

जिले में इस साल मार्च के 15 दिनों में ही 12 लोग अब तक आत्महत्या कर चुके हैं। सुसाइड करने वालों में सबसे ज्यादा संख्या शराब, चरस और स्मैक पीने वालों की है। इसके अलावा जुआ खेलने वाले लोगों में 12 से 20 प्रतिशत लोग सुसाइड करते हैं। इसके साथ ही जुआ खेलने वालों की पत्नियां भी आत्मघाती कदम उठाती हैं। गंभीर बीमारी से ग्रस्त लोग भी अवसाद में आकर जान दे देते हैं।

मार्च में इन लोगों ने उठाया आत्मघाती कदम

  • बिथरी के रहने वाले इंद्रपाल ने रविवार को फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।
  • बारादरी की रहने वाली रीना फातिमा ने रविवार रात फांसी लगाकर जान दी।
  • मार्च में ही इज्जतनगर की रहने वाली शिक्षिका ने फांसी लगाकर जीवनलीला समाप्त कर ली।
  • छह दिन पहले फतेहगंज पश्चिमी के बबलू ने फांसी लगाकर सुसाइड कर लिया।
  • 10 दिन पहले फतेहगंज पश्चिमी के महावीर ने फांसी लगाकर जान दे दी।

कई सालों का रिकॉर्ड तैयार कराया था जिसमें पता चला कि सबसे अधिक आत्महत्या मार्च में होती हैं। ऐसा क्यों होता है, इस पर कई लोगों से बात की लेकिन सटीक जवाब नहीं मिल सका है। -राजेश कुमार पांडेय, आईजी

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