हल्द्वानी: विवाद के बहाने जेल से बाहर आया भ्रष्टाचार का जिन्न
गौरव पांडेय, हल्द्वानी। बंदी की मौत के बहाने हल्द्वानी जेल से भ्रष्टाचार का जिन्न बाहर आ गया। प्रभारी वरिष्ठ जेल अधीक्षक मनोज कुमार आर्य पर जेल कर्मियों ने खुलेआम भ्रष्टाचार और बंदियों से सांठगांठ के आरोप लगाए। उन्होंने भ्रष्टाचार और उत्पीड़न की उच्च स्तरीय जांच की मांग उठाई। मंगलवार को विरोध प्रदर्शन के बीच पत्रकारों …
गौरव पांडेय, हल्द्वानी। बंदी की मौत के बहाने हल्द्वानी जेल से भ्रष्टाचार का जिन्न बाहर आ गया। प्रभारी वरिष्ठ जेल अधीक्षक मनोज कुमार आर्य पर जेल कर्मियों ने खुलेआम भ्रष्टाचार और बंदियों से सांठगांठ के आरोप लगाए। उन्होंने भ्रष्टाचार और उत्पीड़न की उच्च स्तरीय जांच की मांग उठाई।
मंगलवार को विरोध प्रदर्शन के बीच पत्रकारों से बातचीत में जेल कर्मियों के मन में भरा गुबार सामने आया। उन्होंने प्रभारी वरिष्ठ जेल अधीक्षक को भ्रष्टाचार के मुद्दे पर घेरा। तमाम बंदी रक्षकों ने आरोप लगााए कि जेल परिसर के भीतर ड्यूटी आंवटन की एवज में उनसे वसूली की जाती है। स्टाफ क्वार्टर आवंटन में भी वसूली होती है। बंदियों के परिजनों से मुलाकात में भी भ्रष्टाचार का बोलबाला है। आंदोलित बंदी रक्षकों ने जेल अधीक्षक पर बंदियों से सांठगांठ के आरोप भी लगाए। कारापाल संजीव ह्यांकी ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि तमाम बंदी रक्षकों ने इस प्रकार की शिकायतें की हैं।
उनके कार्यकाल के दौरान जेल परिसर आकंठ भ्रष्टाचार में डूबा हुआ था। आईपीएस पीएन मीणा के आने के बाद भ्रष्टाचार और अनियमिताओं पर रोक लगी। कारापाल के अनुसार भ्रष्टाचार का विरोध करने पर कर्मियों को सर्विस बुक में प्रतिकूल प्रविष्ट, स्थानांतरण और बर्खास्तगी की धमकी दी जाती थी। इसके चलते बंदी रक्षक भ्रष्टाचार के खिलाफ अपना मुंह नहीं खोल पाते थे। लेकिन पुलिस अफसर को कमान मिलने और हालात बदलने के बाद उनमें हौंसला जगा।
बंदी की मौत के बाद हत्या के आरोप लगे तो बंदी रक्षकों की पीड़ा खुलकर सामने आ गई। गौरतलब है कि जेल अधीक्षक मनोज आर्य वर्ष 2012 से लेकर इस वर्ष 11 फरवरी तक पद पर रहे। हालांकि इस बीच वह कुछ माह सितारगंज जेल में भी रहे। 12 फरवरी को उन्हें स्थानांतरित कर नैनीताल जेल भेज दिया गया।
