गरमपानी: बारिश न होने से किसानों की बढ़ी मुश्किलें, लाखों की फसल बर्बाद

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Edited By Amrit Vichar
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गरमपानी, अमृत विचार। लॉकडाउन में खेतों में उपज बर्बाद होने के बाद ठीक समय पर बारिश ना होने पर मटर व अन्य सब्जियों की बुवाई प्रभावित हुई अब बमुश्किल किसानों ने खेत तैयार किए तो बेतालघाट ब्लॉक के सुदूर गांवों में ओलावृष्टि ने फसल बर्बाद कर दी पर पर नीति निर्माता देहरादून में मस्त हैं। …

गरमपानी, अमृत विचार। लॉकडाउन में खेतों में उपज बर्बाद होने के बाद ठीक समय पर बारिश ना होने पर मटर व अन्य सब्जियों की बुवाई प्रभावित हुई अब बमुश्किल किसानों ने खेत तैयार किए तो बेतालघाट ब्लॉक के सुदूर गांवों में ओलावृष्टि ने फसल बर्बाद कर दी पर पर नीति निर्माता देहरादून में मस्त हैं। मुआवजा तो दूर अभी किसानों की बर्बाद हुई फसल का सर्वे का आदेश ही जिलास्तरीय अधिकारियों को नहीं मिल सका है।

लगातार परेशानी से जूझ रहे किसानों का सुध लेवा कोई नहीं है लॉकडाउन में काफी नुकसान झेलने के बाद किसानों ने बैंको से ऋण लेकर जैसे तैसे खेतों में बुआई शुरू की पर ठीक समय पर इंद्रदेव ने मुंह मोड़ लिया। बेतालघाट ब्लॉक के तमाम गांवों में मटर की बुवाई ही नहीं हो सकी। मटर के बीच किसानों के घर पर ही धरे के धरे रह गए।

सुदूर गांवों में हाड़तोड़ मेहनत के बाद किसानों ने बुवाई की भी तो बीते दिनों हुई घंटे भर ओलावृष्टि ने किसानों के सपने चकनाचूर कर दिए। मटर ही नहीं बल्कि शिमला मिर्च, बीन, गेहूं के साथ ही आडू को भारी नुकसान पहुंचा। ओलावृष्टि ने पेडो़ में लगे फूल बर्बाद कर दिए। नीति नियंता है कि किसानों की सुध ही नही ले रहे। गांवों के किसानों ने उपेक्षा का आरोप लगाया है। मुआवजा तो दूर किसानों को हुए नुकसान का सर्वे तक का आदेश अभी देहरादून से जिला स्तर के अधिकारियों तक नहीं पहुंचा है।

बड़ा सवाल है कि जब देहरादून के अफसर ही पहाड़ को झांकने को तैयार नहीं तो जिला स्तरीय अधिकारी कदम कैसे आगे बढ़ाए। काश्तकार कृपाल सिंह मेहरा, राजेंद्र सिंह, सुनील मेहरा, गजेन्द्र सिंह आदि लोगों ने विभागीय उपेक्षा पर रोष जताया है।

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