खटीमा: कैसे पालेंगे परिवार और कहां से चुकाएंगे बैंक और साहूकारों के कर्ज

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Edited By Amrit Vichar
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खटीमा, अमृत विचार। भूड़ा किशनी में हुए अग्निकांड में मेहनत से कमाई फसल गवां चुके किसानों को अब परिवार के भरण पोषण और बैंक और साहूकारों का कर्ज चुकाने की चिंता सताने लगी है। इस अग्निकांड में पांच दर्जन से अधिक परिवारों की गेहूं की खड़ी फसल जलकर राख हो गई है। गांव के लोग …

खटीमा, अमृत विचार। भूड़ा किशनी में हुए अग्निकांड में मेहनत से कमाई फसल गवां चुके किसानों को अब परिवार के भरण पोषण और बैंक और साहूकारों का कर्ज चुकाने की चिंता सताने लगी है। इस अग्निकांड में पांच दर्जन से अधिक परिवारों की गेहूं की खड़ी फसल जलकर राख हो गई है। गांव के लोग आग के नाम से ही सिहर उठ रहे हैं। उनके अंदर से दूसरे दिन भी आग का खौफ दूर नहीं हो रहा है।

भूड़ा किसनी गांव में बृहस्पतिवार दोपहर बाद तेज हवाओं के बीच लगी आग से लगभग पूरा गांव तबाह हो गया और 50 एकड़ से अधिक गेहूं की खड़ी फसल जलकर राख हो गई है। ग्रामीणों ने फसल जोतकर और फायर ब्रिगेड ने यदि जान की बाजी लगाकर आग पर काबू नहीं पाते तो आसपास के कई गांव तबाह हो सकते थे। इस अग्निकांड से गांव के लोग सिहर उठे हैं और आग के नाम से कांप उठते हैं। जिनकी फसलें पूरी अथवा आधी अधूरी बची है वह उन्हें समेटने में लग गए हैं।

वहीं जिन परिवारों की फसल जल गई है वह भी खेतों में जली गेहूं की बालियां बिन रहे ताकि वह नहीं तो कम से कम उनके जानवर ही इन्हें खा सकेंगे। अग्नि कांड में अपनी मेहनत से कमाई फसल को गंवा बैठे परिवारों के सामने भरण पोषण के साथ ही बैंकों और साहूकारों को चुकाने वाले कर्ज की चिंता सताने लगी है। और वह इसके लिए शासन प्रशासन की ओर देख रहे हैं कि शायद उन्हें कुछ मुआवजा मिल जाए ताकि वह अपने परिवार का भरण पोषण कर सकें। जिसको लेकर ग्राम प्रधान शशिबाला राणा के नेतृत्व में किसान तहसीलदार युसूफ अली से मिले और अपनी पीड़ा से अवगत कराया।

राजस्व विभाग ने तैयार की अग्निकांड पीड़ितों की सूची
राजस्व विभाग ने घोड़ा किशनी के अग्नि पीड़ितों की सूची तैयार की है जिसमें कुल 53 परिवार बताए जा रहे हैं। इस सूची में 25 परिवार वह बताए जा रहे हैं जिनके भूमिधरी है जबकि 28 परिवार ऐसे भी हैं जिन्होंने भूमि स्टांप पेपरों पर खरीदी है। पीड़ितों के मुआवजे के संबंध में पूछने पर तहसीलदार युसूफ अली ने बताया कि पीड़ितों को मुआवजे के संबंध में शासन स्तर पर बात चल रही है। यह भी कहा कि जिन लोगों के नाम भूमिधरी नहीं है उस पर भी मंथन किया जा रहा है।

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