बरेली: भांजे की शादी है, चुनाव ड्यूटी हटवा दीजिए…

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बरेली, अमृत विचार। सरकारी कर्मचारी अजब-गजब मजबूरी बताकर पंचायत चुनाव से अपनी ड्यूटी हटवाना चाहते हैं। एक कर्मचारी ने गुहार लगाई कि उसके भांजे की कुछ दिन बाद शादी है। घर में पिछले कई दिनों से तैयारियां चल रही हैं। अभी बहुत सी खरीदारी करनी है। कृपया, मेरी चुनाव ड्यूटी हटा दीजिए। चुनाव ड्यूटी से …

बरेली, अमृत विचार। सरकारी कर्मचारी अजब-गजब मजबूरी बताकर पंचायत चुनाव से अपनी ड्यूटी हटवाना चाहते हैं। एक कर्मचारी ने गुहार लगाई कि उसके भांजे की कुछ दिन बाद शादी है। घर में पिछले कई दिनों से तैयारियां चल रही हैं। अभी बहुत सी खरीदारी करनी है। कृपया, मेरी चुनाव ड्यूटी हटा दीजिए। चुनाव ड्यूटी से मुक्ति पाने के लिए कोई बीमारी का बहाना तो कोई ज्यादा उम्र होने के कारण ड्यूटी न करने की बात कह रहा है। कर्मचारियों की बहानेबाजी अफसरों के लिए सिरदर्द बनी हुई है। डीसी मनरेगा दो दिन में सिफारिशों से इतना परेशान हो चुके हैं कि उन्होंने यहां तक बोल दिया कि चुनाव में ड्यूटी करके एक अहसान मुझ पर कर दो।

जिले की 1193 ग्राम पंचायतों में चुनाव कराने के लिए 18,500 से ज्यादा कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। विकास भवन में चुनाव ड्यूटी निरस्त कराने पहुंच रहे कई कर्मचारियों ने तो अपने दस्तावेज जमा कर दिए हैं। कई ऐसे भी हैं, जिन्होंने अपनी मेडिकल की पुरानी पर्चियां ढूंढ़कर एक नई मोटी से फाइल बनाकर दी है। सबसे अधिक ड्यूटी कटवाने की पैरवी महिलाओं की आ रही है।

डीसी मनरेगा गंगाराम वर्मा का कहना है कि जो वास्तव में बीमार हैं या किसी कारण से चुनाव ड्यूटी करने में असमर्थ हैं, सिर्फ उनकी ड्यूटी काटी जा रही है। ठीक से जांच-पड़ताल के बाद ही अवकाश दिया जा रहा है। सीडीओ चंद्र मोहन गर्ग ने साफ कह दिया कि ड्यूटी को लेकर कोई बहाना नहीं चलेगा। विशेष परिस्थितियों में ही ड्यूटी बदलने या हटाने का प्रावधान है।

शिक्षक दंपति सबसे आगे
ड्यूटी हटावाने पहुंच रहे कर्मचारियों में 40 फीसदी शिक्षिक दंपति हैं। इनमें ज्यादातर की तैनाती भी एक ही विद्यालय में है। वह तरह-तरह के बहाने बना रहे हैं। कोई घर में बच्चों के अकेले होने की दिक्कत तो कई घर में बड़े-बुजुर्ग की देखभाल की बात कह रहे हैं।

4000 शिक्षक पति-पत्नी की लगी ड्यूटी, कटवाने को लगा रहे चक्कर
पंचायत चुनाव में लगी ड्यूटी कटवाने का सिलसिला अब तेज हो गया है। जिले में चार हजार शिक्षक दंपति हैं। ऐसे में नौकरी कटवाने वालों की भीड़ पूरे दिन कार्यालयों में उमड़ी रहती है। जिन लोगों को समस्या है वे ड्यूटी कटवाने आ रहे हैं। साथ ही सरकारी नौकरी वाले पति-पत्नी भी पहुंच रहे हैं। उनका कहना है कि शासन ने आदेश जारी किया है कि पति-पत्नी दोनों सरकारी नौकरी में होने पर किसी एक की ड्यूटी लगाई जाएगी। ऐसे में वे ड्यूटी कटवाने के लिए कार्यालयों में पहुंच रहे हैं जबकि शासनादेश में स्थितियों के आधार पर निर्णय लेने की बात कही गई है।

बीएसए विनय कुमार ने बताया कि चार हजार शिक्षक-शिक्षिकाओं में पति-पत्नी के हिसाब ड्यूटी काट देंगे तो केवल 2000 ही शिक्षक-शिक्षिकाएं बचेंगे। ऐसे में चुनाव कैसे कराया जाएगा। इस पर उन्होंने कहा कि जिन लोगों की समस्याएं होंगी। उनकी ड्यूटी काट दी जाएगी। उधर, दूसरी ओर बीएसए कार्यालय में ड्यूटी कटवाने के लिए अधिकांश गर्भवती महिलाएं पहुंच रही हैं लेकिन बीएसए सभी को चुनाव कार्मिक प्रभारी डीसी मनरेगा के पास भेज रहे हैं।

यूटा ने भी डीसी मनरेगा से मिलकर की बात
मंगलवार को यूनाइटेड टीचर्स एसोसिएशन(यूटा) के जिला अध्यक्ष भानु प्रताप सिंह ने चुनाव कार्मिक प्रभारी डीसी मनरेगा गंगाराम से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि राज्य निर्वाचन आयोग के आदेश का हवाला देते हुए पति-पत्नी में से किसी एक को ड्यूटी से मुक्त करने पर चर्चा की।

जिस पर प्रभारी कार्मिक गंगाराम ने कहा कि अगर ऐसे सभी पति-पत्नी में से किसी एक डयूटी काटी जाएगी तो चुनाव कैसे करा पाएंगे। उन्होंने आश्वासन दिया कि जिनकी समस्या होगी उन पर विचार किया जाएगा। इस मौके पर हेमन्त कुमार, जितेंद्र पाल सिंह, अमित चंद्रा, सन्तोष कुमार आदि मौजूद रहे।

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