काशीपुर: सरकारी अस्पताल में घंटों तक नहीं मिला गर्भवती को इलाज

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Edited By Amrit Vichar
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काशीपुर, अमृत विचार। सरकारी अस्पताल में बेहतर स्वास्थ्य मिलने के दावे खोखले साबित हो रहे हैं। इलाज के लिए पहुंची एक गर्भवती को घंटों तक इलाज नहीं मिलने पर पूर्व छात्र नेता ने जमकर हंगामा काटा। सूचना पर पहंचे एसडीएम ने मामले की जांच कराने का आश्वासन दिया है। रविवार की शाम एलडी भट्ट सरकारी …

काशीपुर, अमृत विचार। सरकारी अस्पताल में बेहतर स्वास्थ्य मिलने के दावे खोखले साबित हो रहे हैं। इलाज के लिए पहुंची एक गर्भवती को घंटों तक इलाज नहीं मिलने पर पूर्व छात्र नेता ने जमकर हंगामा काटा। सूचना पर पहंचे एसडीएम ने मामले की जांच कराने का आश्वासन दिया है।

रविवार की शाम एलडी भट्ट सरकारी अस्पताल में मोहल्ला गिरीताल निवासी एक महिला प्रसव के लिए पहुंची। उसे अस्पताल में करीब 6 घंटे तक रोका गया। आरोप है कि महिला डॉक्टर द्वारा उसे न तो कोई इलाज मुहैया कराया गया और न ही जांच की गई। दिलचस्प बात यह है कि लंबे समय तक अस्पताल में रुकने के बाद भी अभिलेखों में उसका नाम दर्ज नहीं किया गया। आरोप है कि महिला डॉक्टर ने प्रसव के लिए आई महिला को गुमराह कर उसे एक निजी अस्पताल के लिए रेफर कर दिया।

महिला रेफर किए अस्पताल के बजाए एक दूसरे अस्पताल में पहुंच गई, जिस पर एक कार में सवार कुछ लोगों ने मरीज को अपने अस्पताल में जबरन ले जाने का प्रयास किया। नाटकीय घटनाक्रम देर रात तक चलता रहा। सूचना पर पूर्व छात्र नेता गगन कांबोज ने अस्पताल पहुंचकर अस्पताल कर्मियों को जमकर खरी खोटी सुनाई। सूचना पर एसडीएम गौरव कुमार भी अस्पताल पहुंच गए। उन्होंने प्रभारी सीएमएस को सरकारी अस्पताल की महिला डॉक्टर को नोटिस देने के निर्देश दिए हैं।

बता दें कि अस्पताल का यह कारनामा कोई नया नहीं है। आए दिन गरीब रोगियों को निजी अस्पताल में बेहतर इलाज मिलने के नाम पर सरकारी अस्पताल से रेफर किया जाता है। उधर, सूत्रों का कहना है कि सरकारी अस्पताल में प्रसव अक्सर नर्सों द्वारा कराया जा रहा है और महिला चिकित्सक का अता पता नहीं होता है। इस दौरान मरीज को मानिसक रूप से इतना परेशान कर दिया जाता है वह कुछ बोल भी नहीं पाता।

र्भवती महिला मरीज का नाम अस्पताल के अभिलेखों में दर्ज नहीं है। एसडीएम साहब ने फोन पर सरकारी अस्पताल की महिला डॉक्टर को नोटिस देने के निर्देश दिए हैं। शिकायत पत्र मिलने पर आगे की कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। 

-डॉ. कैमाश राणा, प्रभारी पीएमएस, एलडी भट्ट हॉस्पिटल

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