मुरादाबाद: यह कैसी विडंबना… शवों के अंतिम संस्कार में भी ‘वेटिंग’

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

मुरादाबाद, अमृत विचार। शायद इसलिए ही आज के दौर को कलयुग कहा जाता है, जहां जिंदा आदमी का तो कोई ठौर-ठिकाना है ही नहीं। वहीं अब मरने वालों को भी कोई नहीं पूछ रहा है। कोरोना संक्रमण के कारण रोजाना होने वाली मौतों का आंकड़ा इतना बढ़ चुका है कि शवों के अंतिम संस्कार के …

मुरादाबाद, अमृत विचार। शायद इसलिए ही आज के दौर को कलयुग कहा जाता है, जहां जिंदा आदमी का तो कोई ठौर-ठिकाना है ही नहीं। वहीं अब मरने वालों को भी कोई नहीं पूछ रहा है। कोरोना संक्रमण के कारण रोजाना होने वाली मौतों का आंकड़ा इतना बढ़ चुका है कि शवों के अंतिम संस्कार के लिए भी परिजनों को ‘वेटिंग’ में लगना पड़ रहा है। हालात दिन ब दिन भयावह होते जा रहे हैं। शवों के अंतिम संस्कार के लिए बने अधिकतर मोक्षधाम पर ‘फुल’ होने का बोर्ड लग चुका है। शायद यह पहली बार होगा कि मोक्षधाम में शवों का अंतिम संस्कार कराने के लिए लोग सिफारिश तक करने के लिए मजबूर हो रहे हैं।

मोक्षधाम खाली न होने के कारण परिजन अपनों का अंतिम संस्कार नदियों किनारे करने को मजबूर हो गए हैं। पिछले कुछ दिनों में तो नदियों किनारे एक साथ कई शवों के अंतिम संस्कार करने की हकीकत लगातार हमारे सामने आ रही है।

हर रोज श्मशान घाटों में लोगों को अपने परिजनों के अंतिम संस्कार के लिए 24 से 48 घंटे की वेटिंग लेनी पड़ रही है। लोको शेड मोक्षधाम पर 17 और सीएल गुप्ता श्मशान घाट में चिता जलाने के लिए 9 स्थल बने हैं। लेकिन खाली जगह न होने से परिजनों को अब गंगा किनारे ही अंतेष्ठी करनी पड़ रही है। श्मशान घाट कर्मचारी बब्लू का कहना है कि श्मशान घाट में 9 स्थल बने हुए हैं। लेकिन जगह फुल होने पर श्मशान घाट परिसर में भी चिताओं को जलाया जा रहा है। हर रोज कोरोना से मरने वाले 4 से 5 लोगों की चिता जलाई जा रही है।

हफ्ते भर में जलीं 195 चिताएं
जनपद में कोरोना से लगातार मौतों का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। इस वजह से श्मशान घाटों में शवों की कतार लगी पड़ी है। पिछले एक सप्ताह में लोको शेड, सीएल गुप्ता मोझधाम व गागन नदी किनारे 195 चिताओं का संस्कार किया जा चुका है। साथ ही हर रोज इन श्मशान घाटों पर कोरोना से मरने वालों की 4 से 5 चिताओं का संस्कार किया जा रहा है।

शव जलाने के लिए कम पड़ रहीं लकड़ियां
कोरोना की वजह से लगातार मौतों का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। इसके चलते श्मशानों में शवों को जलाने के लिए लकड़ियों की कमी हो गई है। पहले श्मशान घाटों में 20 से 25 क्विंटल लकड़ियों की खपत होती था। अब संक्रमण काल में 70 से 80 क्विंटल लकड़ियों की खपत हो रही है। यह आंकड़ा लोको शेड का है।

अंतिम संस्कार के लिए भी सिफारिश
मोझधाम खाली न होने से लोगों को अत्येंष्ठि कराने के लिए दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। शवों को जलाने के लिए परिजनों को 24-48 घंटे की वेटिंग लेनी पड़ रही है। इसके बाद अंतिम संस्कार किया जा रहा है। इसके अलावा अंतिम संस्कार कराने के लिए लोगों को नेता और अधिकारियों की सिफारिश भी करनी पड़ रही है। बावजूद इसके लोगों को चिता जलाने के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है।

आज होंगे सात संस्कार, हुई बुकिंग
अपनों का अंतिम संस्कार करने के लिए परिजनों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इसके चलते लोग चिता स्थल को बुक करने के लिए पहुंच रहे हैं। लोको शेड मोक्षधाम में रविवार केलिए 7 चिताओं की बुकिंग की गई है।

निवासी कांशीराम नगर शिवम ठाकुर ने कहा कि लोको शेड मोक्षधाम में अपने ताउजी का संस्कार करने के लिए जगह बुक कराने गए थे। लेकिन 48 घंटे की वेटिंग होने से गागन नदी पर अंतिम संस्कार करना पड़ा।

निवासी मिरपुर कंचन सिंह यादव ने कहा कि लोको शेड मोक्षधाम में अंतिम संस्कार करने के लिए कोई जगह खाली नहीं थी। इस वजह से अपनी सास का अंतिम संस्कार गागन नदी के किनारे करना पड़ा है।

लोको शेड मोक्षधाम मैनेजर संजय ने कहा कि मोक्षधाम में पहले हर रोज एक से दो चिता आती थी। लेकिन बढ़ते संक्रमण के कारण चिता स्थल फुल हैं। इस वजह से बुकिंग की जा रही है।

संबंधित समाचार