बरेली: हालात खराब, बेड न ऑक्सीजन, कहां जाएं मरीज

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Edited By Amrit Vichar
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बरेली, अमृत विचार। कोरोना संक्रमण में हालात खराब होते जा रहे हैं। कोविड अस्पतालों में न बेड हैं और न ऑक्सीजन की पर्याप्त आपूर्ति हो रही है। ऐसी स्थिति में परिजन मरीज को कहां लेकर जाएं। अधिकांश कोरोना संक्रमितों के परिजन अस्पताल में पहुंचने के बाद यही दर्द बयां कर रहे हैं। अस्पताल में पहुंचने …

बरेली, अमृत विचार। कोरोना संक्रमण में हालात खराब होते जा रहे हैं। कोविड अस्पतालों में न बेड हैं और न ऑक्सीजन की पर्याप्त आपूर्ति हो रही है। ऐसी स्थिति में परिजन मरीज को कहां लेकर जाएं। अधिकांश कोरोना संक्रमितों के परिजन अस्पताल में पहुंचने के बाद यही दर्द बयां कर रहे हैं।

अस्पताल में पहुंचने के बाद उन्हें या तो बेड खाली न होने की बात कही जाती है या फिर बोल दिया जाता है कि ऑक्सीजन खत्म होने वाली है। ऐसे में परेशान परिजन गुस्से में आकर विवाद भी कर बैठ रहे हैं, क्योंकि ऐसी मजबूरी में तो बस वह यही चाहते हैं कि किसी तरह से उनके मरीज को भर्ती कर लिया जाए और उसका इलाज शुरू कर जान बचा ली जाए।

कोरोना के मरीजों की संख्या में अप्रैल माह से लगातार इजाफा हो रहा है। रोज रिकॉर्ड टूट रहे हैं। प्रतिदिन 800 से अधिक संक्रमितों की संख्या सामने आ रही है। कोरोना संक्रमितों की मौत का भी आंकड़ा बढ़ा है। भले ही रिकॉर्ड में इसकी संख्या कम हो। यही वजह है कि तबियत अधिक खराब होने पर परिजन मरीज को अस्पताल लेकर ही भाग रहे हैं।

दिल्ली और लखनऊ में ऑक्सीजन की किल्लत के बाद बरेली में भी हालात ठीक नहीं हैं। समय पर सप्लाई न आने की वजह से अस्पतालों में स्टाक कम बचा है। ऐसे में अस्पताल प्रबंधन पहले ही मरीजों को डिस्चार्ज करने लगते हैं, ताकि यदि मरीज की मौत हो तो उनके अस्पताल का नाम सामने न आए। दूसरी तरफ रविवार को शहर में अस्पतालों के बाहर या वाहनों पर ऑक्सीजन के सिलेंडर ही नजर आए। अधिकांश सिलिंडर खाली बताए गए और सप्लाई न आने से कमी बतायी गई।

अस्पताल में हंगामा करते परिजन।

पत्नी-बच्चे हो गए बेसहारा
सिटी स्टेशन रोड के बाहर प्रदर्शन करने वाले परिजन परेशान हो गए थे क्योंकि एक के परिवार के सदस्य की मौत हो गई थी तो अन्य के परिवार के मरीज पर जान का खतरा बना हुआ था, क्योंकि अस्पताल वाले ऑक्सीजन की कमी बताकर दूसरे अस्पताल में ले जाने की बात कह रहे थे। कालीबाड़ी निवासी अभिषेक की बहन मोनिका ने बताया कि उसके भाई पिज्जा आउटलेट में काम करते थे। अभिषेक के परिवार में पत्नी निपेश और दो बच्चे आरव और परि हैं। मोनिका ने बताया कि भाई को 19 अप्रैल को तबियत खराब होने पर अस्पताल में भर्ती कराया था। दो दिन पहले सांस लेने में तकलीफ हुई तो ऑक्सीजन दी गई।

अस्पताल में बताया गया कि उनके भाई का ऑक्सीजन स्तर 17 से 18 तक पहुंच गया था। भाई की मौत के बाद भाभी और उनके बच्चों की कौन देखरेख करेगा। निपेश का भी रो-रोकर बुरा हाल हो गया था। वह कभी खुद को संभालती तो कभी अपने बच्चों को। उसका दर्द देखकर ही अन्य मरीज के परिजनों को गुस्सा आ गया और अस्पताल से रेफर करने पर हंगामा शुरू कर दिया। अस्पताल के कर्मचारी अभिषेक श्रीवास्तव ने बताया कि उनके अस्पताल में करीब 50 मरीज भर्ती हैं जो आक्सीजन सपोर्ट पर हैं। उनके अस्पताल में परसाखेड़ा से ऑक्सीजन आती है। बताया गया कि परसाखेड़ा में काशीपुर से ऑक्सीजन सप्लाई नहीं आयी है। उनके यहां ऑक्सीजन है लेकिन वह सिर्फ दो घंटे के लिए है। इसी वजह से मरीजों को पहले ही डिस्चार्ज कर रहे हैं ताकि दिक्कत न हो।

दिल्ली लेकर जाइए वहीं पर होगा इलाज
परिजनों का अरोप था कि अस्पताल संचालकों का कहना है कि वह अपने मरीज को दिल्ली लेकर जाएं, वहीं पर उनका इलाज होगा लेकिन दिल्ली के हालात क्या है इससे कौन वाकिफ नहीं है। तीमारदारों का कहना था कि दिल्ली में ले गए तो उनके मरीज का बचना बेहद ही मुश्किल है। इस बात को लेकर परिजनों और अभिभावकों के बीच नोकझोंक भी हो गई जब परिजनों ने सड़क पर हंगामा किया तो किला थाने से पुलिस पहुंची और किसी तरह से लोगों को शांत किया। बदायूं निवासी फरीन ने बताया कि उसके शौहर को अस्पताल में 19 अप्रैल को भर्ती कराया गया था। अब ऑक्सीजन की कमी से दूसरे अस्पताल में ले जाने के लिए बोल रहे हैं। जबकि अस्पताल में ऑक्सीजन के सिलेंडर आए हैं।

अस्पताल में परिजनों ने किया हंगामा
बारादरी थाना क्षेत्र की रहने वाली एक युवती ने बताया कि उसने तीन दिन पहले मां को रीढ़ की हड्डी में दिक्क्त होने पर रामपुर गार्डन स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया था। आरोप है कि अस्पताल में लगातार जांच के बाद उन्हें बिल थमाते गए। जिसके बाद उनकी मां को पेट फूलता चला गया।

आरोप है कि रविवार को अस्पताल संचालक ने अचानक ऑक्सीजन खत्म होने की बात कहकर उनकी छुट्टी करने को कहा। जिसके बाद ऑक्सीजन के अभाव में उनकी हालत बिगड़ती चली गई। ऑक्सीजन न मिलने से उनकी मौत हो गई। उसके बाद परिवार के लोगों ने जमकर हंगामा किया। सूचना पर पहुंची कोतवाली पुलिस ने किसी तरह मामले को शांत कराया। उसके बाद परिवार के लोग शव को अपने साथ लेकर चले गए।

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