बरेली: कोरोना की आड़ में गेहूं खरीद में माफिया हावी

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Edited By Amrit Vichar
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बरेली/नवाबगंज, अमृत विचार। गेहूं खरीद से सीधे जुड़े अधिकारी एवं कर्मचारियों के बड़ी संख्या में संक्रमित होने से एक बार फिर माफिया ने गेहूं खरीद में सेंध लगानी शुरू कर दी है। यही वजह है कि केंद्रों पर अनुमान के मुताबिक गेहूं नहीं पहुंच रहा। सूत्र भी इसकी मुख्य वजह माफिया और बिचौलियों का हावी …

बरेली/नवाबगंज, अमृत विचार। गेहूं खरीद से सीधे जुड़े अधिकारी एवं कर्मचारियों के बड़ी संख्या में संक्रमित होने से एक बार फिर माफिया ने गेहूं खरीद में सेंध लगानी शुरू कर दी है। यही वजह है कि केंद्रों पर अनुमान के मुताबिक गेहूं नहीं पहुंच रहा। सूत्र भी इसकी मुख्य वजह माफिया और बिचौलियों का हावी होना बता रहे हैं। आलम यह है कि केंद्र पर पहुंचने से पहले ही माफिया किसान को अपने कब्जे में कर औने-पौने दाम में उनसे गेहूं खरीदकर मोटी कमाई की योजना बना चुके हैं। दूसरी तरफ अधिकारी-कर्मचारियों के संक्रमित होने से केंद्रों से गोदामों तक गेहूं नहीं पहुंच पा रहा है।

शासन-प्रशासन की तमाम कोशिशों के बाद भी उनके मातहत किसानों को उनका हक नहीं दिला पा रहे हैं। गेहूं खरीद व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए इस बार ऑनलाइन सर्वे कराया गया तो क्रय केंद्रों का आवंटन भी ऑनलाइन प्रक्रिया के तहत हुआ था। एक अप्रैल से सेंटरों को चालू कर दिया गया। गेहूं का समर्थन मूल्य 1975 रुपये निर्धारित कर बीते साल का लक्ष्य माना है। सरकारी अभिलेखों में मंडल के 454 केंद्रों में गेहूं खरीद चल रही है लेकिन कोरोना संक्रमण के चलते किसानों पर आफत सी आ गई है। पहले पंचायत चुनावों की वजह से पंद्रह अप्रैल तक खरीद बेहद सुस्त रही। मतदान खत्म होने के बाद अचानक से कोरोना संक्रमण की रफ्तार कई गुना तेज हो गई।

इस दौरान खरीद से जुड़े कई अधिकारी और कर्मचारी संक्रमित हो गए। इसका फायदा माफिया और बिचौलिया जमकर उठा रहे हैं। सबसे ज्यादा अंधेरगर्दी नवाबगंज के केंद्रों पर हैं। बताया जाता है माफिया खेतों में जाकर किसानों से सौदेबाजी कर रही है। औने-पौने दामों में गेहूं खरीदकर स्टोर कर लिया या फिर सेटिंग कर आसपास के आढ़तियों को महंगे दाम पर बेचने की फिराक में है।

गेहूं खरीद में शाहजहांपुर मंडल में सबसे आगे
मंडल में अभी तक करीब 28 हजार मीट्रिक टन गेहूं खरीद हो चुकी है। सर्वाधिक खरीद शाहजहांपुर में साढ़े हजार मीट्रिक टन के लगभग है। दूसरे नंबर स्थान पर पीलीभीत जिला है। तीसरे पर बरेली और बदायूं जनपद चौथे स्थान पर है। इधर, सूत्रों मानें तो बरेली और पीलीभीत में जितनी खरीद हुई उसकी 75 फीसदी गेहूं केंद्रों पर ही पड़ा है। उसे एफसीआई गोदाम तक नहीं पहुंचाया जा सका।

कोरोना संक्रमण के चलते बड़ी संख्या में मजदूर भी संक्रमित हैं। इसका सीधा असर गेहूं उठान पर पड़ रहा है। खरीद में शामिल अफसरों का भी यही कहना है कोरोना संक्रमण के चलते गेहूं खरीद पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। मजदूर नहीं मिलने से उठान भी नियमित नहीं हो रहा है।

एक क्विंटल पर चालीस रुपये अतिरिक्त वसूल रहे
नवाबगंज और फरीदपुर में गेहूं खरीद में शामिल अफसर और कर्मचारियों की आमदनी का जरिया बना है। क्यालड़िया निवासी एक युवक ने बताया कि मंडी में गेहूं बिल्कुल सूखा भेजा जा रहा है। उसके बाद ही चालीस रुपये प्रति क्विंटल अलग से दे रहे हैं। इंकार करने पर गेहूं तौल से इंकार कर दिया जाता है।

इधर, नवाबगंज के क्षेत्रीय विपणन अधिकारी ज्ञान चंद्र वर्मा का कहना है यह मामला गंभीर है। शिकायत मिलने पर इसकी गोपनीय जांच कराई जाएगी। यदि आरोप सही साबित हुए तो संबंधित के खिलाफ सख्त एक्शन लिए जाने को आला अधिकारियों की रिपोर्ट बनाकर भेजी जाएगी।

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