बेसिक शिक्षा परिषद में पहली तबादला पाएं शिक्षकों को बिना वेतन जबरन भेजा जा रहा वापस

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

लखनऊ। बेसिक शिक्षा परिषद में ऐसा पहली बार हो रहा है जब शिक्षकों का तबादला किए जाने के बाद वापस उन्हें फिर से उनके मूल विद्यालय वाले जिलें में भेजा रहा है। हैरानी की बात ये है कि तबादले के तीन माह बाद बेसिक शिक्षा अधिकारी ज्वॉइन कराने से मना कर रहे हैं, इस स्थिति …

लखनऊ। बेसिक शिक्षा परिषद में ऐसा पहली बार हो रहा है जब शिक्षकों का तबादला किए जाने के बाद वापस उन्हें फिर से उनके मूल विद्यालय वाले जिलें में भेजा रहा है। हैरानी की बात ये है कि तबादले के तीन माह बाद बेसिक शिक्षा अधिकारी ज्वॉइन कराने से मना कर रहे हैं, इस स्थिति में बीच मझधार में फंसे शिक्षकों के सामने वेतन का भी विकल्प नहीं निकल पा रहा है।

लखनऊ समेत अलग-अलग जिलो में ऐसे एक हजार शिक्षकों के मामले हैं, इसमें कई शिक्षक ऐसे भी हैं जो गंभीर बीमारी से ग्रसित भी हैं। शिक्षक लगातार शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों के सामने गुहार लगा रहे हैं, लेकिन कोरोना संक्रमण के दौर में उनकी सुनवाई नहीं हो रही और इधर बीएसए आदेश जारी कर रहे हैं अपने मूल जिले में वापस जाइए।

जबकि इसके पीछे की जो वजह है उसके लिए विभाग खुद जिम्मेदार है, बता दें कि अंतर्जनपदीय स्थानांतरण लिपिकीय त्रुटि को कारण ग्रामीण क्षेत्र से नगर क्षेत्र में हो गए हैं। इन सभी शिक्षकों को संबंधित जनपदों से परीक्षणोपरांत स्थानांतरित जनपदों हेतु कार्यमुक्त किया गया था और स्थानांतरित जनपदों में इन शिक्षकों को कार्यभार भी ग्रहण कराया जा चुका है लेकिन अभी शिक्षकों को त्रुटियों के आधार पर वर्तमान जनपदों से वापस पुराने जनपदों के लिए कार्यमुक्त किया जा रहा है।

सभी जिलो में बीएसए ने की लापरवाही

दरअसल जिन शिक्षकों के त्रुटिपूर्ण ढंग से अपने आवेदन पत्र में ग्रामीण क्षेत्र के स्थान पर नगर क्षेत्र भरा गया है उनका स्थानांतरण त्रुटिपूर्ण ढंग से नगर क्षेत्र में हो गया है, जबकि इसका सत्यापन बीएसए स्तर से किया गया था, ऐसी स्थिति में सहायक अध्यापकों की ओर से ग्रामीण क्षेत्र के स्थान पर नगर क्षेत्र अंकित किए जाने पर संबंधित बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा आवेदन पत्र को सत्यापित नहीं किया जाना चाहिए था। जो अध्यापक मूलतः ग्रामीण क्षेत्र में तैनात थे वे ग्रामीण क्षेत्र में जाएंगे तथा जो नगरीय क्षेत्र में तैनात थे उनकी तैनाती स्थानांतरित जनपद के नगरीय क्षेत्र में ही की जाएगी।

इधर 69 हजार भर्ती वालों को वेतन नहीं

वहीं दूसरी ओर 69 हजार भर्ती वाले शिक्षकों ने भी विभाग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है, शिक्षकों ने ट्वीटर पर अभियान चलाकर विभाग की पोल खोल दी है। शिक्षकों का कहना है कि ज्वॉइनिंग के सात माह बाद भी उन्हें वेतन नहीं दिया जा रहा है। शिक्षकों ने बेसिक शिक्षामंत्री, डीएम व बीएसए को ट्वीट किया है। घरों में रहकर धरना देते हुए शिक्षकों ने पोस्टर बनाकर लिखा है कि मजबूर शिक्षक की सुनो पुकार, वेतन आदेश जारी करो सरकार।

शिक्षकों के साथ विभाग कर रहा अन्याय

इस संबंध में राष्ट्रीय शैक्षिक महासंंघ के मंडलीय अध्यक्ष महेश मिश्रा का कहना है कि शिक्षकों के साथ विभाग अन्याय कर रहा है, इस पर अधिकारियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए।

तीन माह बाद शिक्षक अब कहां जाएं

वहीं इस बारे में महिला शिक्षक संघ की प्रदेश अध्यक्ष सुलोचना मौर्या कहती हैं कि तीन माह बाद शिक्षकों को वापस करना ठीक नहीं है दोनो ही जनपदों में दिक्कत होगी, वैसे भी मुश्किल से ताबदला हुआ है।

अधिकारियों की गलती की सजा क्यों भुगते शिक्षक

वहीं राष्ट्रीय शैक्षिक संघ के लखनऊ की कार्यवाहक अध्यक्ष रीना त्रिपाठी कहती हैं जब शिक्षकों का ट्रांसफर से पहले आवेदन का सत्यापन बीएसए स्तर से हुआ है तो फिर शिक्षकों को सजा क्यों दी जा रही है।

संबंधित समाचार