मुरादाबाद: बाजार से गायब हुए ब्लैक फंगस के इंजेक्शन, रोगियों को हो रही परेशानी
मुरादाबाद, अमृत विचार। कोरोना के उपचार में प्रयोग किए जाने वाले रेमडेसिविर इंजेक्शन के बाद अब ब्लैक फंगस के इंजेक्शन भी बाजार से गायब होते नजर आ रहे हैं। इसके रोगियों के उपचार में सबसे अधिक एम्फोटेरेसिन-बी इंजेक्शन प्रयोग किया जाता है। वर्तमान में ये इंजेक्शन बाजार से गायब है। छह दिनों में महानगर में …
मुरादाबाद, अमृत विचार। कोरोना के उपचार में प्रयोग किए जाने वाले रेमडेसिविर इंजेक्शन के बाद अब ब्लैक फंगस के इंजेक्शन भी बाजार से गायब होते नजर आ रहे हैं। इसके रोगियों के उपचार में सबसे अधिक एम्फोटेरेसिन-बी इंजेक्शन प्रयोग किया जाता है। वर्तमान में ये इंजेक्शन बाजार से गायब है। छह दिनों में महानगर में ब्लैक फंगस के आठ मामले सामने आए हैं। इससे स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों में चिंता बनी हुई है।
सांस व फेफड़ा रोग विशेषज्ञ डा. सीपी सिंह का कहना है कि इससे पहले यह संक्रमण कम लोगों में पाया जाता था, जिस वजह से इसकी दवा भी आसानी से बाजारों में उपलब्ध हो जाती थी। लेकिन, कोरोना के बाद से अधिकतर लोगों में ब्लैक फंगस की पुष्टि हो रही है। इस वजह से बाजार में एम्फोटेरेसिन-बी नामक इंजेक्शन आसानी से उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। उन्होंने बताया कि ब्लैक फंगस के रोगियों का दो माह तक उपचार किया जाता है। इसमें लगातार संक्रमण से ग्रस्त लोगों को सुबह-शाम इंजेक्शन लगाया जाता है।
कैसे करें इस रोग की पहचान
ब्लैक फंगस कोरोना से ठीक हुए अधिकतर लोगों में पाया जा रहा है। इस संक्रमण की पहचान का तरीका है कि लोगों की आंखों में सूजन व भारीपन के साथ ही लालिमा नजर आने लगती है। ये लक्षण कोरोना से ठीक होने के करीब 15 दिन बाद दिखाई देने लगते हैं।
लक्षण नजर आते ही करें कुशल चिकित्सक से संपर्क
इसका पहला लक्ष्ण आखों में चुभन के साथ शुरू होता है। इसे अगर गंभीरता से न लिया तो पीड़ित की जान भी जा सकती है। ऐसे में लक्षण नजर आते ही जल्द से जल्द कुशल चिकित्सक से संपंर्क करें और उपचार शुरू कराए, जिससे गंभीर समस्या उत्पन्न न हो सके।
दवाओं से गुर्दे भी हो सकते हैं खराब
इस बीमारी में इस्तेमाल होने वाली दवा बेहद नुकसानदायक है। इससे पीड़ित के गुर्दे तक खराब हो सकते है। हालांकि इस संक्रमण का इलाज इंजेक्शन के माध्यम से ही शुरू किया जाता है। संक्रमण में एम्फोटेरेसिन-बी और पोसिकोनजोल इंजेक्शन व गोलियां इस्तेमाल की जाती है।
मेडिकल संचालक शोभित मेहरोत्रा ने कहा कि ब्लैक फंगस में एम्फोटेरेसिन-बी इंजेक्शन का इस्तेमाल किया जाता है। ये बीमारी पहले कम लोगों में पाया जाता था। लेकिन, अब हर दूसरे व्यक्ति में यह संक्रमण पाया जा रहा है। इस वजह से इंजेक्शन नहीं मिल पा रहे हैं।
