हल्द्वानी: पहाड़ों की बाल सुधार औषधि ‘बिच्छू घास’ सुधारेगी सेहत
अंकुर शर्मा, हल्द्वानी। पहाड़ों की बाल सुधार वटी ‘बिच्छू घास’… जो अमूमन पहाड़ के हर घर में बच्चों को डराने और सुधारने के लिए इस्तेमाल की जाती है, अब कोविड-19 महामारी के दौर में सेहत सुधारने व रोग प्रतिरोधी तंत्र मजबूत करने के काम आएगी। उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में छूते ही डंक मारने की …
अंकुर शर्मा, हल्द्वानी। पहाड़ों की बाल सुधार वटी ‘बिच्छू घास’… जो अमूमन पहाड़ के हर घर में बच्चों को डराने और सुधारने के लिए इस्तेमाल की जाती है, अब कोविड-19 महामारी के दौर में सेहत सुधारने व रोग प्रतिरोधी तंत्र मजबूत करने के काम आएगी। उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में छूते ही डंक मारने की वजह से अपनी झनझनाहट के लिए पहचानी जाने वाली यह घास औषधीय गुणों की वजह से पहाड़ से मैदान तक सभी की पसंदीदा बन गई है। इस घास में पाए जाने वाले तत्व सिर्फ कैंसर प्रतिरोधी नहीं बल्कि वायरस से लड़ने के लिए शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में भी मददगार हैं।
वन अनुसंधान संस्थान के अधिकारियों के अनुसार बिच्छू घास का वानस्पतिक नाम जिरार्डीनिया हेट्रोफाइला है और यह आर्टिकेसी कुल का पौधा है। इसको कुमाऊं में सिसौंण और गढ़वाल में कण्डाली के नाम से जाना जाता है। इस बिच्छू घास में विटामिन ए, सी, आयरन, पोटेशियम, मैग्नीज, कैल्सियम, नेचुरल मल्टी विटामिन भरपूर मात्रा में मिलता है। बिच्छू घास में पाए जाने वाले ये तत्व कैंसर विरोधी होते हैं इसलिए एंटी कैंसरस दवाओं में इसका इस्तेमाल किया जाता है।
इधर, घास में पाए जाने वाले नेचुरल व सभी विटामिन व अन्य पोषक खनिज होने की वजह से ये शारीरिक रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में भी मददगार है। इससे शरीर किसी भी वायरस से आसानी से लड़ सकता है और वायरस के शरीर पर होने वाले दुष्प्रभाव को कम करता है। इस वजह से कोविड-19 महामारी के दौर में बिच्छू घास की मांग लगातार बढ़ रही है। इसका सेवन करने से प्राकृतिक ढंग से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाई जा सकती है। पर्वतीय क्षेत्रों में इसका साग बनाकर खाया जाता है।
इस तरह करें इस्तेमाल
बिच्छू घास को पहले धूप में सुखाया जाता है। पत्ते सूख जाने के बाद उसका पाउडर बना लिया जाता है। इस पाउडर को चाय, लेमन टी और काढ़ा बनाकर सेवन किया जा सकता है। इसका नियमित सेवन करने से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और प्रतिरोधी तंत्र मजबूत होता है।
इन बीमारियों के लिए भी है फायदेमंद
पित्त दोष, मोच, जकड़न, बुखार, मलेरिया, सर्दी-जुकाम, खांसी, छातीदर्द में यह घास कारगर औषधि है। वहीं कैंसर प्रतिरोधी और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में भी रामबाण औषधि है। इस वजह से वन अनुसंधान जनता को प्राकृतिक इसका सेवन करने का सलाह दे रहा है।
बिच्छू घास को काढ़ा, चाय में सेवन कर सकते हैं। यह प्राकृतिक ढंग से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मददगार है। यह भी किसी भी किस्म का संक्रमण होने में रामबाण औषधि है। इसका नियमित सेवन करना चाहिए।-मदन बिष्ट, रेंजर वन अनुसंधान संस्थान हल्द्वानी
