हल्द्वानी: सुशीला तिवारी अस्पताल में गार्ड निभा रहे दोहरी जिम्मेदारी
दीपिका नेगी, हल्द्वानी। महामारी के इस दौर में अस्पतालों में डॉक्टर, मेडिकल स्टाफ और सफाई कर्मचारियों के साथ ही सिक्योरिटी गार्ड भी तमाम चुनौतियों के बीच अपनी जिम्मेदारियां बखूबी निभा रहे हैं। बात अगर कुमाऊं के सबसे बड़े अस्पताल सुशीला तिवारी की करें तो यहां मरीज कम हों या ज्यादा, लेकिन अस्पताल के 35 सुरक्षा …
दीपिका नेगी, हल्द्वानी। महामारी के इस दौर में अस्पतालों में डॉक्टर, मेडिकल स्टाफ और सफाई कर्मचारियों के साथ ही सिक्योरिटी गार्ड भी तमाम चुनौतियों के बीच अपनी जिम्मेदारियां बखूबी निभा रहे हैं। बात अगर कुमाऊं के सबसे बड़े अस्पताल सुशीला तिवारी की करें तो यहां मरीज कम हों या ज्यादा, लेकिन अस्पताल के 35 सुरक्षा कर्मी कर्मठ सेवाभाव से यहां डटे हुए हैं। अब तक उन्होंने हर चुनौती को सकर पार किया है। वे मरीजों व उनके तीमारदारों की हर समस्या का निदान करने का प्रयास कर रहे हैं।
सुशीला तिवारी अस्पताल में सिक्योरिटी इंचार्ज नवीन चंद्र तिवारी, जो वर्ष 2008 से सुशीला तिवारी अस्पताल में बतौर सुरक्षा कर्मी के तौर पर तैनात हैं। उनके साथ उनके 35 सहयोगी सुरक्षा कर्मी अस्पताल की सुरक्षा प्रबंधन का जिम्मा उठाए हैं। खास बात ये है कि सभी सेना से सेवानिवृत्त हैं, इसलिए अपने काम को लेकर वे ज्यादा सजग और समर्पित रहते हैं। वे तीन शिफ्ट्स में काम कर सुबह 6 से 2, दोपहर 2 से 9, रात नौ से फिर सुबह छह बजे तक चौकन्ना होकर ड्यूटी करते हैं। रात-देर रात किसी प्रकार की घटना होने पर भी उन्हें मौके पर पहुंचना पड़ता है। अस्पताल में बाहर से आने वाले हर व्यक्ति से पूछताछ करने के साथ ही वाहनों की एंट्री, पार्किंग की व्यवस्था आदि देखते हैं। अभी यहां 10 से 12 सुरक्षा कर्मियों की और जरूरत है। इसके लिए अस्पताल प्रबंधन कार्रवाई कर रहा है।
कभी सख्त तो कभी नर्म रखना पड़ता है रवैया
नवीन चंद्र बताते हैं कि कभी-कभी अनावश्यक लोग अस्पताल में प्रवेश लेने का प्रयास करते हैं। ऐसे में सख्त मिजाज बनकर उन्हें रोकना पड़ता है। संक्रमण की रोकथाम के लिए कोशिश रहती है कि जरूरी व्यक्ति को ही प्रवेश दिया जाए, इसके लिए पूछताछ करनी पड़ती है। कई लोग नाराज भी हो जाते हैं, कई झगड़ा भी करते हैं, लेकिन ये हमारी ड्यूटी है इसलिए सख्त बनना पड़ता है। वैसे ही कुछ पहाड़ के सीधे-सादे लोग, अंजान लोग भी आते हैं, जिन्हें जानकारी न होने पर उनसे नर्मी से पेश आना पड़ता है।
मरीजों और तीमारदारों के बीच संदेशवाहक बन कर रहे सेवा
संक्रमण की दूसरी लहर के बीच दर्जनों कोरोना संक्रमित मरीज अस्पताल में भर्ती हो रहे हैं। अस्पताल में भर्ती कोरोना के मरीजों से उनके परिजनों को मिलने की इजाजत नहीं है। ऐसे में अपनों की तबियत की खैर-खबर के लिए कोई तो चाहिए जो उन तक अपनी बात पहुंचा सके। इसके लिए सुरक्षा कर्मी सभी के बीच की कड़ी बने हुए हैं। तीमारदार अपने संक्रमित स्वजन का हाल-चाल पूछने से लेकर जरूरी दवाएं और फल व सामान देने के लिए गेट पर आते हैं। ऐसे में नवीन हर रोज अपने स्टाफ के साथ मिलकर कोरोना संक्रमित मरीजों और उनके तीमारदारों के बीच संदेशवाहक के रूप में सेवा में जुटे रहते हैं।
