अल्मोड़ा: सरकार से नाराज 25 युवाओं ने उठाया चार किमी सड़क बनाने का जिम्मा

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आदित्य प्रकाश पंत, अल्मोड़ा। आजादी के बाद से सड़क का इंतजार कर रहे अल्मोड़ा जिले के ताकुला ब्लॉक स्थित सुनौली (सीमा) गांव के लोगों का सब्र अब टूट चुका है। यहां के 25 युवाओं ने गांव को सड़क से जोड़ने का बेड़ा खुद ही उठाया है। इस कारोनाकाल में इन युवाओं ने 300 मीटर के …

आदित्य प्रकाश पंत, अल्मोड़ा। आजादी के बाद से सड़क का इंतजार कर रहे अल्मोड़ा जिले के ताकुला ब्लॉक स्थित सुनौली (सीमा) गांव के लोगों का सब्र अब टूट चुका है। यहां के 25 युवाओं ने गांव को सड़क से जोड़ने का बेड़ा खुद ही उठाया है। इस कारोनाकाल में इन युवाओं ने 300 मीटर के करीब कच्ची सड़क तैयार भी कर ली है। सरकार से इन्हें गहरी नाराजगी है। उनका कहना है कि यह गांव सांसद द्वारा गोद लिया गया है और सोबन सिंह जीना का जन्मस्थल है। इसके बाद भी इस गांव की किसी ने सुध नहीं ली। इससे उन्हें नाराजगी है।

विधानसभा चुनाव में वोट नहीं देने का भी ऐलान
गांव के लोगों में राज्य सरकार के खिलाफ इतनी नाराजगी है कि उन्होंने 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव में वोट न डालने का भी ऐलान किया है। कहा कि कई सरकारें आई, लेकिन इस गांव की ओर किसी नेता ने चुनाव जीतने के बाद मुड़कर नहीं देखा। हर बार वोट मांगने के लिए प्रत्याशी यहां पहुंचते हैं और चुनाव जीतने के बाद कभी मुड़कर नहीं देखते हैं। इसलिए इस बार विस चुनाव का पूर्ण रूप से बहिष्कार किया जाएगा।

संकरे रास्ते से डोली पर अस्पताल लाते हैं मरीज
इस गांव में सबसे बड़ी दिक्कत उस समय होती है, जब यहां पर कोई बीमार हो जाता है। गांव में दूर-दूर तक कहीं भी प्राथमिक उपचार की व्यवस्था नहीं है। बीमार व्यक्ति को संकरे रास्तों से डोली पर अस्पताल पहुंचाया जाता है। युवाओं का कहना है कि स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में पहले कई लोग दम गांव में ही दम चुके हैं। सरकार जब गांव के लोगों को मूलभूत सुविधाएं नहीं दे सकती है तो इन्हें वोट मांगने का भी हक नहीं है।

मोबाइल में नहीं आता नेटवर्क
मोबाइल नेटवर्क की भी इस गांव में सबसे बड़ी दिक्कत है। नेटवर्क ढूंढने के लिए लोगों को चार किमी दूर जाना पड़ता है। कभी सिग्नल आते हैं कभी नहीं आते हैं। इन समस्याओं के जंजाल में फंसे ग्रामीण यहां घुट-घुट कर जीने को मजबूर हो रहे हैं।

पर्यावरण को न हो नुकसान, इसका भी रखा जा रहा ध्यान
गांव को सड़क से जोड़ने में जुटे युवा हरीश कांडपाल और नरेश कांडपाल का कहना है कि उनकी टीम पर्यावरण का भी पूरा ध्यान रख रही है। पर्यावरण को किसी प्रकार का नुकसान न हो इसके लिए खोदाई के वक्त पेड़ों का भी पूरा ध्यान रखा जा रहा है। उनका मकसद गांव को सड़क से जोड़ना है। हालांकि कुछ लोग इसका विरोध कर रहे हैं, लेकिन यह गलत है।

टीम में शामिल हैं ये युवा
सड़क बनाने में हरीश काण्डपाल, नवल, जगदीश, राजू, नरेश, कमल, विमल, मोहित, चन्द्र शेखर, दिनेश, राघव, गोलू, छोटू, योगेश, संजय वह अन्य गांव के लोग लगे हैं।

कोरोनाकाल की वजह से हम कुछ काम नहीं कर पा रहे हैं। इस सड़क के मामले में सांसद अजय टम्टा से बात की है। सांसद ने इस मार्ग को और आगे तक बढ़ाने की बात कही है, लेकिन लेटलतीफी से गांव वालों में आक्रोश है, इसलिए वह पैदल मार्ग बनाने में जुटे हैं।
मीना देवी, ग्राम प्रधान, सुनौली

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