पर्यावरण संरक्षण के लिए जड़ी-बूटी शोध संस्थान ने की ये अनूठी पहल…
अंकुर शर्मा, हल्द्वानी। जड़ी-बूटी शोध संस्थान के अधिकारियों के अनुसार वर्तमान में लाखों लोग फ्लैट्स, अपार्टमेंट्स या किराए के घरों में रहते हैं। ऐसे में उनका गार्डन बनाने का सपना अधूरा रह जाता है। इसी को ध्यान में रखकर ‘इंडोर हर्बल गार्डन’ बनाया है। यह गार्डन आसानी से घर में तैयार किया सकता है। घर …
अंकुर शर्मा, हल्द्वानी। जड़ी-बूटी शोध संस्थान के अधिकारियों के अनुसार वर्तमान में लाखों लोग फ्लैट्स, अपार्टमेंट्स या किराए के घरों में रहते हैं। ऐसे में उनका गार्डन बनाने का सपना अधूरा रह जाता है। इसी को ध्यान में रखकर ‘इंडोर हर्बल गार्डन’ बनाया है। यह गार्डन आसानी से घर में तैयार किया सकता है। घर के अंदर बना यह गार्डन घर व आसपास की हवा शुद्ध करने में मददगार होगा। इस गार्डन में जड़ी-बूटियां उगाई जाती हैं इसलिए सेहत संवारने में भी मदद मिलेगी और ये बूटियां कई रोगों में फायदेमंद है। इधर जड़ी बूटी शोध संस्थान इनडोर हर्बल गार्डन लगाने के लिए लोगों को जानकारी व ट्रेनिंग भी देगा ताकि गार्डन लगाने में परेशानी नहीं हो। इससे जड़ी बूटी एवं पर्यावरण दोनों के संरक्षण में मदद मिलेगी।
= यहां लगाए जा सकते हैं पौधे =
अधिकारियों के अनुसार इनडोर हर्बल गार्डन खूंटी बोर्ड, लटकते प्लांट्स, खिड़की के समीप गमले, जार-मोन जार प्लांटर्स, मेज, लटकी हुई टोकरियों आदि में भी लगाया जा सकता है।
= इन पौधों से बनाया जा सकता है इनडोर हर्बल गार्डन =
तुलसी, जम्बू, कैमोमाईल, सैलेरी, लेवेंडर, मारजोरम, पुदीना, आरिगेनो, रोजमैरी, सालविया, जिरेनियम, थाईम, नीम, बरगद, पीपल आदि।
= ये हैं फायदे =
= पौधों से ऑक्सीजन जेनरेट होती है तो घर व आसपास का पर्यावरण शुद्ध रहेगा
= एंटी बैक्टीरिया की तरह काम करेंगे इनडोर गार्डन के तुलसी, नीम वगैरह पौधे
= घर की उगी शुद्ध जड़ी बूटियों के नियमित सेवन से सेहत सुधार होगा
= जड़ी बूटी का संरक्षण एवं संवर्द्धन दोनों में मददगार
= सर्दी, खांसी, जुकाम आदि कई रोगों के उपचार में जड़ी बूटियां हैं रामबाण
इनडोर हर्बल स्टेडियम किसी भी फ्लैट्स, अपार्टमेंट्स या एक-दो कमरे के घर में भी बनाया जा सकता है। इस कॉन्सेप्ट से जड़ी बूटियों का संरक्षण एवं संवर्द्धन तो होगी ही घर व आसपास का पर्यावरण भी शुद्ध रहेगा। साथ ही जड़ी बूटी के सेवन से लोगों की सेहत बनाने में भी मदद मिलेगी।
= डॉ. चंद्रशेखर सनवाल, निदेशक, जड़ी बूटी शोध संस्थान गोपेश्वर, चमोली
