हल्द्वानी: अब गांव –गांव पहुंचेगी वाटर टेस्टिंग किट, जल परीक्षण हुआ आसान

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प्रशांत पांडेय, हल्द्वानी। जिन स्त्रोतों से हमें जल प्राप्त होता हैं। उसमें रासायनिक तत्वों के सूक्ष्म कण व बैक्टीरिया होते हैं। इनमें से कुछ हमें फायदा पहुंचाते हैं तो कुछ से नुकसान भी होता है। कई बार पानी में पाए जाने वाले वैक्टीरिया से हमें कई रोग हो जाते हैं। ऐसे में लूज मोशन, उल्टी …

प्रशांत पांडेय, हल्द्वानी। जिन स्त्रोतों से हमें जल प्राप्त होता हैं। उसमें रासायनिक तत्वों के सूक्ष्म कण व बैक्टीरिया होते हैं। इनमें से कुछ हमें फायदा पहुंचाते हैं तो कुछ से नुकसान भी होता है। कई बार पानी में पाए जाने वाले वैक्टीरिया से हमें कई रोग हो जाते हैं। ऐसे में लूज मोशन, उल्टी व अन्य गंभीर बीमारियों के होने का खतरा भी बना रहता है। लोगों के स्वास्थ्य के मद्देनजर शासन के निर्देश पर जल संस्थान विभाग द्वारा वाटर टेस्टिंग किट मुहैया कराई जाएगी।

वैसे तो पानी की गुणवत्ता की जांच के लिए बाजार में अनेक प्रकार की टेंस्टिंग किट व टेस्टर उपलब्ध हैं। जिससे पानी में मौजूद खनिज, रासायनिक तत्व व किटाणुओं की परख की जा सकती है। लेकिन अब जल संस्थान द्वारा तैयार रुपरेखा के मुताबिक ग्राम पंचायत स्तर पर भी यह किट उपलब्ध कराई जाएगी।  विभाग द्वारा दी जाने वाली किट के जरिए प्रति किट 100 सैंपल की जांच हो सकेगी। इस किट से पानी में मौजूद हानिकारक तत्वों के अलावा अधिक मात्रा मैं मौजूद खनिजों की मात्रा भी देखी जा सकती है। यह किट मुहैया कराने के पीछे शासन की मंशा यह है कि अशुद्ध पानी के सेवन से लोगों में होने वाली बीमारियों पर नियंत्रण पाया जा सके।

पानी में इन तत्वों की अधिकता है हानिकारक

पानी में क्लोराइड 250-1000 मिग्रा/ली से अधिक होने से पानी के स्वाद में बदलाव व आयरन 0.3-1.0 मिग्रा/ली-अधिक हुआ तो रंग व स्वाद में अंतर की शिकायत होने लगती है। फ्लोराइड 1.0-1.5 मिग्रा/ली. अधिक होने से दांत व हड्डी कमजोर हो जाते हैं। लिहाजा इन तत्वों की दुष्प्रभाव से बचाने के लिए विभाग द्वारा हर छह माह में जांच की जा रही है।

इन किटों को बरसाती सीजन से पूर्व वितरित किया जाना है। कोरोना काल के चलते यह कवायद शुरु नही हो सकी थी। इसके लिए सभी आवश्यक तैयारियां पूरी की जा चूकी है। पंकज फुलारा, केमिस्ट, पेयजल परीक्षण

 

 

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