बाराबंकी के एसपी व सीडीओ समेत कई अन्य अधिकारियों को हाईकोर्ट से मिली राहत
विधि संवाददाता लखनऊ। हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने एक आपराधिक मामले में बाराबंकी के तत्कालीन एसपी अरविंद चतुर्वेदी व सीडीओ मेघा रूपम समेत खंड विकास अधिकारी, ग्राम्य विकास अधिकारी, थानाध्यक्ष देवां व एसआई जैद अहमद को बड़ी राहत दी है। इन अधिकारियों को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, बाराबंकी ने विचारण के लिए तलब किया था। न्यायालय …
विधि संवाददाता
लखनऊ। हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने एक आपराधिक मामले में बाराबंकी के तत्कालीन एसपी अरविंद चतुर्वेदी व सीडीओ मेघा रूपम समेत खंड विकास अधिकारी, ग्राम्य विकास अधिकारी, थानाध्यक्ष देवां व एसआई जैद अहमद को बड़ी राहत दी है। इन अधिकारियों को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, बाराबंकी ने विचारण के लिए तलब किया था। न्यायालय ने फिलहाल सम्बंधित प्रक्रिया पर रोक लगा दी है। मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी।
यह आदेश न्यायमूर्ति मोहम्मद फैज आलम खान की एकल पीठ ने राज्य सरकार की पुनरीक्षण याचिका पर पारित किया। याचिका में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के 17 फरवरी 2021 के एक आदेश को चुनौती दी गई थी। दरअसल स्थानीय निवासी राम प्रताप के प्रार्थना पत्र पर सीजेएम ने बीडीओ अनूप कुमार सिंह व ग्राम्य विकास अधिकारी बीना के खिलाफ वादी पर हमला करने इत्यादि आरोपों में एफआईआर दर्ज करने का आदेश बाराबंकी जनपद के देवां थाने को दिया था।
उक्त एफआईआर पर जांच के दौरान घटना की जांच सीडीओ द्वारा भी की गई। सीडीओ ने अपनी जांच में राम प्रताप द्वारा लगाए आरोपों को बेबुनियाद बताया व एक रिपोर्ट एसपी को भी प्रेषित कर दी। उधर पुलिस ने सीडीओ की रिपोर्ट के को देखते हुए, विवेचना के उपरांत अभियुक्तों को क्लीन चिट देते हुए, फाइनल रिपोर्ट लगा दी।
फाइनल रिपोर्ट के विरुद्ध एक प्रोटेस्ट प्रार्थना पत्र वादी द्वारा दाखिल किया गया। सीजेएम ने उक्त प्रोटेस्ट प्रार्थना पत्र पर संज्ञान लेते हुए, उपरोक्त सभी अधिकारियों को तलब कर लिया। राज्य सरकार की ओर से पेश अपर महाधिवक्ता वीके शाही ने दलील दी कि सीजेएम का तलबी आदेश मनमाना और अविधिपूर्ण है।
कहा गया कि सरकारी अधिकारी होने के नाते इन सभी को सीआरपीसी की धारा 197 के तहत संरक्षण प्राप्त है। न्यायालय ने मामले की सभी परिस्थितियों पर गौर करने के पश्चात सीजेएम कोर्ट के समक्ष चल रही उक्त कार्यवाही पर रोक लगा दी है।
