‘इंदिरा दीदी’ की विरासत के कई दावेदार

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अंकुर शर्मा, हल्द्वानी। कांग्रेस में हल्द्वानी विस सीट के उप चुनाव और आगामी विस चुनाव में टिकट को लेकर सियासी घमासान मचना शुरू हो गया है । हल्द्वानी ही नहीं कुमाऊं की सियासत में दखल रखने वाली कांग्रेस की कद्दावर नेता डॉ. इंदिरा हृदयेश के निधन के बाद कांग्रेस के ‘सियासतदारों’ ने टिकट के लिए …

अंकुर शर्मा, हल्द्वानी। कांग्रेस में हल्द्वानी विस सीट के उप चुनाव और आगामी विस चुनाव में टिकट को लेकर सियासी घमासान मचना शुरू हो गया है । हल्द्वानी ही नहीं कुमाऊं की सियासत में दखल रखने वाली कांग्रेस की कद्दावर नेता डॉ. इंदिरा हृदयेश के निधन के बाद कांग्रेस के ‘सियासतदारों’ ने टिकट के लिए देहरादून से दिल्ली तक बिसातें बिछानी शुरू कर दी है। वहीं स्थानीय स्तर पर भी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को साधने की कोशिशें तेज हैं।

नेता प्रतिपक्ष स्व. डॉ. इंदिरा हृदयेश राज्य गठन के बाद साल 2002 से अब तक हुए चार विस चुनावों में सिर्फ एक बार साल 2007 का चुनाव हारीं। साल 2012 में उन्होंने बंशीधर भगत को मात देकर सीट पर न केवल जीत दर्ज की बल्कि इस सीट को कांग्रेस का किला बना दिया। यही वजह है कि 2017 में प्रचंड मोदी लहर और विस परिसीमन में बदलाव के बाद भी इंदिरा ने हजारों मतों से जीत दर्ज की। इधर, अब तक कांग्रेस की परंपरागत मानी जाने वाली इस सीट पर कांग्रेस का झंडा ऊंचा करने के लिए कई ‘हाथ’ उठने लगे हैं। देहरादून से लेकर दिल्ली तक गोटियां बिछाना शुरू कर दी हैं।

कद्दावर कांग्रेसियों से नजदीकी बढ़ाई जा रही हैं। वहीं पुराने कांग्रेसियों से रिश्तेदारी भी प्रोफाइल में सजाई जा रही है। अब कांग्रेस आलाकमान के सामने टिकट फाइनल करने को लेकर सरगर्मी बढ़ गई हैं। कांग्रेस ने स्थानीय स्तर पर लोकप्रियता वगैरह पता लगाना शुरू कर दिया है।

 

कांग्रेस के संभावित दावेदार

1-राज्य आंदोलनकारी ललित जोशी वर्तमान में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सदस्य हैं। उनके राजनीतिक जीवन की शुरूआत कांग्रेस से हुई है। वह 1997-98 में एमबीपीजी कॉलेज के छात्रसंघ अध्यक्ष, यूथ कांग्रेस व एनएसूयआई में प्रदेश प्रवक्ता व सचिव के पदों, कुमाऊं मोटर्स ऑनर्स यूनियन के चेयरमैन और स्व. एनडी तिवारी की सरकार में दर्जा मंत्री रह चुके हैं। युवाओं में जबरदस्त पकड़ उनकी ताकत है। संगठन व चुनाव के लिहाज से मैनेजमेंट के वाकिफ हैं। जब 2002 में  इंदिरा हृदयेश का सभी पदाधिकारियों ने साथ छोड़ दिया था तो मैडम को चुनाव जिताने में उनकी अहम भूमिका रही है।

2-सुमित हृदयेश नेता प्रतिपक्ष स्व. इंदिरा हृदयेश के बेटे हैं। वह तकरीबन छह सालों तक मंडी अध्यक्ष भी रह चुके हैं। वह एनएसयूआई और यूथ कांग्रेस में भी रह चुके हैं। वर्तमान में वह भारतीय कांग्रेस के सदस्य हैं। कांग्रेस के सभी धरना प्रदर्शन व कार्यक्रमों में शिरकत करने के साथ ही सार्वजनिक मंचों पर भी नजर आते हैं। उन्होंने हल्द्वानी नगर निगम के लिए मेयर पद का चुनाव भी लड़ा है। मां (इंदिरा हृदयेश) को उन्होंने कई चुनाव लड़ाए इसलिए सभी चुनावी दावपेंच से भी वाकिफ हैं।

3-दीपक बल्यूटिया वर्तमान में कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता हैं। वह यूथ कांग्रेस व कांग्रेस में कई अहम पदों पर रह चुके हैं। स्व. नारायण दत्त तिवारी के रिश्तेदार हैं। जनता और पार्टी के बीच सेतु का काम करते हैं। संगठन की राजनीति में महारत हासिल है। स्कूल स्वामी होने की वजह से समाज में साफ और अच्छी छवि है। सामयिक मुद्दों को उठाकर विपक्ष को घेरते हैं। कई प्रादेशिक मुद्दों को उठाकर सुर्खियों में आए हैं

4-अब्दुल मतीन सिद्दीकी समाजवादी पार्टी में प्रदेश महासचिव रहे हैं। उन्होंने 2013 सपा के टिकट पर मेयर का चुनाव लड़ा और महज 1200 वोटों के अंतराल से चुनाव हारे थे। वह 2016 में सपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए थे तब उन्होंने कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया गया था। तब से वह अभी तक कांग्रेस में जुड़े हुए हैं। एक वर्ग विशेष के मतदाताओं पर उनकी खास पकड़ कही जाती है।

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