भाजपा के “चिंतन” में भी सामने आई त्रिवेंद्र के लिए अपनों के मन की टीस
अंकुर शर्मा, हल्द्वानी। भारतीय जनता पार्टी, बेशक मिशन-2022 को फतेह करने के लिए ‘चिंतन’ कर रही है, लेकिन भाजपा के चुनिंदा नेतृत्व के आपसी ‘मनभेद’ ने पार्टी रणनीतिकारों की ‘चिंता’ बढ़ा दी है। भाजपा आला कमान ने मुखिया बदलकर डैमेज कंट्रोल करने की कोशिश की, लेकिन अभी भी कहीं न कहीं टीस है, जो दर्द …
अंकुर शर्मा, हल्द्वानी। भारतीय जनता पार्टी, बेशक मिशन-2022 को फतेह करने के लिए ‘चिंतन’ कर रही है, लेकिन भाजपा के चुनिंदा नेतृत्व के आपसी ‘मनभेद’ ने पार्टी रणनीतिकारों की ‘चिंता’ बढ़ा दी है। भाजपा आला कमान ने मुखिया बदलकर डैमेज कंट्रोल करने की कोशिश की, लेकिन अभी भी कहीं न कहीं टीस है, जो दर्द बनकर सतही हो जाती है। चिंतन शिविर में भी इसकी बानगी देखने को मिली। पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के खिलाफ बिगुल फूंकने वाले डीडीहाट विधायक वर्तमान में पेयजल मंत्री बिशन सिंह चुफाल और श्रम मंत्री हरक सिंह रावत का दर्द छलक पड़ा।
इधर बिशन दा बोले-
‘गलती वहां पर हुई, जहां कैबिनेट में सीटें खाली थीं कुछ करना चाहए था, लेकिन कुछ नहीं हुआ’
‘मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत एंड कैबिनेट के बाद भी दो पद रिक्त थे। गलती वहां पर हुई, जहां सीटें रिक्त थीं, लेकिन किसी को जगह नहीं दी गई’ यह दर्द पेयजल मंत्री बिशन सिंह चुफाल ने बयां किया।
चुफाल ने कहा कि मौसम बदलने से कुछ नहीं होता है, सरकार में आने के बाद भी संगठन और कार्यकर्ता की जरूरत होती है। उन्होंने कहा कि बेशक कोई भी पार्टी मंत्री बनाने से पहले काबलियत, क्षेत्रगत, जातिगत समीकरण देखती है, लेकिन भाजपा ने हमें बहुत कुछ दिया, पांच बार का विधायक बनाया और सम्मान दिया। हमें कुछ नहीं चाहिए, मगर कार्यकर्ता जो किसी भी पार्टी की रीढ़ होते हैं उनका सम्मान करना चाहिए। जब वे खुश होंगे तभी हम हैं। यह कहकर उन्होंने इशारों-इशारों में साफ कर दिया कि टीएसआर के कार्यकाल में ‘कहीं न कहीं सबका साथ और सबका विश्वास’ की कमी थी।
उधर हरक दा बोले-
‘त्रिवेंद्र सिंह रावत तो बड़े नेता हैं वो कुछ भी कर सकते हैं’
वन मंत्री हरक सिंह रावत ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत तो बड़े नेता हैं, वह जो चाहे कह सकते हैं और कुछ भी कर सकते हैं। वह तो मुख्यमंत्री भी रहे हैं उनको कौन कुछ कह सकता है। यह प्रतिक्रिया कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत ने पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत के नैनीताल में दिए बयान पर दी जिसमें उन्होंने कहा था कि निर्वाचन आयोग को उप चुनाव पर जल्द फैसला लेना चाहिए, क्योंकि यह एक संवैधानिक प्रक्रिया है।
श्रम मंत्री हरक सिंह रावत और पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का टकराव जगजाहिर है। श्रमकार बोर्ड, वन अधिकारियों के तबादले को लेकर दोनों के अंदरूनी मतभेद सामने आए थे। जिसके बाद दोनों आमने-सामने हो गए थे। यह विवाद प्रदेश की राजधानी देहरादून से हटकर देश की राजधानी दिल्ली तक पहुंच गया था।
