हल्द्वानी: जीएसटी के चार साल, सहूलियत भी और कठिनाई भी
हल्द्वानी, अमृत विचार। एक जुलाई 2017 को लागू हुए जीएसटी को आज चार साल पूरे हो रहे हैं। इन चार सालों में जीएसटी से कारोबारियों, अधिवक्ताओं को सहूलियत व जटिलताएं दोनों का ही सामना करना पड़ा। जीएसटी अधिवक्ता सुमित गुप्ता ने बताया कि जीएसटी में टैक्स का सरलीकरण आज भी नहीं हुआ है। जीएसटी में …
हल्द्वानी, अमृत विचार। एक जुलाई 2017 को लागू हुए जीएसटी को आज चार साल पूरे हो रहे हैं। इन चार सालों में जीएसटी से कारोबारियों, अधिवक्ताओं को सहूलियत व जटिलताएं दोनों का ही सामना करना पड़ा।
जीएसटी अधिवक्ता सुमित गुप्ता ने बताया कि जीएसटी में टैक्स का सरलीकरण आज भी नहीं हुआ है। जीएसटी में इनपुट टैक्स क्रेडिट का 105 प्रतिशत का नियम परेशानी बन गया है। आईटीसी के दावे के लिए केवल जीएसटीआर-2ए तथा जीएसटीआर-2बी में उपलब्ध आईटीसी को ही क्लेम किया जा सकता है। चूंकि जीएसटी की एक देश में समान प्रणाली है इसलिए केंद्र व राज्य के बीच करदाताओं को परेशानी हो रही है। उन्होंने कहा कि पिछले चार सालों में सैकड़ों संशोधन हैं लेकिन लगातार बदलाव से अस्थिरता बढ़ी है। जो करदाता वैट से जीएसटी में आए थे उनकी टैक्स समायोजन की समस्या बरकरार है। जीएसटी की वेबसाइट काम नहीं कर रही है इससे ट्रांस-1 नहीं भरे जा सके हैं नतीजा, व्यापारियों को नुकसान हो रहा है।
जीएसटी से हुए ये फायदे
1.जीएसटी से पहले करों की कई दरें थी जो समाप्त हुई।
2.टैक्स पर टैक्स की व्यवस्था में सुधार हुआ ।
3.जीएसटी कलेक्शन में बढ़ोत्तरी हुई और राजस्व बढ़ा।
इन सुधार किए जाने की मांग
1.जीएसटी में अनेक रिटर्न दाखिल करने की व्यवस्था है उक्त में भी सुधार की जरूरत है।
2.आईटीसी लेने की व्यवस्था में सुधार की जरूरत है। विक्रेता की गलती के क्रेता को जबावदेह बनाया गया है।।
3.वर्तमान में एचएसएन कोड की बाध्यता छोटे व्यापारियों के लिए समस्या है।
