कोरोना की तीसरी लहर से पहले की तैयारी
ज्ञानेंद्र सिंह, नई दिल्ली, अमृत विचार। कोरोना की तीसरी लहर से बच्चों को बचाने के लिए अब शिक्षा मंत्रालय के साथ मिलकर स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक रणनीति तैयार की है जिसके तहत प्राथमिक, जूनियर एवं माध्यमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्रों की स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा निगरानी की जाएगी। स्कूल हेल्थ स्कीम और राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य …
ज्ञानेंद्र सिंह, नई दिल्ली, अमृत विचार। कोरोना की तीसरी लहर से बच्चों को बचाने के लिए अब शिक्षा मंत्रालय के साथ मिलकर स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक रणनीति तैयार की है जिसके तहत प्राथमिक, जूनियर एवं माध्यमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्रों की स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा निगरानी की जाएगी। स्कूल हेल्थ स्कीम और राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम को देशभर में सक्रिय किया जाएगा।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोरोना की तीसरी लहर से बच्चों को बचाने के लिए दो स्तर पर कार्य योजना तैयार की है जिसके तहत स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों के स्वास्थ्य पर ध्यान दिया जाएगा और स्कूल न जाने वाले या 6 वर्ष से कम आयु के बच्चों पर आंगनबाड़ी व अन्य सामाजिक संगठनों के माध्यम से नजर रखी जाएगी। ताकि कोई भी बच्चा कोरोना से संक्रमित होने से पहले ही पकड़ में आ सके और यदि कोई बच्चा संक्रमित मिलेगा तो उसे तत्काल बच्चों के समूह से हटाकर कोरनटाइन किया जाएगा।
इस कार्य को अंजाम देने के लिए मोबाइल स्वास्थ्य टीमें बनाई जाएंगी जो वार्ड एवं ब्लॉक स्तर पर काम करेंगी। शिक्षा मंत्रालय एवं स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त तत्वाधान में स्कूल स्वास्थ्य कार्यक्रम को पूरे देश में लागू किया जाएगा और नर्सरी से माध्यमिक कक्षा तक के सरकारी एवं सरकारी सहायता से चलने वाले स्कूलों का नेटवर्क बनाया जाएगा। जिसके माध्यम से इन स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों के स्वास्थ्य पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी।
स्वास्थ्य टीमें स्कूलों के शिक्षकों को भी प्रशिक्षित करेंगी ताकि वे अपने छात्रों के लक्षणों की अग्रिम जानकारी स्वास्थ्य टीमों को दे सकें। स्वास्थ्य टीमों का संपर्क डॉक्टरों से रहेगा और वे तत्काल शिक्षक द्वारा दी गई सूचना के आधार पर स्कूल में स्वास्थ्य जांच शुरू करेंगे। उक्त दोनों कार्यक्रमों की प्रत्येक सप्ताह समीक्षा होगी और हर महीने जिले के नोडल अधिकारियों के साथ बैठक होगी।
अपने जिले की स्थिति से नोडल अधिकारी राज्यों के नोडल अधिकारियों को अवगत कराएंगे और वह स्वास्थ्य मंत्रालय को सूचित करेंगे ताकि यदि किसी खास जिले या राज्य में ज्यादा खराब स्थिति की सूचना मिलती है तो केंद्र सरकार तत्काल वहां पर स्वास्थ्य एवं चिकित्सा सेवा उपलब्ध करवाएगा। हालांकि स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों की स्वास्थ्य की जांच पड़ताल पहले भी होती थी लेकिन वह वर्ष में एक बार औपचारिकता के रूप में होता था मगर अब इसे अनिवार्य एवं ज्यादा प्रभावी से लागू किया गया है।
बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम एवं स्कूल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत न केवल बच्चों के स्वास्थ्य पर निगरानी रखी जाएगी बल्कि शारीरिक दृष्टि से कमजोर, कुपोषित एवं एनीमिया से ग्रसित बच्चों की अलग पहचान की जाएगी और समय-समय पर इन बच्चों की स्क्रीनिंग व बाल रोग विशेषज्ञों के पास रेफर भी किया जाएगा।
इतना ही नहीं मोबाइल स्वास्थ्य टीमें स्कूलों व रिहायशी इलाकों में सुरक्षित पेयजल आपूर्ति व स्वच्छता को भी सुनिश्चित करेंगे। मोबाइल स्वास्थ्य टीमें, शिक्षकों एवं अभिभावकों को कुछ टिप्स देकर बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति एक माहौल तैयार करेंगे जिसमें मुख्य रूप से यह जानकारी दी जाएगी कि बच्चों को शिक्षा ही नहीं उनके लिए बेहतर स्वास्थ्य भी जरूरी है।
